नेपाल की बाढ़ में डूबा बैंक, मलबे से बाहर निकला 50 करोड़ का 'खजाना', पढ़ें उफनती नदी के बीच 8 घंटे चले थ्रिलर रेस्क्यू की पूरी कहानी

पंकज दास

• 02:59 PM • 31 Aug 2026

नेपाल की भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ से भारी तबाही के बीच, सुरक्षा बलों ने नुवाकोट के जलमग्न कृषि विकास बैंक से 8 घंटे लंबे ऑपरेशन में 50 करोड़ रुपये का सोना और करोड़ों का कैश सुरक्षित बाहर निकाला.

नेपाल में बाढ़
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Nepal Flood: नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने जो तबाही मचाई है वो तो हम सब देख ही रहे हैं.भोटेकोशी नदी में आई भयानक बाढ़ ने सैकड़ों लोगों की जान ले ली और हजारों को बेघर कर दिया. लेकिन इसी तबाही के बीच नेपाल की पुलिस और रेस्क्यू टीमों ने एक ऐसा काम कर दिखाया है, जिसकी चर्चा आज हर तरफ हो रही है. दरअसल उफनती नदी के बीच, करीब 8 घंटे तक ऑपरेशन चलाकर रेस्क्यू टीम ने डूबे हुए एक बैंक के लॉकर को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है. खास बात ये है कि इस लॉकर में 50 करोड़ रुपये का सोना और करोड़ों की नकदी थी. तो आखिर कैसे हुआ ये नामुमकिन लगने वाला रेस्क्यू? और नेपाल में इस बाढ़ ने अब तक कितनी तबाही मचाई है? चलिए, आज के इस वीडियो में जानते हैं पूरी कहानी.

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ये बात है नेपाल के नुवाकोट जिले के त्रिशूली इलाके की. 26 अगस्त को यहां भोटेकोशी नदी का पानी इतनी रफ्तार से आया कि 'कृषि विकास बैंक' की शाखा पूरी तरह जलमग्न हो गई, पानी इतना भर गया कि बैंक परिसर सिर्फ कीचड़ और मलबे का ढेर बनकर रह गया. जब पानी का लेवल हलका सा कम हुआ तो सबसे बड़ी चिंता थी- बैंक के अंदर रखे करोड़ों रुपये और सोने-चांदी की. 

पानी और मलबे में समा गई थी बैंक की इमारत

क्योंकि लॉकर मलबे में दब गया था, तो पानी और मलबे के बीच लॉकर तक पहुंचना किसी खतरे से खाली नहीं था. हालांकि नेपाल पुलिस और सुरक्षा बलों की टीमों ने हार नहीं मानी. उन्होंने  इस बाढ़ के मलबे के बीच से रास्ता बनाया. करीब 8 घंटे तक बिना रुके चले इस रेस्क्यू ऑपरेशन में जो सामने आया, उसने सबके होश उड़ा दिए.  बैंक के लॉकर से लगभग 50 करोड़ नेपाली रुपये मूल्य का सोना, करीब डेढ़ करोड़ नेपाली रुपये नकद, ढेर सारी चांदी और जरूरी दस्तावेज सुरक्षित बाहर निकाल लिए गए.  इस मुश्किल रेस्क्यू के बाद बैंक अधिकारियों और प्रशासन ने राहत की सांस ली.

ये तो बात हुई बैंक रेस्क्यू की लेकिन इस बाढ़ ने पूरे नेपाल में जो तबाही मचाई है, उसकी तस्वीरें दिल दहला देने वाली हैं. भोटेकोशी नदी के तेज बहाव ने रास्तों, पुलों और जमीनों को ताश के पत्तों की तरह बहा दिया. सड़कें पूरी तरह जलमग्न हो गईं, जिससे प्रभावित इलाकों का संपर्क देश के बाकी हिस्सों से पूरी तरह कट गया. पानी और मलबे की वजह से राहत टीमों का दूर-दराज के इलाकों तक पहुंचना एक बहुत बड़ी चुनौती बन गया था. लोग अपने छतों पर फंसे हुए थे और नीचे सिर्फ पानी का कब्जा था. इस आपदा ने नेपाल में प्राकृतिक हादसों से होने वाले नुकसान और रेस्क्यू चैलेंज की गंभीरता को एक बार फिर दुनिया के सामने ला दिया है."

बारिश नेपाल में कैसे आ गया भीषण सैलाब?  

माना जा रहा है कि इस बाढ़ का कारण सीमा के तिब्बत वाले हिस्से से भोटेकोशी नदी में अचानक और भारी मात्रा में पानी का आना था. हाइड्रोलॉजिकल एक्सपर्ट और जियोलॉजिकल रिसर्चर ने बाढ़ का कारण 'ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड' बताया है. 

वहीं काठमांडू यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और क्लाइमेट एक्सपर्ट रिजन भक्त कायस्थ के मुताबिक, तिब्बत के केरुंग इलाके में अचानक हिमस्खलन होने से लेंडे नदी का रास्ता रुक गया था, जिससे वहां पानी जमा होकर एक अस्थाई झील बन गई. जब यह जमी हुई झील अचानक फटी, तो सारा पानी तेजी से बह निकला और इसी वजह से भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में अचानक भीषण बाढ़ आ गई; उन्होंने बताया कि यह जानकारी नेपाली और चीनी वैज्ञानिकों की शुरुआती जांच पर आधारित है.

आंकड़ों की बात करें तो अब तक इस भीषण बाढ़ और आपदा में 781 लोगों की जान जाने की दुखद खबर आ चुकी है. वहीं, सेना और राहत बलों ने जांबाजी दिखाते हुए 9,435 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला है. आसमान से मदद पहुंचाने के लिए 394 से अधिक हेलीकॉप्टर उड़ानें भरी जा चुकी हैं. जबकि जमीन पर नेपाली सेना, पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के 20,000 से ज्यादा जवान तैनात हैं.

हालांकि नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने खुद आगे आकर देश के हालात की विस्तृत जानकारी साझा की है. उन्होंने साफ कहा कि रसुवा की भोटेकोशी नदी से हुई तबाही का पूरा विवरण जुटाना अभी भी कठिन है, क्योंकि मौसम खराब है और भौगोलिक स्थितियाँ बेहद चुनौतीपूर्ण हैं. लेकिन सरकार युद्धस्तर पर राहत कार्य में जुटी है.

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