Shesh Bharat: कौन हैं कृपा अल्वा? जिन पर लगे सिद्धारमैया को फंसाने के गंभीर आरोप और कांग्रेस ने किया 6 साल के लिए निष्कासित!

रूपक प्रियदर्शी

• 09:30 AM • 03 Nov 2026

कर्नाटक की राजनीति में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को फंसाने के लिए रचे गए कथित फर्जी स्टिंग और हनीट्रैप मामले की जांच के तार केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी के दिल्ली स्थित घर तक पहुंच गए हैं.

कृपा अल्वा
कृपा अल्वा
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कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार सिद्धारमैया चलाएंगे या डीके शिवकुमार सीएम बनेंगे, ये कांग्रेस के अंदर का मामला था. अंदर के इस मामले में जैसे ही जेडीएस नेता और केंद्रीय मंत्री एच डी कुमारस्वामी भूचाल मच गया. सिद्धारमैया के बहाने डीके शिवकुमार को फंसाने चले कुमारस्वामी पर दांव उल्टा पड़ गया. कर्नाटक की पुलिस अब कुमारस्वामी के घर तक पहुंच गई है. अगले 24-48 घंटे में या कभी भी कुमारस्वामी के साथ क्या होगा, फिलहाल इसकी कोई भविष्यवाणी नहीं की जा सकती. ये सब तब हुआ है जब हाल में जब सीएम डीके शिवकुमार ने आरोप लगाया था एक कथित उद्योगपति ने मेटा स्मार्ट ग्लास पहनकर उनका स्टिंग ऑपरेशन करने की कोशिश की थी.

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कर्नाटक की राजनीति से आजकल फिर स्टिंग ऑपरेशन की चर्चा है. कथित स्टिंग ऑपरेशन को जोड़ा जा रहा है कर्नाटक के सीएम रहे सिद्धारमैया से. स्टिंग ऑपरेशन का इस्तेमाल करके सिद्धारमैया से सीएम की कुर्सी छिनने का आरोप लगा डीके शिवकुमार पर और कथित स्टिंग ऑपरेशन का पुराना गड़ा मुर्दा उखाड़ा एच डी कुमारस्वामी ने. राजनीति और पुलिस की जांच ऐसी पलटी कि कुमारस्वामी फंस रहे हैं एक मोबाइल फोन के चक्कर में. आरोप है कि उस मोबाइल फोन का कथित इस्तेमाल कथित स्टिंग ऑपरेशन में सिद्धारमैया को फंसाने के लिए किया गया.  

ब्लैकमेलिंग और हनीट्रैप की साजिश

स्टिंग ऑपरेशन के बारे में दावा है कि सिद्धारमैया को निशाना बनाकर ब्लैकमेलिंग और हनीट्रैप की साजिश रची गई थी. मामला सितंबर-अक्टूबर में तब गरमाया जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें साल 2011 के एक कथित यौन शोषण मामले का जिक्र कर सिद्धारमैया की छवि धूमिल करने की कोशिश की गई थी. सिद्धारमैया ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. कोर्ट गए.  सिद्धरमैया ने ब्लैकमेलिंग और छवि खराब करने की शिकायत दर्ज कराते हुए कृपा अल्वा और राकेश शेट्टी का नाम साजिशकर्ताओं के रूप में लिया. सिद्धरमैया के बेटे यतींद्र ने आरोप लगाया कि पार्टी के ही अंदरूनी लोग इस ब्लैकमेलिंग की साजिश का हिस्सा थे. 

2023 में हिडन कैमरा से एक वीडियो रिकॉर्ड किया गया था. इस वीडियो में कोई यौन शोषण जैसी चीज नहीं दिखाई गई. वीडियो में सिर्फ कांग्रेस नेता कृपा अल्वा और एक टीवी चैनल के मालिक राकेश शेट्टी एक कमरे में बैठकर बातचीत करते हुए दिखाई दे रहे थे.
बातचीत के दौरान कृपा अल्वा कर्नाटक के पुत्तूर इलाके से चुनाव लड़ने के लिए कांग्रेस पार्टी का टिकट पाने के सिलसिले में राकेश शेट्टी से मदद मांग रही थीं. 

दावा है कि पूरी बातचीत में सिद्धरमैया पर यौन शोषण का कोई सीधा आरोप या ज़िक्र नहीं था. साज़िशकर्ताओं ने टिकट वाली बातचीत के वीडियो क्लिप के साथ एक दूसरी अज्ञात महिला का बयान जोड़ दिया गया, जो कैमरे के सामने सिद्धरमैया पर 2011 में यौन शोषण करने के झूठे आरोप लगा रही थी. जब इस पूरे पैकेज को सोशल मीडिया पर लीक किया गया, टिकट की पैरवी वाली इस संदिग्ध बातचीत को एक बड़े 'सेक्स स्कैंडल' के रूप में प्रोजेक्ट कर दिया गया.

उन्हें नहीं पता था कि स्टिंग किया जा रहा है

कृपा अल्वा का नाम इस वीडियो में साक्षात चेहरा दिखने और उनकी खुद की आवाज होने की वजह से आया. पुलिस पूछताछ में कृपा अल्वा ने माना कि वे वीडियो में हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता था कि स्टिंग किया जा रहा है. कांग्रेस ने नकारात्मक पब्लिसिटी और दल-विरोधी गतिविधियों में शामिल होने तथा कारण बताओ नोटिस का जवाब न देने के कारण कृपा अल्वा को 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है.

करीब 60 साल की कृपा अल्वा मंगलुरु की हैं.  1992 में उनके पति अमर अल्वा की हत्या हुई थी. उन्होंने अमर अल्वा चैरिटेबल ट्रस्ट के जरिए समाज सेवा में कदम रखा. कांग्रेस में शामिल होकर राजनीति में आईं.कर्नाटक यूनिट में उन्हें महासचिव जैसे पद मिले. सीएम सिद्धारमैया के करीबी नेताओं में गिनती होने लगी. 2015 में सिद्धारमैया सरकार में ही कृपा अल्वा को कर्नाटक स्टेट कर्मशिन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स का चेयरपर्सन बनाया गया.

बेंगलुरु पुलिस की केंद्रीय अपराध शाखा (CCB) ने इस पूरे मामले को "पूरी तरह से मनगढ़ंत, फर्जी और ड्रामा" करार दिया है.
जिस महिला के जरिए सिद्धरमैया पर आरोप लगवाए गए थे, उसने पुलिस के सामने कबूल किया कि वह सिद्धरमैया से कभी मिली ही नहीं है और उसे कुछ लोगों ने ऐसा बोलने के लिए उकसाया था. राकेश शेट्टी ने भी स्वीकार किया कि उन्होंने 2023 में यह स्टिंग रिकॉर्ड किया था, लेकिन जब उन्हें पता चला कि सिद्धारमैया पर लगे आरोप 100% झूठे हैं, तो उन्होंने इसे छोड़ दिया था。 बाद में किसी और ने इसे लीक किया.

पुलिस जांच में इस मामले का एक और बड़ा मोड़ तब आया जब इस फर्जी वीडियो को इंटरनेट पर अपलोड करने के तार केंद्रीय मंत्री और जेडीएस (JDS) नेता एच. डी. कुमारस्वामी के दिल्ली वाले सरकारी घर से जुड़ गए. पूरी साजिश में आरोप तो लगे लेकिन  कृपा आल्वा या राकेश शेट्टी की गिरफ्तारी नहीं हुई. गिरफ्तारी हुई रितेश पांडे नाम के व्यक्ति की. उसी से कुमारस्वामी का नाम जुड़ गया.  बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर ने दावा किया दिल्ली से गिरफ्तार रितेश पांडे ने पूछताछ में खुलासा किया कि सिद्धारमैया को निशाना बनाने वाले फर्जी स्टिंग वीडियो को इंटरनेट पर अपलोड करने के लिए इस्तेमाल किया गया मोबाइल फोन दिल्ली के करोल बाग से खरीदा गया था. इस फोन को कुमारस्वामी की सोशल मीडिया टीम के सदस्य प्रज्वल प्रसाद के कहने पर खरीदा गया और बाद में दिल्ली के कुशक रोड स्थित कुमारस्वामी के सरकारी घर पर ही प्रज्वल को सौंपा गया था. 

पहले भी लग चुके हैं आरोप 

कुमारस्वामी पहले ये राजनीतिक आरोप लगा चुके हैं कि इस स्टिंग वीडियो का इस्तेमाल सिद्धरमैया को ब्लैकमेल करने के लिए डीके शिवकुमार ने किया था. हालांकि पुलिस के इस नए खुलासे के बाद कुमारस्वामी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए राज्य सरकार और पुलिस कमिश्नर को खुली चुनौती दी है कि वे निर्दोष हैं और राजनीतिक साजिश के तहत उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं को फंसाया जा रहा है.

सीएम डी.के. शिवकुमार ने पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के खिलाफ इस स्टिंग को कांग्रेस को अस्थिर करने की एक बड़ी बाहरी साजिश बताया है. उन्होंने चौंकाने वाला दावा किया कि हाल ही में एक कथित उद्योगपति ने कैमरे वाले मेटा स्मार्ट ग्लास पहनकर खुद उनका भी स्टिंग ऑपरेशन करने की कोशिश की थी, लेकिन उनकी सतर्कता के कारण वह नाकाम रहा. शिवकुमार ने अपने मंत्रियों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है और कहा है कि समय आने पर वे सभी सबूतों के साथ इस साजिश को बेनकाब करेंगे. 

उन्होंने इस बात का भी खंडन किया है कि कांग्रेस सरकार राजनीतिक बदले की भावना से जेडीएस नेताओं को निशाना बना रही है. बीजेपी और उसकी सहयोगी पार्टी जेडीएस इस पूरे मामले को कांग्रेस का अंदरूनी पावर स्ट्रगल  बता रही है. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार खुद इस मामले की निष्पक्ष जांच में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं क्योंकि सच सामने आने पर कांग्रेस के कई बड़े चेहरे बेनकाब हो जाएंगे.

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