मिडिल ईस्ट में जारी भीषण तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आ रही है. ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जारी युद्ध के कारण दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग 'होरमुज की खाड़ी' (Strait of Hormuz) लगभग ठप पड़ा है. इस तनावपूर्ण माहौल में यूएई के शारजाह तट के पास लंगर डाले खड़े दो भारतीय एलपीजी (LPG) टैंकर शनिवार को आगे बढ़ने की तैयारी में हैं.
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क्या है पूरा विवाद और क्यों रुका है रास्ता?
होरमुज की खाड़ी दुनिया के कुल तेल और गैस व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा संभालती है. ईरान ने हाल ही में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमलों के बाद धमकी दी थी कि इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाया जाएगा. इस चेतावनी के बाद पिछले 24 घंटों से बड़े मालवाहक जहाजों की आवाजाही थम गई है.
संकट में फंसे भारत के 22 जहाज
मौजूदा स्थिति यह है कि भारत के करीब 22 जहाज खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए हैं. इनमें दो प्रमुख एलपीजी टैंकर 'पाइन गैस' (इंडियन ऑयल द्वारा किराये पर) और 'जग वसंत' (बीपीसीएल द्वारा किराये पर) शामिल हैं. इन जहाजों में भारतीय घरों के लिए रसोई गैस भरी है. अगर ये जहाज समय पर नहीं पहुंचते, तो देश में एलपीजी की किल्लत और कीमतों में बढ़ोतरी का खतरा पैदा हो सकता है.
पीएम मोदी की कूटनीति और ईरान का रुख
भारत सरकार इस संकट को सुलझाने के लिए सक्रिय है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद वैश्विक नेताओं और ईरानी प्रशासन के संपर्क में हैं ताकि भारतीय जहाजों को सुरक्षित गलियारा मिल सके. कूटनीतिक हलकों में चर्चा है कि ईरान ने पिछले हफ्ते भी दो भारतीय जहाजों को निकलने की अनुमति दी थी.
दिलचस्प बात यह है कि हाल ही में पाकिस्तान जाने वाले एक तेल टैंकर को भी इस रास्ते से गुजरने दिया गया. विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान पूरी तरह रास्ता बंद करने के बजाय चुनिंदा देशों को रियायत देकर कूटनीतिक दबाव बना रहा है. भारत की कोशिश है कि तटस्थ रहते हुए अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित किया जाए.
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