पश्चिम एशिया के समुद्री रास्तों पर इन दिनों भारी तनाव का माहौल है. इसी बीच सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जाने लगा कि ओमान के पास एक और जहाज पर हमला हुआ है, जिसमें चार भारतीय नागरिकों की मौत हो गई है. इस खबर के सामने आते ही हड़कंप मच गया. हालांकि, अब भारत सरकार के विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस पूरे मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ी है और सच्चाई सामने रखी है.
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विदेश मंत्रालय ने दावों को बताया पूरी तरह गलत
विदेश मंत्रालय ने इन सभी खबरों का पूरी तरह से खंडन किया है. सरकार की तरफ से साफ कहा गया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में 'MT Liaki Freedom' नाम के टैंकर पर हमले और उसमें चार भारतीयों की मौत की खबरें केवल एक अफवाह हैं. इन दावों में दूर-दूर तक कोई सच्चाई नहीं है. यह रिपोर्ट पूरी तरह भ्रामक है.
सभी क्रू मेंबर सुरक्षित, जहाज के मालिक ने की पुष्टि
इस मामले को लेकर डायरेक्टर जनरल ऑफ शिपिंग (DG Shipping) से जुड़े सूत्रों ने बताया कि उन्होंने तुरंत इस टैंकर के मालिक से संपर्क किया. जहाज के मालिक ने इस बात की पुष्टि की है कि जहाज पर मौजूद चालक दल (Crew) के सभी सदस्य पूरी तरह सुरक्षित हैं. किसी भी तरह के हमले या मौत की खबर में कोई दम नहीं है.
पिछले कुछ दिनों में हुए हैं कई हमले
भले ही MT Liaki Freedom को लेकर आई खबर झूठी साबित हुई हो, लेकिन होर्मुज और ओमान की खाड़ी में पिछले कुछ दिनों से हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं. हाल ही में ऐसी तीन घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें भारतीय क्रू वाले जहाजों को निशाना बनाया गया.
कब-कब हुआ अटैक
8 जून की घटना: ओमान के दक्षिण-पूर्वी तट पर अमेरिकी नौसेना ने एक प्रतिबंधित टैंकर 'मैरीवेक्स' पर मिसाइल दाग दी थी. इस जहाज पर 24 भारतीय सवार थे, लेकिन राहत की बात यह रही कि इस हमले में किसी भी भारतीय को नुकसान नहीं पहुंचा.
10 जून का हमला: इसके बाद अमेरिकी नौसेना ने ओमान तट के पास 'MT Settebello' नाम के ऑयल टैंकर पर हमला किया. इस जहाज पर भी 24 भारतीय क्रू सदस्य थे. इनमें से 21 को तो सुरक्षित बचा लिया गया, लेकिन 3 भारतीय नाविक लापता हो गए थे. बाद में भारत सरकार ने इन तीनों नाविकों की मौत की पुष्टि की.
11 जून का संकट: अगले ही दिन 'MT Jalveer' नाम के एक और जहाज से जुड़ी आपातकालीन घटना सामने आई. भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय ने बताया कि ओमान के पास यह जहाज संकट में फंस गया था, जिसके बाद भारतीय चालक दल को वहां से सुरक्षित निकालने का काम तुरंत शुरू कर दिया गया.
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