वैश्विक स्तर पर चल रहे विभिन्न भू-राजनीतिक संकटों और उनके कारण लड़खड़ाती सप्लाई चेन के बीच केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को लेकर बड़ा बयान दिया है. पत्रकारों से बातचीत करते हुए वित्त मंत्री ने वैश्विक स्तर पर पैदा हो रही आर्थिक चुनौतियों को स्वीकार किया, लेकिन साथ ही यह भरोसा भी जताया कि देश इन परिस्थितियों से निपटने के लिए पूरी तरह सक्षम है. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि संकट भले ही वैश्विक स्तर के हों, लेकिन सरकार का पूरा प्रयास है कि देश की आम जनता पर इसका कोई सीधा असर न पड़े और उन्हें परेशानियों का सामना न करना पड़े.
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वैश्विक संकटों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने चुनौतियां
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दुनिया भर में जारी संकटों का जिक्र करते हुए कहा कि इस समय पश्चिम एशिया संकट, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का संकट, रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव जैसी कई बड़ी चुनौतियां दुनिया के सामने खड़ी हैं. इन सभी वजहों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) और फर्टिलाइजर (उर्वरक) की कीमतों में भारी उछाल आया है. वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि ये कोई मामूली बढ़ोतरी नहीं है बल्कि यह बेहद गंभीर संकट है, क्योंकि इन बढ़ी हुई कीमतों का भुगतान देश को अपने विदेशी मुद्रा भंडार के जरिए ही करना पड़ता है.
पीएम मोदी के मार्गदर्शन में हर चुनौती से निपटने का भरोसा
इन गंभीर वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद वित्त मंत्री ने पूरी जिम्मेदारी के साथ देश को आश्वस्त किया कि भारत इन सभी चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन में भारत इन विपरीत परिस्थितियों से कुशलतापूर्वक पार पा लेगा, जो कि हमारे देश द्वारा पैदा नहीं की गई हैं. कच्चे तेल की अस्थिर कीमतों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि क्रूड ऑयल के दाम लगातार बदल रहे हैं, कभी यह 83 डॉलर, कभी 86 डॉलर, तो कभी 92, 101, 102 और यहां तक कि 116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाते हैं. उन्होंने कहा कि सरकार इन बदलती कीमतों पर लगातार कड़ी नजर रख रही है ताकि देश के नागरिकों को किसी भी प्रकार का कष्ट न उठाना पड़े.
आरबीआई डिविडेंड पर जताई पूरी संतुष्टि
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा सरकार को दिए गए डिविडेंड को लेकर पूछे गए सवाल पर वित्त मंत्री ने केंद्रीय बैंक की कार्यप्रणाली पर अपना पूरा भरोसा जताया. उन्होंने कहा कि आरबीआई के डिविडेंड की गणना एक बेहद स्पष्ट और स्थापित प्रोटोकॉल व फॉर्मूलेशन के तहत की जाती है, जिसके लिए एक विशेष कमेटी भी इन आंकड़ों की समीक्षा करती है. इसी सालाना गणना के आधार पर आरबीआई ने सरकार को यह डिविडेंड सौंपा है. कुछ विश्लेषकों और जानकारों के इस मत पर कि आरबीआई सरकार को थोड़ा और अधिक डिविडेंड दे सकता था, वित्त मंत्री ने कहा कि रिजर्व बैंक ने भविष्य के लिए कुछ अतिरिक्त प्रावधान किए हैं और वह आरबीआई द्वारा की गई इस गणना का पूरी तरह सम्मान और उस पर भरोसा करती हैं.
रुपये की स्थिति और विभिन्न सुझावों पर विचार
देश की राजकोषीय स्थिति, रुपये की मजबूती और बाहरी आर्थिक दबावों को लेकर पूछे गए सवाल पर भी वित्त मंत्री ने सरकार का रुख स्पष्ट किया. उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के बीच रिजर्व बैंक भारतीय रुपये को मजबूती और सहारा देने के लिए बाजार में बेहद सक्रिय भूमिका निभा रहा है. इसके साथ ही सरकार के पास निवेश बढ़ाने, रुपये की स्थिति सुधारने और गोल्ड बॉन्ड जैसे मुद्दों पर विभिन्न विभागों और आम लोगों की ओर से लगातार कई महत्वपूर्ण इनपुट और सुझाव स्वैच्छिक रूप से आ रहे हैं. वित्त मंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार लोगों की बातों को सुनने के लिए हमेशा तैयार है और प्राप्त होने वाले हर एक सुझाव व इनपुट पर गंभीरता से विचार किया जाएगा.
जनता को राहत देने के लिए उठाए कदम
महंगाई के मोर्चे पर बात करते हुए वित्त मंत्री ने पूर्व में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की भी याद दिलाई. उन्होंने बताया कि सरकार ने आम जनता को राहत पहुंचाने और महंगाई के बोझ को कम करने के लिए उत्पाद शुल्क में कटौती की थी. इस कटौती के जरिए सरकार ने इस साल देश की जनता को सालाना एक लाख करोड़ रुपये से भी अधिक की बड़ी राहत सीधे तौर पर पहुंचाई है, जिससे लोगों की जेब पर पड़ रहा दबाव कम हुआ है.
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