Shesh Bharat: तमिलनाडु की राजनीति में आए बड़े बदलाव का असर अब संसद तक पहुंच गया है. विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद जहां अभिनेता Vijay की पार्टी TVK तेजी से सत्ता के करीब पहुंची, वहीं कांग्रेस के फैसले ने डीएमके और कांग्रेस के लंबे गठबंधन को झटका दे दिया. अब डीएमके सांसदों ने लोकसभा में कांग्रेस से अलग बैठने की मांग कर दी है. दरअसल, कांग्रेस ने तमिलनाडु में डीएमके से अपना गठबंधन तोड़ते हुए विजय की पार्टी TVK को सरकार बनाने के लिए समर्थन दे दिया.
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डीएमके सांसद और पार्टी नेता Kanimozhi ने लोकसभा स्पीकर Om Birla को पत्र लिखकर मांग की है कि डीएमके सांसदों के लिए सदन में अलग बैठने की व्यवस्था की जाए. उनका कहना है कि बदले हुए राजनीतिक हालातों में कांग्रेस के साथ बैठना अब उचित नहीं है.
सदन में अलग बैठने की मांग
डीएमके की वरिष्ठ नेता और सांसद कनिमोझी ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर कहा है कि बदले हुए राजनीतिक हालातों में अब कांग्रेस के साथ बैठना उचित नहीं है. कनिमोझी ने मांग की है कि डीएमके के 22 सांसदों के लिए सदन में बैठने की अलग व्यवस्था (Separate Seating) की जाए. वर्तमान में विपक्ष की पहली पंक्ति में राहुल गांधी के साथ कनिमोझी की सीट आवंटित है, जिसे अब वे बदलना चाहती हैं.
कई दशक पुराना रिश्ता टूटा!
डीएमके और कांग्रेस का रिश्ता नया नहीं, बल्कि कई दशक पुराना है. 1967 में डीएमके ने कांग्रेस को तमिलनाडु की सत्ता से बाहर किया था, लेकिन 1971 में Indira Gandhi के साथ गठबंधन कर दोनों दल करीब आए. समय-समय पर यह रिश्ता टूटता और जुड़ता रहा.
2004 में यूपीए सरकार बनने के बाद दोनों दलों का गठबंधन सबसे मजबूत दौर में पहुंचा. हालांकि 2जी स्पेक्ट्रम मामले और श्रीलंका में तमिलों के मुद्दे पर तनाव भी देखने को मिला. 2013 में डीएमके ने गठबंधन तोड़ दिया था, लेकिन 2019 में स्टालिन द्वारा राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में समर्थन देने के बाद दोनों फिर करीब आए.
बड़े भाई से ब्रेकअप!
Rahul Gandhi और M. K. Stalin के बीच राजनीतिक रिश्ते को अक्सर ‘भाईचारा’ कहा गया. भारत जोड़ो यात्रा की शुरुआत कन्याकुमारी से हुई, जहां स्टालिन खुद पहुंचे थे. राहुल गांधी कई बार सार्वजनिक मंचों से कह चुके हैं कि वह किसी दूसरे नेता को भाई नहीं कहते, लेकिन स्टालिन उनके बड़े भाई जैसे हैं.
चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी का वह वीडियो भी खूब वायरल हुआ था, जिसमें वह स्टालिन के लिए मैसूर पाक खरीदते नजर आए थे. इससे दोनों नेताओं की निजी नजदीकी भी सामने आई थी.
INDIA गठबंधन पर संकट?
डीएमके और कांग्रेस के बीच करीब 20 साल पुराना यह गठबंधन टूटना राष्ट्रीय राजनीति के लिए बड़े संकेत दे रहा है. सवाल उठ रहे हैं कि क्या डीएमके अब 'INDIA' गठबंधन से भी किनारा कर लेगी? संसद में सीटों के नए अरेंजमेंट की मांग इस 'भाईचारे' के अंत का औपचारिक ऐलान माना जा रहा है. अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या स्पीकर डीएमके सांसदों को विपक्ष के किसी अलग ब्लॉक में बिठाते हैं या सदन का नजारा कुछ और ही होगा.
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