झारखंड की राजधानी रांची स्थित जयपाल सिंह स्टेडियम में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों का आंदोलन पिछले 11 दिनों से लगातार जारी है. राज्य में लगातार हो रहे पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने और भर्तियों में अनियमितताओं से परेशान अभ्यर्थी अब सड़कों पर उतर आए हैं. जेपीएससी, जेएसएससी सीजीएल और सचिवालय आशुलिपिक भर्ती जैसी कई परीक्षाओं के अभ्यर्थी अपने हाथों में पोस्टर-बैनर लेकर निष्पक्ष जांच और सुधार की मांग कर रहे हैं. दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए हालिया छात्र आंदोलनों से प्रेरणा लेते हुए ये छात्र भी अपनी मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहे हैं.
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2010 के मारवाड़ी कॉलेज टॉपर सोहन महतो का छलका दर्द
आंदोलन में शामिल अभ्यर्थियों के बीच कई ऐसी कहानियां सामने आ रही हैं जो राज्य में युवाओं की स्थिति को बयान करती हैं. मारवाड़ी कॉलेज से वर्ष 2010 के टॉपर रहे सोहन महतो भी इस प्रदर्शन का हिस्सा हैं. सोहन महतो साल 2015 से लगातार जेएसएससी सीजीएल और जेपीएससी जैसी विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं. अब उनकी उम्र 35 वर्ष हो चुकी है और कई परीक्षाओं के लिए उनकी आयु सीमा भी समाप्त हो गई है.
सोहन अपने एडमिट कार्ड और समाचार पत्रों की कटिंग दिखाते हुए बताते हैं कि इतने सालों की पढ़ाई और मेहनत के बावजूद हर बार परीक्षा में धांधली और पेपर लीक की खबरें सामने आती हैं. उम्र बीत जाने के कारण उन्हें घर-परिवार और समाज का दबाव झेलना पड़ रहा है, जहां न तो रोजगार मिल पा रहा है और न ही शादी हो पा रही है.
पलामू की भारती कुमारी और आशुलिपिक भर्ती का अटका भविष्य
इसी आंदोलन में पलामू जिले से पहुंचीं अभ्यर्थी भारती कुमारी ने सचिवालय आशुलिपिक (स्टेनोग्राफर) भर्ती प्रक्रिया की सच्चाई सामने रखी. भारती साल 2016 से आशुलिपिक सीख रही हैं. वर्ष 2022 में सचिवालय आशुलिपिक के 455 पदों के लिए विज्ञापन निकला था, जिसके लिए लगभग डेढ़ लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किए थे. दिसंबर 2022 में परीक्षा आयोजित होने के बाद नियोजन नीति के कारण इसे रद्द कर दिया गया.
वर्ष 2024 में पुनः इस भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया, लेकिन जून 2026 में पत्र संख्या 4124 का हवाला देते हुए पूरे विज्ञापन को ही बिना स्पष्ट कारण के रद्द कर दिया गया. अभ्यर्थी विधायकों, मंत्रियों, मुख्यमंत्री और राज्यपाल तक गुहार लगा चुके हैं, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन ही मिला है.
पारदर्शिता, निष्पक्ष जांच और अनिश्चितकालीन आंदोलन का ऐलान
आंदोलनकारी छात्रों की मुख्य मांग है कि पिछले 5-6 वर्षों में जिन भी परीक्षाओं (जैसे जेपीएससी और जेएसएससी सीजीएल) में धांधली या पेपर लीक के आरोप लगे हैं, उनकी निष्पक्ष जांच की जाए और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाए.
छात्रों का कहना है कि वे किसी एक नेता या चेहरे के भरोसे नहीं, बल्कि अपनी एकजुटता के बल पर महात्मा गांधी के बताए शांतिपूर्ण रास्ते पर चलकर संघर्ष कर रहे हैं. अभ्यर्थियों का साफ तौर पर कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों को पूरा नहीं करती और पारदर्शी परीक्षाएं कराने की गारंटी नहीं देती, तब तक यह आंदोलन अनिश्चितकाल के लिए जारी रहेगा.
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