मिडिल ईस्ट में जारी जंग फिलहाल थमने वाली नहीं है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ युद्ध रोकने के लिए सहयोगी देशों की बातचीत की कोशिशों को खारिज कर दिया है. वहीं, ईरान ने भी साफ कह दिया है कि जब तक हमले बंद नहीं होते, वह किसी समझौते के लिए तैयार नहीं है. इस खींचतान के बीच कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं और दुनिया भर में आर्थिक संकट का खतरा मंडरा रहा है.
ADVERTISEMENT
ट्रंप प्रशासन का सख्त रुख
न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, ओमान और मिस्र जैसे देशों ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की कोशिश की थी, ताकि दो हफ्ते से जारी भारी बमबारी को रोका जा सके. लेकिन व्हाइट हाउस ने स्पष्ट कर दिया है कि ट्रंप अभी बातचीत के मूड में नहीं हैं. उनका पूरा ध्यान 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के जरिए ईरान की सैन्य ताकत और उसके मिसाइल प्रोग्राम को पूरी तरह ध्वस्त करने पर है. ट्रंप ने सोशल मीडिया पर यहाँ तक कह दिया कि अब बातचीत के लिए बहुत देर हो चुकी है.
ईरान की कड़ी चेतावनी
दूसरी तरफ, ईरान के नए सर्वोच्च नेता ने भी तेवर कड़े कर लिए हैं. ईरान का कहना है कि वे तब तक मेज पर नहीं आएंगे जब तक अमेरिका और इजरायल अपने हमले पूरी तरह बंद नहीं करते और हुए नुकसान का मुआवजा नहीं देते. ईरान ने धमकी दी है कि वह 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (समुद्री व्यापार मार्ग) को बंद रखेगा. अगर ऐसा होता है, तो दुनिया भर में तेल की सप्लाई ठप हो सकती है, क्योंकि वैश्विक तेल का पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है.
खार्ग द्वीप पर हमले से बढ़ा तनाव
शुक्रवार रात अमेरिका ने ईरान के सबसे बड़े तेल निर्यात केंद्र 'खार्ग द्वीप' पर हवाई हमले किए. इस हमले ने साफ कर दिया कि अमेरिका पीछे हटने वाला नहीं है. जंग की वजह से अब तक 2000 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें बड़ी संख्या आम नागरिकों की है.
अमेरिका के भीतर भी मतभेद
हालांकि ट्रंप युद्ध जारी रखने पर अड़े हैं, लेकिन उनके प्रशासन के कुछ सलाहकार चिंतित हैं. तेल की बढ़ती कीमतों के कारण अमेरिका में पेट्रोल महंगा हो रहा है, जिसका असर आने वाले चुनावों पर पड़ सकता है. वहीं, कुछ अधिकारी चाहते हैं कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने का यह आखिरी और सबसे अच्छा मौका है, इसलिए सैन्य कार्रवाई जारी रहनी चाहिए. फिलहाल, कूटनीति के सारे दरवाजे बंद नजर आ रहे हैं और दोनों पक्ष लंबी लड़ाई की तैयारी में हैं.
ADVERTISEMENT


