पड़ोसी देश नेपाल में आई अचानक बाढ़ की तबाही ने कई जिंदगियां छीन ली है. मरने वालों से लेकर लापता लोगों की संख्या भी लगातार बढ़ते जा रही है. खबर लिखे जाने तक भोटेकोशी बाढ़ में मरने वालों की संख्या 270 पहुंच चुकी है, जबकि 750 लोगों से ज्यादा लापता बताए जा रहे है. इस आपदा में भारत के 288 लोग लापता हो गए है. हालांकि फंसे हुए लोगों के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है. इसी रेस्क्यू ऑपरेशन के तहत बचाए गए एक नेपाली मजदूर ने बताया कि कैसे उन्होंने एक पेड़ की मदद से अपनी जान बचाई. इसके अलावा एक स्कूली बच्ची ने खौफनाक मंजर की पूरी कहानी बताई, तो वहीं एक शख्स ने बताया कि कैसे 5 घंटे बाद उसकी जान बच गई लेकिन पत्नी की मौत हो गई.
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मजदूर ने पेड़ पकड़कर बचाई अपनी जान
26 अगस्त(बुधवार) की सुबह नेपाल के रसुवा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी में अचानक बाढ़ आई, जिसके बाद पूरा का पूरा मंजर ही बदल गया. जहां पहले लोगों का घर हुआ करता था, अब वहां मलबा ही मलबा देखने को मिल रहा है. रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाली मजदूर बिबेक कुमाल रसुवा जिले के बिदुर इलाके में काम कर रहे थे. वे वहां एक नए बने घर के बाहर शौचालय के लिए गड्ढा खोद रहे थे. तभी अचानक उन्हें कुछ अजीब फुसफुसाहट की आवाजें सुनाई दी.
जब तक बिबेक कुछ समझ पाते तब तक पांच फीट गहरे गड्ढे के ऊपर काम कर रहे चार साथियों ने उन्हें बाहर निकलकर भागने के लिए आवाज लगाई. बिबेक गड्ढे से बाहर आए तो देखा उनके साथी पहले ही भाग चुके थे. इसके बाद वहां तेज पानी, कीचड़ और चट्टानों का एक ऐसा बहाव तेजी से नीचे आया, जिसने सबकुछ बहा दिया. काठमांडू के नेशनल ट्रॉमा सेंटर के एक बेड पर लेटे हुए उन्होंने बताया कि,
'मैं वहां से भागने लगा. ऐसा लगा की पानी एक दीवार गरजने लगी जैसे की भूकंप आया हो. तेज बहाव और कीचड़ मुझे अपने साथ बहा कर और नीचे ले गया. लेकिन तभी किस्मत से मैं एक आम के पेड़ पर लटक गया. अगर वह पेड़ नहीं होता तो बहकर मर ही जाता.'
बाद में रेस्क्यू टीम वहां पहुंची और फिर उन्होंने बिबेक को सही-सलामत बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया. पानी और एक बड़े पत्थर से टकराने की वजह से उनकी दाहिने पैर में चोटें आई है.
स्कूल बच्ची ने बयां किया खौफनाक मंजर की कहानी
बिबेक के सामने वाले अस्पताल के बिस्तर पर एक 11 साल की रिहाना लामिछाने भी बाल-बाल बचीं है. उन्होंने खौफनाक मंजर की कहानी बताते हुए कहा कि,
'मैं स्कूल में थी. बाढ़ की वजह से स्कूल बंद कर दिया गया और हमें घर जाने के लिए कहा गया. लेकिन मैं जब नदी पार कर रही थी, अचानक से बहता तेज पानी का सैलाब आया. मैं तो बच गई इसलिए खुश हूं, लेकिन मेरे दोस्तों के साथ क्या हुआ इसका मुझे कुछ नहीं पता.'
बाढ़ की वजह से रिहाना के छाती और पैर में चोटें आईं है और उनका इलाज चल रहा है.
'मलबे में दब गई पत्नी, 5 घंटे बाद बची मेरी जान'
इसी हादसे से पीड़ित 68 साल के केशव प्रसाद बराल एक अस्पताल में अपना इलाज करवा रहे हैं. उन्होंने बताया कि,
'अचानक से तेज पानी और कीचड़ का बहाव सीधे हमारी तरफ आ रहा था. जैसे-जैसे वह नजदीक आ रहा था, वैसे-वैसे ही उसकी हाइट बढ़ रही थी. जब मैंने इस मंजर को देखा तो अपनी पत्नी का हाथ पकड़कर उसे घर की छत की ओर ले जाने लगा. लेकिन हाथ छूट गया और वह कीचड़ में बह गई.'
केशव ने आगे बताया कि लगभग 4-5 घंटे वे इसी तरह फंसे रहे, फिर रेस्क्यू हेलिकॉप्टर आया. उन्होंने कहा कि, मेरी पत्नी अभी भी कीचड़ के अंदर ही दबी हुई है, लेकिन वो अब नहीं रही.
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