पहाड़ से गिरते पत्थरों के बीच देवदूत बनी NHAI टीम, 7 महीने के मासूम को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाकर बचाई जान

विशाल आनंद

24 Jul 2026 (अपडेटेड: Jul 24 2026 1:19 PM)

हिमाचल के चंबा-भरमौर हाईवे पर भारी भूस्खलन के बीच NHAI की टीम ने अदम्य साहस दिखाते हुए 7 माह के गंभीर बीमार मासूम को समय पर अस्पताल पहुंचाया. पत्थरों की परवाह न करते हुए कर्मचारियों ने मुस्तैदी से बच्चे की जान बचाकर इंसानियत की मिसाल पेश की.

हिमाचल की पहाड़ियों से आया दिल दहला देने वाला मामला
हिमाचल की पहाड़ियों से आया दिल दहला देने वाला मामला
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कुदरत का कहर, सिर पर मंडराता खतरा और गाड़ियों के पहियों को ब्रेक लगाता भूस्खलन... हिमाचल प्रदेश के चंबा-भरमौर नेशनल हाईवे पर जब सब कुछ थम सा गया था. तब कुछ जांबाज कर्मचारियों की मुस्तैदी ने एक नन्हीं जान को नया जीवन दे दिया. खौफनाक मंजर के बीच NHAI के कर्मचारियों ने जो मानवीय मिसाल पेश की है उसकी हर तरफ तारीफ हो रही है. 

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जब रास्तों पर थम गई थीं सांसें

हिमाचल में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है. जगह-जगह से दरकते पहाड़ और अचानक गिरती चट्टानों के कारण सड़कें ठप पड़ी हैं. इसी आफत के बीच हाईवे पर एक परिवार उस वक्त असहाय हो गया, जब उनका महज़ 7 महीने का बच्चा बीच रास्ते में फँस गया. मासूम पिछले कुछ समय से ऑक्सीजन सपोर्ट पर था और उसकी हालत बिगड़ती जा रही थी. मुसीबत यह थी कि हाईवे पर दोनों तरफ भारी भूस्खलन के कारण रास्ता पूरी तरह बंद हो चुका था. पहाड़ से लगातार पत्थर गिर रहे थे और मासूम के पास बची हुई ऑक्सीजन धीरे-धीरे खत्म हो रही थी.

वक्त से जंग और NHAI की जांबाजी

समय बहुत कम था और खतरा बेहद बड़ा. लेकिन हाईवे की सुरक्षा और सड़क बहाली में जुटी NHAI की पेट्रोलिंग टीम को जैसे ही इस स्थिति की भनक लगी, उन्होंने एक सेकंड भी नहीं गँवाया. अपनी जान को जोखिम में डालते हुए टीम के सदस्य फौरन आगे आए. खतरनाक मोड़ और गिरती चट्टानों की परवाह किए बिना, पेट्रोलिंग टीम ने परिवार और मासूम को अपनी गाड़ी में बैठाया. मुस्तैदी और समझदारी दिखाते हुए उन्होंने बच्चे को सही सलामत समय रहते नजदीकी अस्पताल पहुंचा दिया.

राहत कार्य में शामिल कर्मचारी ने कहा कि "हमारे लिए रास्ता खोलना तो रोजाना का काम है लेकिन उस दिन एक मासूम की सांसों को टूटने से बचाना सबसे बड़ा मकसद बन गया था."

हर तरफ हो रही सराहना

अगर एनएचएआई की टीम ने थोड़ी भी देर की होती, तो एक बड़ा हादसा हो सकता था. डॉक्टरों की मानें तो सही समय पर अस्पताल पहुँचने के कारण बच्चे को तुरंत मेडिकल केयर मिल सकी और उसकी हालत अब स्थिर है.

तबाही के इस मौसम में जहां एक तरफ कुदरत का खौफ है, वहीं दूसरी तरफ कर्तव्यनिष्ठा और इंसानियत की यह कहानी हर किसी का दिल जीत रही है. आपदा के इस दौर में NHAI के ये कर्मचारी आम लोगों के लिए किसी देवदूत से कम साबित नहीं हुए.

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