JPSC के पूर्व चेयरमैन एल खियांग्ते गिरफ्तार, TDPL विवाद में CID का बड़ा एक्शन, जानिए कौन हैं ये अधिकारी

न्यूज तक डेस्क

10 Aug 2026 (अपडेटेड: Aug 10 2026 3:53 PM)

JPSC former chairman L Khiyangte: JPSC के पूर्व चेयरमैन एल खियांग्ते को झारखंड CID ने गिरफ्तार किया है. उन पर कई आरोपों को लेकर जांच चल रही थी. बता दें कि खियांग्ते झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव रह चुके हैं.

JPSC former chairman L Khiyangte
JPSC former chairman L Khiyangte
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JPSC former chairman L Khiyangte: झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षा विवाद को लेकर अभ्यर्थियों का उग्र प्रदर्शन जारी है. इस बीच राज्य से एक बड़ी खबर सामने आई है. झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के विवादित पूर्व चेयरमैन एल खियांग्ते को CID ने गिरफ्तार कर लिया है. JPSC परीक्षा में हुई कथित धांधली के मामले में यह बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है. खियांग्ते की गिरफ्तारी से ठीक एक दिन पहले रविवार को JPSC के तीन सदस्यों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था. इससे पहले 22 जुलाई 2026 को CID की छापेमारी के बाद खियांग्ते ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया था.

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कौन हैं एल खियांग्ते?

एल खियांग्ते झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव रह चुके हैं. राज्य के मुख्य सचिव पद से रिटायर होने के बाद, पिछले साल फरवरी में उन्हें झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) का चेयरमैन नियुक्त किया गया था. हालांकि, JPSC भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली और विवादों के बीच CID की छापेमारी के बाद उन्होंने 22 जुलाई 2026 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. इस्तीफा देते समय उन्होंने कहा था कि वे चाहते हैं कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो.

CID ने क्यों किया उन्हें गिरफ्तार?

झारखंड में JPSC-JSSC अभ्यर्थियों के विरोध प्रदर्शन और तीन सदस्यों के इस्तीफे के ठीक एक दिन बाद CID ने एल खियांग्ते को गिरफ्तार कर लिया. CID परीक्षाओं में हुई कथित अनियमितताओं और धांधली के मामले की गहराई से जांच कर रही है. सोमवार 3 अगस्त को CID ने खियांग्ते से करीब 7 घंटे तक पूछताछ की थी, जो इस मामले में चौथे दौर की पूछताछ थी. इसके अलावा राज्य भर में 18 जगहों पर छापेमारी भी की गई थी. खियांग्ते की गिरफ्तारी के साथ ही इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या बढ़कर 20 हो गई है.

ब्लैकलिस्टेड कंपनी TDPL को ठेका देने का मुख्य आरोप

एल खियांग्ते पर सबसे बड़ा आरोप यह है कि उन्होंने JPSC की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा आयोजित करने के लिए TSR Data Processing Limited (TDPL) नाम की कंपनी को चुना. यह वही कंपनी है जिसे पहले JSSC द्वारा अनियमितताओं के कारण ब्लैकलिस्ट किया जा चुका था. इसके बावजूद बैकग्राउंड चेक किए बिना या जानबूझकर इस एजेंसी को ठेका दिया गया. इसके अलावा, FRO जैसी पिछली परीक्षाओं में शिकायतें मिलने के बाद भी इस एजेंसी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई.

रिश्वत और कमीशन मांगने के गंभीर दावे

TDPL कंपनी के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी ने दावा किया है कि एल खियांग्ते ने इस एजेंसी को ठेका देने के बदले 2 करोड़ रुपये और सभी भुगतानों पर 20% कमीशन की मांग की थी. हालांकि, यह सिर्फ एक दावा है और इस संबंध में झारखंड CID की तरफ से आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है.

14वीं JPSC PT परीक्षा से कैसे शुरू हुआ विवाद?

यह पूरा विवाद तब भड़का जब JPSC ने 14वीं कंबाइंड सिविल सर्विसेज (प्रीलिम्स) परीक्षा के नतीजे घोषित किए. 103 पदों के लिए 2204 उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया. इसके तुरंत बाद अभ्यर्थियों ने कई सवाल खड़े किए. पहली मांग कैटेगरी-वाइज कट-ऑफ जारी करने की थी, जिसे जारी नहीं किया गया था. दूसरी आपत्ति बिना दस्तखत वाली मेरिट लिस्ट को लेकर थी. सोशल मीडिया पर कथित OMR शीट भी वायरल हुईं, जिसमें कट-ऑफ से कम नंबर वाले छात्रों के चयन का दावा किया गया. बैकलॉग परीक्षा में भी ऐसे ही आरोप सामने आए.

रविवार की बैठक बेनतीजा

बता दें कि रविवार को राज्य सरकार की मंत्रियों की विशेष कमेटी और छात्र प्रतिनिधियों के बीच तीन दौर में लगभग 5 घंटे तक चली मैराथन बैठक पूरी तरह बेनतीजा साबित हुई. इसके बाद अब रविवार को विधानसभा घेराव कर रहे हैं.  पुरानी विधानसभा के पास सभी छात्र एकजुट होकर नई विधानसभा परिसर की ओर शांतिपूर्ण पैदल मार्च कर रहे हैं.

सरकार का दावा: 98 प्रतिशत मांगें मानी गईं

रविवार को हुई उच्चस्तरीय बैठक में सरकार की ओर से मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, दीपिका पांडेय सिंह, संजय प्रसाद यादव और चमरा लिंडा मौजूद थे. सरकार की तरफ से दावा किया गया है कि छात्रों की लगभग 98 प्रतिशत मांगें स्वीकार कर ली गई हैं. इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • 14वीं JPSC पीटी परीक्षा को रद्द करना.
  • ACF परीक्षा को रद्द करना.
  • TDPL एजेंसी द्वारा आयोजित कराई गई परीक्षाओं की जांच कराना.
  • परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार हेतु विशेषज्ञों की एक समिति का गठन करना.

जानें अब क्या हैं छात्रों की मांगे?

सरकार के इन दावों के बावजूद बात पूरी तरह नहीं बन सकी. छात्र प्रतिनिधि JSSC-CGL परीक्षा को पूरी तरह रद्द करने और इस पूरे मामले की CBI जांच कराने की अपनी मांग पर अड़े रहे. वहीं इस पर JMM मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का कहना है कि CGL परीक्षा का आयोजन हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हुआ था. इस वजह से राज्य सरकार के पास CGL परीक्षा को रद्द करने या सीधे CBI से जांच कराने का कानूनी अधिकार नहीं है. इसी मुख्य बिंदु पर सहमति न बनने के कारण वार्ता टूट गई और छात्रों ने सड़कों पर उतरने का रास्ता चुना.