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तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाले भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। हाल ही में राज्यसभा में महाराष्ट्र से भाजपा सांसद डॉ. अजीत माधवराव गोपछड़े ने पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री से गैस, तेल भंडारण और आम लोगों को राहत प्रदान करने के संबंध में सवाल उठाया। मंत्री ने अपने जवाब में भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (एसपीआर) की वर्तमान स्थिति, वैश्विक चुनौतियों से निपटने की क्षमता और सरकार की नीतियों पर विस्तार से जानकारी साझा की है ।
भारत की आर्थिक वृद्धि और ऊर्जा की जरूरत
भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शुमार है। मंत्री ने बताया कि पिछली तिमाही में देश की जीडीपी वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत रही, जबकि उससे पहले वाली तिमाही में यह 7.8 प्रतिशत थी। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भी भारत की अपेक्षित विकास दर को 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया है। ऐसे में, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि वैश्विक उथल-पुथल या आपूर्ति बाधा की स्थिति में देश कमजोर न पड़े। मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत जैसे बड़े देश के लिए एक मजबूत और सुरक्षित तेल भंडार आवश्यक है।
भारत के पास पश्चिमी और पूर्वी दोनों तटों पर विशाल समुद्र तट है, जो ऊर्जा बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाता है। पश्चिमी तट पर नायरा, आरआईएल जामनगर, मुंबई, मैंगलोर और कोच्चि जैसी रिफाइनरियां हैं, जबकि पूर्वी तट पर चेन्नई, तत्तिपक्का, विशाखापत्तनम, पारादीप, बरौनी और हल्दिया रिफाइनरियां संचालित हैं। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के अनुसार, भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल उपभोक्ता है। देश की रिफाइनिंग क्षमता वर्तमान में 260 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष है, जो जल्द ही बढ़कर 320 मिलियन मीट्रिक टन हो जाएगी। इसके अलावा, भारत पेट्रोलियम उत्पादों का दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक भी है।
रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार: वैश्विक मानक और भारत की स्थिति
रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (एसपीआर) का मुख्य उद्देश्य वैश्विक संकटों में आपूर्ति बाधा से निपटना है। आईईए के अनुसार, देशों को कम से कम 90 दिनों का भंडार रखना चाहिए। हालांकि, मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह मानक मुख्य रूप से ओईसीडी देशों और छोटे राष्ट्रों के लिए प्रासंगिक है। भारत जैसे बड़े देश में स्थिति अलग है। वैश्विक संकट के दौरान आईईए ने बड़े भंडार वाले देशों से स्टॉक जारी करने को कहा था। इसमें अमेरिका, चीन, जापान के साथ भारत ने भी योगदान दिया, जो देश की मजबूत स्थिति को दर्शाता है।
भारत के एसपीआर मुख्य रूप से भूमिगत गुफाओं में स्थित हैं, जिनकी लोकेशन आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में है। तीसरा भंडार ओडिशा में जल्द शुरू होने की उम्मीद है। मंत्री ने बताया कि केवल गुफाओं में रखे भंडार को ही नहीं, बल्कि रिफाइनरियों, बंदरगाहों और फ्लोटिंग प्लेटफॉर्म पर रखे स्टॉक को मिलाकर कुल 74 दिनों का भंडार उपलब्ध है। हालांकि, आदर्श रूप से 90 दिनों का होना चाहिए, लेकिन 74 दिनों के साथ भी देश सुरक्षित महसूस कर रहा है। भविष्य में इसे बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है।
मंत्री ने कीमतों की अस्थिरता का जिक्र करते हुए कहा कि 2015 से 2022 की अवधि (प्री-कोविड और कोविड काल) में भंडार भरा गया था। उस समय कीमतें आज की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत कम थीं, जो एक सराहनीय कदम है। कीमतों में उतार-चढ़ाव को संतुलित करना चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन सरकार ने इसे प्रभावी ढंग से संभाला।
ऊर्जा सुरक्षा में सरकार की दूरदर्शी नीतियां
मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विजनरी नीतियों का श्रेय देते हुए कहा कि सरकार ऊर्जा की त्रिकोणीय समस्या—उपलब्धता, सामर्थ्य और स्थिरता—को सुनिश्चित करने में सफल रही है। भारत न केवल घरेलू उत्पादन पर निर्भर है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समझौते भी कर रहा है। हाल ही में यूएई के राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान 9 अरब डॉलर की प्राकृतिक गैस आयात डील साइन की गई। इसके अलावा, कतर और अन्य देशों से आयात जारी है। अमेरिका के साथ भी समझौता हुआ है, जिससे जरूरतों का 10 प्रतिशत वहां से खरीदा जा सकेगा।
लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) पर विशेष जोर देते हुए मंत्री ने बताया कि यह रिफाइनरी का उत्पाद है और आम घरों की जरूरत। 2014 में देश में केवल 14 करोड़ एलपीजी कनेक्शन थे, जो अब बढ़कर 33 करोड़ हो गए हैं। यदि एक कनेक्शन एक परिवार को मानें और परिवार में औसतन चार सदस्य, तो लगभग पूरे देश को कवर कर लिया गया है। उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को सिलेंडर मात्र 5 रुपये प्रतिदिन की दर पर मिल रहा है, जबकि गैर-लाभार्थियों को 13-14 रुपये प्रतिदिन। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (ओएमसी) को इससे नुकसान हुआ, लेकिन सरकार ने उन्हें मुआवजा दिया, और आज वे सभी लाभ में हैं।
बायोफ्यूल उत्पादन भी बढ़ रहा है, जो पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा की दिशा में कदम है। मंत्री ने कहा कि एसपीआर का 50 प्रतिशत हिस्सा ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध है, ताकि भंडार अनुत्पादक न रहे। लेकिन जरूरत पड़ने पर सरकार का पहला दावा होगा।
आम आदमी और राष्ट्रीय सुरक्षा का संतुलन
मंत्री ने जोर देकर कहा कि आर्थिक सुरक्षा का मतलब आम आदमी, सशस्त्र सेनाओं और लोकतांत्रिक सरकार की जिम्मेदारी है। आज भारत में कुकिंग गैस की कीमतें दुनिया के कई हिस्सों से कम हैं, जो लोगों को राहत प्रदान कर रही हैं। वैश्विक संकटों में भी भारत ने कीमतों को स्थिर रखा, जो ऊर्जा सुरक्षा की मजबूती का प्रमाण है।
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