Jan Vishwas Bill: संसद ने जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक को मंजूरी दे दी है. गजट नोटिफिकेशन जारी होते ही यह कानून का रूप ले लेगा. इस विधेयक के जरिये 80 केंद्रीय कानूनों में बदलाव किया गया है और करीब एक हजार प्रावधानों को आपराधिक श्रेणी से हटाया गया है.
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वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इसे आम जनता की 'ईज ऑफ लिविंग' सुधारने की दिशा में अहम कदम बताया है. उनके मुताबिक यह विधेयक 'राम राज्य' की अवधारणा के अनुरूप है.
क्या-क्या बदलेगा?
ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यू में देरी: अब डीएल की वैधता खत्म होने के बाद 30 दिन तक का समय मिलेगा. रिन्यू होने पर वैधता की गणना नई तारीख से होगी, पुरानी समाप्ति तिथि से नहीं.
राजमार्ग जाम: राष्ट्रीय राजमार्ग जाम करने पर पहले जेल की सजा का प्रावधान था. अब इसे हटाकर केवल जुर्माना लगाया जाएगा. राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 के तहत पहले इस पर पांच साल जेल तक का प्रावधान था. अब जेल की जगह केवल आर्थिक जुर्माना लगेगा.
झूठा फायर अलार्म: यह अब आपराधिक कृत्य नहीं माना जाएगा.
जन्म-मृत्यु की सूचना न देना: दिल्ली नगर निगम अधिनियम सहित कई कानूनों में यह दंडनीय था. अब इसे अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया है. इसी तरह कॉपीराइट अधिनियम, 1957 के तहत रजिस्टर में गलत प्रविष्टि भी अब अपराध नहीं रहेगी.
आवारा मवेशियों से फसल नुकसान: कैटल ट्रेसपास एक्ट, 1971 में संशोधन कर जेल की जगह जुर्माने का प्रावधान किया गया है. फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले आवारा मवेशियों के मामलों में अब जेल नहीं होगी, केवल जुर्माना लगाया जाएगा.
बिजली विभाग के निर्देशों का उल्लंघन: बिजली विभाग के निर्देशों का पालन न करने पर अब जेल नहीं होगी. बिजली अधिनियम, 2003 के तहत पहले तीन महीने जेल या जुर्माना था. अब केवल आर्थिक दंड का प्रावधान रहेगा.
कॉस्मेटिक्स निर्माण-बिक्री के नियम उल्लंघन: नियमों के खिलाफ कॉस्मेटिक्स बनाने या बेचने पर अब जेल की सजा नहीं होगी, बल्कि जुर्माना देना होगा. ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत एक साल जेल की सजा को हटाकर सिर्फ जुर्माना रखा गया है.
पहली बार उल्लंघन पर सुधार का मौका: इस बिल की सबसे खास बात यह है कि 'अप्रेंटिस एक्ट' जैसे कानूनों के उल्लंघन पर पहली बार में सजा नहीं मिलेगीय पहली बार गलती होने पर केवल सलाह दी जाएगी, दूसरी बार चेतावनी और उसके बाद भी सुधार न होने पर जुर्माना लगाया जाएगा.
जुर्माना हर 3 साल में बढ़ेगा: जुर्माने की राशि अपराध की गंभीरता के अनुसार तय की जाएगी. साथ ही हर तीन साल में इसमें 10% तक बढ़ोतरी का प्रावधान रखा गया है.
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