हैदराबाद स्थित नालसार (NALSAR) लॉ यूनिवर्सिटी के छात्रों से जुड़ा विवाद अब एक नया मोड़ ले चुका है. बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा यूनिवर्सिटी के छात्रों के खिलाफ जारी किए गए कड़े आदेश को आखिरकार वापस ले लिया गया है. BCI के चेयरमैन और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्यसभा सांसद मनन कुमार मिश्रा पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का चौतरफा दबाव और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की कड़ी फटकार के बाद BCI को अपना फैसला वापस लेना पड़ा.
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क्या है पूरा नालसार लॉ यूनिवर्सिटी विवाद?
पूरा मामला हैदराबाद की नालसार लॉ यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह से शुरू हुआ. यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट ने समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सीजेआई सूर्यकांत को आमंत्रित किया था. हालांकि, यूनिवर्सिटी के करीब 450 छात्रों ने इस फैसले का खुलकर विरोध किया और सीजेआई के हाथों कानून की डिग्री लेने से इनकार कर दिया. छात्रों का कहना था कि सीजेआई सूर्यकांत ने पूर्व में युवाओं को लेकर सख्त टिप्पणियां की थीं और हालिया याचिकाओं पर रुख से वे असहमत थे.
BCI का विवादित आदेश और CJP की मोर्चेबंदी
छात्रों के इस विरोध के बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने एक कड़ा और विवादित आदेश जारी किया. BCI के आदेश में कहा गया कि नालसार लॉ यूनिवर्सिटी से इस साल पास आउट होने वाले किसी भी छात्र को अगले आदेश तक एडवोकेट के रूप में एनरोल नहीं किया जाएगा.
इस फैसले के सामने आते ही विवाद भड़क गया. कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके और सीजेपी नेता सौरव दास ने इस फैसले को अवैध और दमनकारी बताते हुए BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा से तुरंत इस्तीफे की मांग की. CJP नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि BCI इस नोटिफिकेशन को तुरंत वापस नहीं लेता है, तो BCI दफ्तर और मनन मिश्रा के आवास के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया जाएगा.
CJI सूर्यकांत ने BCI को लगाई कड़ी फटकार
इस पूरे घटनाक्रम पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सख्त रुख अपनाया और BCI तथा चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा को कड़ी फटकार लगाई. सीजेआई ने स्पष्ट किया कि छात्रों को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने और अपनी राय रखने का मौलिक अधिकार है. CJI सूर्यकांत ने कहा कि अगर छात्र उनका विरोध कर रहे हैं तो यह मामला उनके और छात्रों के बीच का है, इसमें BCI को हस्तक्षेप करने या छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने की कोई आवश्यकता नहीं थी. इसके साथ ही सीजेआई ने नालसार के पास आउट छात्रों को सुप्रीम कोर्ट बार में शामिल होने और लाइसेंस लेकर वकालत शुरू करने का न्योता भी दिया.
चौतरफा दबाव के बाद BCI का यू-टर्न और मनन मिश्रा की सफाई
चौतरफा घिरने और CJI की फटकार के बाद BCI ने आपात बैठक बुलाई और छात्रों के एनरोलमेंट पर रोक लगाने वाले आदेश को तुरंत प्रभाव से वापस ले लिया. सफाई देते हुए BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि काउंसिल का मकसद छात्रों का नुकसान करना नहीं था. उन्होंने कहा कि छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला वापस लिया गया है और किसी भी छात्र के खिलाफ कोई जांच या अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी. मनन मिश्रा ने यह भी कहा कि वह CJP नेताओं से बातचीत करने और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
विवाद सुलझने के बाद भी इस्तीफे पर अड़ी CJP
भले ही BCI ने अपने कदम पीछे खींच लिए हों और आदेश वापस ले लिया हो, लेकिन कॉकरोच जनता पार्टी का हमला अभी भी जारी है. CJP संस्थापक अभिजीत दीपके और सौरव दास BCI चेयरमैन के रूप में मनन मिश्रा के कार्यकाल और जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए अब भी उनके इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं.
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