राजस्थान के भीलवाड़ा जिले की जहाजपुर नगर पालिका चुनाव के नतीजों ने इस बार स्थानीय सियासत के बड़े-बड़े समीकरण बिगाड़ दिए हैं. सालों से जीत का परचम लहराते आ रहे अनुभवी और कद्दावर नेताओं को जनता ने सिरे से नकार दिया, जबकि नए और युवा चेहरों पर अपना भरोसा जताया है. विशेषकर मुस्लिम बहुल वार्डों में आए इन नतीजों को राजनीति में एक नई शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है.
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21 साल की सानिया बनीं सबसे कम उम्र की पार्षद
वार्ड नंबर 6 से निर्दलीय मैदान में उतरीं सानिया खानम ने इतिहास रच दिया है. अनुभवी नेता नजीर मोहम्मद की पोती सानिया ने बीजेपी प्रत्याशी ममता पंचोली को करारी शिकस्त दी. चुनाव प्रचार के दौरान ही अपने 'जेनजी (Gen-Z) प्रोटेस्ट' वाले बयान से चर्चा में आईं सानिया अब जीत दर्ज कर भीलवाड़ा जिले की सबसे कम उम्र की पार्षद बन गई हैं.
8 बार के अजेय नेता नज़ीर सरवरी को नए चेहरे रईश ने हराया
चुनाव का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला उलटफेर वार्ड नंबर 16 में देखने को मिला. यहां लगातार 8 बार से चुनाव जीतते आ रहे दिग्गज नेता और अंजुमन कमेटी के सदर नज़ीर सरवरी को एक नए मुस्लिम चेहरे, रईश केजीएन ने पटखनी दे दी. दोनों ही प्रत्याशी निर्दलीय के रूप में अपनी किस्मत आजमा रहे थे. लंबे समय से वार्ड पर पकड़ बनाए बैठे सरवरी की इस हार ने सभी को हैरत में डाल दिया है.
भतीजे मुजम्मिल ने चाचा नसीब दाद को चटाई धूल
परिवार और राजनीति का दिलचस्प संगम वार्ड नंबर 17 में देखने को मिला. यहाँ दो बार पार्षद रह चुके और वक्फ बोर्ड के सदर नसीब दाद पठान का मुकाबला अपने ही भतीजे एवं कांग्रेस प्रत्याशी मोहम्मद मुजम्मिल शेर से था. इस पारिवारिक जंग में भतीजे का सियासी दांव भारी पड़ा और मुजम्मिल ने अपने चाचा को 263 वोटों से हरा दिया.
जनता का साफ संदेश: अनुभव पर भारी पड़ी नई सोच
7 बार के विजेता की हार, चाचा को भतीजे द्वारा दी गई शिकस्त और सबसे कम उम्र की पार्षद की जीत- इन तीनों घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि जहाजपुर की जनता अब पारंपरिक राजनीति से आगे बढ़कर बदलाव चाहती है. मतदाताओं ने साफ कर दिया है कि अब केवल पुराना रुतबा काम नहीं आएगा, बल्कि युवाओं का नया नजरिया ही लोकल राजनीति की नई दिशा तय करेगा.
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