कौन हैं काकोली घोष, जिनके इस्तीफे से शुरू हुई ममता की पार्टी TMC की किरकिरी? जानिए 4 बार के सांसद की पूरी कहानी

TMC MP Kakoli Ghosh: पश्चिम बंगाल की वरिष्ठ TMC नेता और 4 बार की सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने बारासात जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर ममता बनर्जी की पार्टी में हलचल बढ़ा दी है. जानिए कौन हैं काकोली घोष, क्यों उन्होंने पार्टी के कामकाज और चुनावी रणनीति पर सवाल उठाए, और कैसे उनके इस्तीफे से TMC की किरकिरी हो रही है.

Kakoli Ghosh Dastidar
काकोली घोष ने बारासात जिलाध्यक्ष के पद से दिया इस्तीफा(तस्वीर- X/@kakoligdastidar)

अनुपम मिश्रा

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पश्चिम बंगाल में जब से टीएमसी की सरकार हटी और भाजपा की सरकार बनी है, तब से ही राज्य में उथल-पुथल जारी है. इसी बीच TMC और ममता बनर्जी को एक बड़ा झटका लगा है. ममता बनर्जी के टीम की पुरानी और करीबी साथी काकोली घोष दस्तीदार ने बारासात जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफे की घोषणा की है. उन्होंने इसके पीछे की वजह चुनावी हार और पार्टी के कामकाज के तरीके को बताते हुए कई गंभीर सवाल भी उठाए है. काकोली के इस ऐलान के बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है. आइए विस्तार से जानते हैं कौन हैं काकोली घोष और उन्होंने क्यों छोड़ दिया ममता का साथ.

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काकोली घोष ने इस्तीफे में क्या लिखा?

TMC सांसद काकोली घोष ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी को अपना इस्तीफा भेजा है. इस इस्तीफे में उन्होंने साफ-साफ लिखा कि, इस विधानसभा चुनाव में पार्टी ने जिले (बारासात) में अच्छा प्रदर्शन नहीं किया और इसके जिम्मेदारी मैं लेती हूं. इसलिए मैं पार्टी के जिलाध्यक्ष पद से इस्तीफा देती हूं.

काकोली घोष ने आगे यह भी लिखा कि, ममता बनर्जी से अनुरोध है कि अगर आप पहले की तरह ईमानदार, समर्पित और पुराने कार्यकर्ताओं को साथ लेकर काम करेंगे तो पार्टी की छवि और भी मजबूत होगी. उन्होंने बिना IPAC का नाम लिए निशाने साधते हुए कहा कि, 'मुझे नहीं लगता कि अचानक उभरे संगठनों के जरिए कठिन राजनीतिक लड़ाइयां लड़ी जा सकती हैं.' काकोली घोष ने यह भी कहा है कि, जिस तरह छोटे बच्चों में चुनाव में हम पर दबाव डालने की कोशिश की थी, वह काम करने का सही तरीका नहीं था.

TMC ने चीफ व्हिप के पद से हटाया

इससे कुछ दिन पहले ही TMC ने काकोली घोष को लेकर बड़ा फेर-बदल किया है. काकोली को पार्टी ने चीफ व्हिफ के पद से हटाया दिया था और यह पद कल्याण बनर्जी को सौंप दी थी. वहीं इसके बाद केंद्र सरकार ने उनकी सुरक्षा बढ़ाते हुए Y कैटेगरी की सुरक्षा दी थी.

बढ़ गई राजनीतिक हलचल

काकोली घोष का यह ऐलान उस वक्त में आया है, जब पहले से ही TMC में आंतरिक कलह की बातें सामने आ रही थी. पश्चिम बंगाल में चुनाव हारने के बाद TMC में ऐसे ही कई उठा-पटक हो रहे है, आरोप-प्रत्यारोप लग रहे और ऐसे में पार्टी के पुराने सिपाही का ऐसा ऐलान अब साफ तौर पर आंतरिक कलह को दिखा रहा है.

कौन हैं काकोली घोष?

काकोली घोष के ऐलान के बाद लोगों के मन में सवाल उठने लगा है कि आखिर कौन हैं काकोली घोष? तो 66 साल की काकोली घोष दस्तीदार पश्चिम बंगाल की बारासात लोकसभा सीट से 4 बार की सांसद रही है. पार्टी ने साल 2009 में पहली बार उनको टिकट दिया था और वह जीत गई थी. फिर 2014,2019 और 2024 में भी काकोली घोष ने TMC से चुनाव लड़ा और लगातार जीतती गई. साथ ही वह TMC की महिला विंग की राष्ट्रीय अध्यक्ष भी है.

बारासात में ही बीता बचपन

काकोली घोष पश्चिम बंगला के उत्तर 24 परगना के बारासात की रहने वाली हैं. उनका बचपन बारासात जिले के डिगबेरिया में ही बीता है. इनके पति सुदर्शन घोष दस्तीदार भी एक प्रतिष्ठित डॉक्टर है और साथ ही पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री भी रहे है.

पेशे से डॉक्टर हैं काकोली घोष

काकोली घोष एक काफी पढ़ी-लिखी नेता है. उन्होंने कलकत्ता के प्रसिद्ध मेडिकल कॉलेज आरजी कर से पढ़ाई की है. यहां से MBBS करने के बाद काकोली घोष लंदन चली गई और वहां के प्रतिष्ठित किंग्स कॉलेज से पढ़ाई की. आरजी मेडिकल कॉलेज में रेप कांड केस में एक बयान को लेकर भी काकोली काफी चर्चा में रही. उन्होंने कहा था कि, जब मैं स्टूडेंट थी तब छात्राएं शिक्षकों की गोद में बैठकर पासिंग मार्क्स प्राप्त करती थी. उनके इस बयान के बाद काफी बवाल हुआ था, हालांकि बाद में उन्होंने माफी मांग ली थी.

 

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