कौन हैं एल. मुरुगन, जिन्होंने केंद्रीय मंत्री पद और राज्यसभा सदस्यता छोड़ने की इच्छा जताई? PM मोदी को पत्र लिखकर बताई पूरी बात

हिमांशु मिश्रा

13 Oct 2026 (अपडेटेड: Oct 13 2026 6:57 PM)

L. Murugan News: केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री एल. मुरुगन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मंत्री पद और राज्यसभा सदस्यता छोड़ने की इच्छा जताई है. वह 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले तमिलनाडु में BJP संगठन को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर काम करने पर ध्यान देना चाहते हैं. जानिए कौन हैं एल. मुरुगन, उनका राजनीतिक सफर और इस फैसले की वजह.

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केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन ने मंत्री पद और राज्यसभा सदस्यता से दिया इस्तीफा(तस्वीर- फेसबुक//MuruganTNBJP)
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मोदी कैबिनेट में फेरबदल की चर्चा के बीच एक बड़ी जानकारी सामने आई है. केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री एल. मुरुगन ने अपने पद से इस्तीफा देने और राज्यसभा की सदस्यता छोड़ने की इच्छा जताई है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इसकी वजह भी बताई है. मुरुगन अब अपना पूरा समय तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के संगठन को मजबूत करने और 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारी में लगाना चाहते हैं. उनका कहना है कि वह पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच रहकर जमीनी स्तर पर काम करना चाहते हैं.

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मंत्रिपरिषद में फेरबदल की अटकलों के बीच मुरुगन का यह कदम चर्चा में है. प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में उन्होंने केंद्र सरकार में पांच साल तक काम करने को अपने जीवन का सबसे बड़ा सम्मान बताया. साथ ही कहा कि अब वह उस काम पर लौटना चाहते हैं, जिसने उन्हें सार्वजनिक जीवन में आने के लिए प्रेरित किया था.

कौन हैं एल. मुरुगन?

एल. मुरुगन का राजनीतिक सफर एक साधारण परिवार से शुरू हुआ. उन्होंने अपने पत्र में बताया कि वह किसी राजनीतिक परिवार से ताल्लुक नहीं रखते. उनके माता-पिता दिहाड़ी मजदूरी करते थे और मवेशी भी चराते थे. उनका परिवार आज भी तमिलनाडु के कोनूर गांव में साधारण जीवन जी रहा है.

मुरुगन के मुताबिक, उनके माता-पिता ने कभी नहीं सोचा था कि उनका बेटा एक दिन केंद्र सरकार में मंत्री बनेगा. उन्होंने अपनी इस यात्रा का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और BJP की उस परंपरा को दिया, जिसमें जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने का अवसर मिलता है. कॉलेज के दिनों में मुरुगन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े थे. इसके बाद उन्होंने करीब तीन दशक तक ABVP और BJP में काम किया. उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन का मूल सिद्धांत बताते हुए कहा कि उनके लिए राष्ट्र पहले, पार्टी दूसरे और खुद सबसे आखिर में है.

दो बार राज्यसभा के सदस्य रहे एल. मुरुगन

एल. मुरुगन राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के उपाध्यक्ष के रूप में भी काम कर चुके हैं. वह दो बार राज्यसभा के सदस्य बने और पिछले पांच वर्षों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंत्रिपरिषद का हिस्सा रहे हैं. केंद्र सरकार में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने सूचना एवं प्रसारण, संसदीय कार्य, मत्स्य पालन और पशुपालन से जुड़े मंत्रालयों में जिम्मेदारियां संभालीं. प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में उन्होंने इस दौरान मिले अवसरों और भरोसे के लिए आभार भी जताया.

PM मोदी को चिट्ठी लिखकर क्या कहा?

मुरुगन ने अपने पत्र में तमिलनाडु के विकास के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से किए गए प्रयासों का जिक्र किया. उन्होंने चेन्नई मेट्रो, तूतीकोरिन बंदरगाह के विस्तार, राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास और अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत 26 रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि तमिलनाडु से जुड़े मुद्दों, संघर्ष वाले क्षेत्रों में फंसे भारतीयों की सुरक्षा और भारतीय मछुआरों के कल्याण से संबंधित मामलों में प्रधानमंत्री ने हमेशा मदद की है.

मुरुगन ने पत्र में यह भी स्पष्ट किया कि अब वह तमिलनाडु में पार्टी संगठन को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहते हैं. उनके मुताबिक, जमीनी स्तर पर काम करने और कार्यकर्ताओं के साथ रहने का यह सही समय है.

गांव-गांव जाकर BJP को मजबूत करने की तैयारी

एल. मुरुगन ने अपने पत्र में बताया कि वह तमिलनाडु के हर गांव और हर गली तक पहुंचना चाहते हैं. उनका लक्ष्य लोगों से मिलना, पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ खड़े रहना और राज्य के अलग-अलग हिस्सों में BJP की मौजूदगी बढ़ाना है. उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री के 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास' के संदेश को लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं, ताकि हर परिवार विकसित भारत की यात्रा में अपनी भागीदारी महसूस कर सके. मुरुगन ने 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारी में पूरी ताकत लगाने की बात कही है. वह तमिलनाडु से BJP को अधिक सीटें दिलाने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पार्टी को एक और कार्यकाल दिलाने में योगदान देना चाहते हैं.

पत्र के अंत में मुरुगन ने कहा कि प्रधानमंत्री ने एक दिहाड़ी मजदूर के बेटे पर जो भरोसा जताया, वह उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान है. अब वह जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच लगातार काम करके उस भरोसे का मान रखना चाहते हैं. हालांकि, मुरुगन की ओर से मंत्री पद से मुक्त करने और राज्यसभा की सदस्यता छोड़ने की अनुमति मांगने का यह मतलब नहीं है कि उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है.