भारत की संसदीय राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है. मोदी सरकार 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' यानी महिला आरक्षण कानून को अमलीजामा पहनाने के लिए लोकसभा की सीटों की संख्या में भारी बढ़ोतरी करने की योजना बना रही है. चर्चा है कि वर्तमान 543 सीटों को बढ़ाकर 816 किया जा सकता है. हालांकि, इस नए परिसीमन (Delimitation) को लेकर उत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों के बीच एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है.
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क्या है सरकार की योजना?
महिला आरक्षण अधिनियम 2023 के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित की जानी हैं. इसे 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने का लक्ष्य है. सरकार का तर्क है कि सीटों की संख्या बढ़ाकर 816 करने से महिलाओं के लिए 272 से अधिक सीटें सुनिश्चित हो सकेंगी, जिससे पुरुषों की वर्तमान सीटों पर भी बड़ा असर नहीं पड़ेगा.
सीटों का नया गणित: यूपी-बिहार को बड़ा फायदा
प्रस्तावित फॉर्मूले के अनुसार अगर हर राज्य की सीटों में 50% की बढ़ोतरी की जाती है, तो राज्यों की ताकत इस प्रकार बदल सकती है:
- उत्तर प्रदेश: वर्तमान 80 सीटों से बढ़कर 120 हो जाएंगी (40 सीटें महिलाओं के लिए).
- महाराष्ट्र: 48 से बढ़कर 72 सीटें.
- पश्चिम बंगाल: 42 से बढ़कर 63 सीटें.
- बिहार: 40 से बढ़कर 60 सीटें.
- तमिलनाडु: 39 से बढ़कर 59 सीटें.
- दिल्ली: 7 से बढ़कर 11 सीटें.
'उत्तर बनाम दक्षिण' का विवाद
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस परिसीमन पर सवाल उठाए हैं. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश और दक्षिण भारतीय राज्यों के मुख्यमंत्रियों (रेवंत रेड्डी और एन. चंद्रबाबू नायडू) का आरोप है कि जनसंख्या के आधार पर होने वाले इस परिसीमन से दक्षिण भारतीय राज्यों को नुकसान होगा.
दक्षिण का तर्क: दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर काम किया है, लेकिन अब उन्हें कम सीटें मिलने की सजा दी जा रही है. अनुमान है कि दक्षिण के पांच राज्यों को केवल 66 सीटों का फायदा होगा, जबकि उत्तर भारत के राज्यों को लगभग 200 सीटों का लाभ मिलेगा.
बहुमत का खेल: 816 सीटों वाली लोकसभा में बहुमत का आंकड़ा 409 होगा. विपक्ष का डर है कि उत्तर भारत के राज्यों (यूपी, बिहार, एमपी, राजस्थान आदि) की कुल 471 संभावित सीटों के दम पर कोई भी दल दक्षिण भारत को नजरअंदाज करके केंद्र में सरकार बना सकता है.
जनगणना और परिसीमन की समयसीमा
2021 की जनगणना जो टल गई थी, अब 2026 में शुरू होने की संभावना है. इसी जनगणना के आंकड़ों के आधार पर नया परिसीमन होगा. गृह मंत्री अमित शाह ने सुझाव दिया है कि राज्यों के वर्तमान अनुपात को बनाए रखते हुए कुल संख्या बढ़ाई जाए, ताकि किसी राज्य को प्रतिनिधित्व में घाटा न महसूस हो.
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