ट्स डन ब्रो... सोशल मीडिया पर लिखे गए महज तीन शब्दों का यह एक छोटा सा जुमला नहीं है. इस एक लाइन के पीछे छिपी है 15 साल की लंबी कानूनी जद्दोजहद, सोशल मीडिया की चर्चाएं और प्यार में धैर्य की अनूठी दास्तां. जब जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हाथ में अंगूठी वाली इमोजी के साथ लिखा कि कल एक नई यात्रा शुरू हुई तो उसके जवाब में चर्चित टेलीविजन एंकर निधि राजदान ने जवाब लिखा- इट्स डन ब्रो. ये तीन शब्द गवाह हैं उस सब्र के, जिसने बरसों तक अपनी-अपनी पर्सनल लाइफ में बड़े भूचालों को भी झेला और अदालतों की अंतहीन तारीखों को भी. उमर अब्दुल्ला से रिलेशनशिप को लेकर निधि राजदान बरसों से चर्चा में रहीं लेकिन आज जब शादी हो चुकी है तो सचमुच चर्चित चेहरा बनी हैं.
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दिल्ली में जन्मी निधि राजदान का जन्म कश्मीरी पंडित परिवार में हुआ. पैतृक घर जम्मू-कश्मीर के बडगाम में है. पत्रकारिता में कुछ ऐसे आईं कि उनके पिता एमके राजदान न्यूज एजेंसी पीटीआई के संपादक रहे. कश्मीर के माइग्रेट करके परिवार दिल्ली का हो गया लेकिन निधि की शादी के बाद कश्मीर से नाता अब और मजबूत हो गया है. निधि की स्कूलिंग दिल्ली से हुई. दिल्ली के लेडी श्री राम कॉलेज (LSR) से ग्रेजुएशन किया और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (IIMC) से जर्नलिज्म की डिग्री लेकर पत्रकारिता में आ गईं. जिस दौर में टीवी चैनल्स ग्रो कर रहे थे तब एनटीडीवी में जॉब हुई और पूरे 21 साल तक निधि एनडीटीवी की फेस ऑफ द चैनल रहीं.
करियर की शुरुआत ऐसे हुई
करियर के शुरुआती दौर में निधि की जिंदगी में पत्रकार और मशहूर किस्सागो नीलेश मिश्रा की एंट्री हुई थी. साल 2005 में दोनों ने शादी की, लेकिन रिश्ता महज दो साल ही टिक सका और 2007 में दोनों का कानूनी तौर पर तलाक हो गया. अलग होने के बाद, दोनों ने ही एक-दूसरे के खिलाफ कभी कोई कड़वाहट या कीचड़ उछालने वाली बयानबाजी नहीं की. नीलेश मिश्रा ने किसी इंटरव्यू में तलाक को लेकर कहा कि शायद उस वक्त हम कम संवेदनशील थे या मैं पहले समझदार कम था. अगर आज मैं उस दौर में पीछे जाता, तो शायद मैं चीजों को अलग तरीके से करता और संभाल लेता. उन्होंने इसे नियति और दो समान रूप से मजबूत विचारों वाले व्यक्तियों के बीच का तालमेल न बैठ पाना माना. साल 2008 में यामिनी मिश्रा से दूसरी शादी कर अपनी जिंदगी में आगे बढ़ चुके हैं नीलेश मिश्रा.
नीलेश से अलग होने के बाद बाद वाले दौर में जम्मू कश्मीर कवर करते हुए निधि की मुलाकात नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता उमर अब्दुल्ला से हुई. इंटरव्यू के सिलसिले में शुरू हुआ यह औपचारिक परिचय धीरे-धीरे गहरी दोस्ती में तब्दील हो गया. दिल्ली के राजनीतिक गलियारों से लेकर श्रीनगर की डल झील तक, दोनों को कई मौकों पर साथ देखा जाने लगा, हालांकि दोनों ने कभी भी सार्वजनिक रूप से इस रिश्ते पर खुलकर मुहर नहीं लगाई थी.
इस अधूरी प्रेम कहानी के मुकम्मल होने के रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा उमर अब्दुल्ला की पहली शादी का कानूनी विवाद था. उमर अब्दुल्ला ने 1 सितंबर 1994 को मेजर जनरल राम नाथ की बेटी पायल नाथ से शादी की थी. 2009 आते-आते शादी में इतनी कड़वाहट आ गई कि दोनों अलग रहने लगे. उमर ने 2011 में फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल की. लेकिन पायल नाथ के नहीं मानने से तलाक की जंग बेहद पेचीदा और लंबी खिंच गई.
उमर अब्दुल्ला ने याचिका में 'क्रूरता और परित्याग' (Cruelty and Desertion) को आधार बनाते हुए कहा था कि यह शादी पूरी तरह टूट चुकी है. लेकिन, पायल नाथ ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया और अदालत में दलील दी कि बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा कारणों से वे दिल्ली में अलग रह रही थीं, जिसे क्रूरता नहीं माना जा सकता. 2016 में फैमिली कोर्ट और फिर दिसंबर 2023 में दिल्ली हाई कोर्ट ने उमर की तलाक की अर्जी को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि वे क्रूरता के आरोपों को कानूनी रूप से साबित नहीं कर पाए. केस सुप्रीम कोर्ट तक खींच गया.
सुप्रीम कोर्ट में लंबी मध्यस्थता के बाद दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति बनी. इसी साल 31 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत उमर और पायल के तलाक को अंतिम मंजूरी दी. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक दोनों के बीच हुए फाइनल समझौते की जानकारी को सार्वजनिक नहीं है.
56 साल के उमर और 49 साल की निधि
तलाक फाइनल होने के बाद, 30 अक्टूबर को 56 साल के उमर और 49 साल की निधि ने स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत कोर्ट मैरिज कर ली. सोशल मीडिया पर दोनों की शादी की तस्वीरें आने के बाद इंटरनेट पर यह सवाल लगातार तैर रहा कि क्या निधि राजदान ने इस्लाम कुबूल कर लिया है या उमर अब्दुल्ला ने अपना धर्म बदला है. कानूनी दस्तावेजों औरमीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों ने अपने-अपने मूल धर्म उमर अब्दुल्ला ने मुस्लिम और निधि राजदान ने हिंदू/कश्मीरी पंडित को बरकरार रखते हुए नई जिंदगी की शुरूआत की है.
दोनों ने अपनी शादी को कानूनी अमलीजामा पहनाने के लिए Special Marriage Act को चुना. संविधान में कानून ऐसे अंतरधार्मिक (Interfaith) जोड़ों के लिए बनाया गया है, जो बिना किसी धार्मिक रीति-रिवाज, बिना सात फेरे या बिना निकाह के सीधे अदालती (Civil/Court Marriage) तरीके से विवाह बंधन में बंधना चाहते हैं. इस कानून के तहत शादी करने के लिए न तो दूल्हे को और न ही दुल्हन को अपना धर्म बदलने या धर्मांतरण (Conversion) करने की जरूरत नहीं होती.
हालांकि, इस हाई-प्रोफाइल अंतरधार्मिक यानी Interfaith शादी में विवाद खड़ा करने की कोशिश हुई है. बरेली में ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने इस शादी को इस्लाम के खिलाफ और नाजायज' बताते हुए फतवा जारी कर दिया है, क्योंकि निधि ने शादी के लिए अपना धर्म परिवर्तन नहीं किया है.
कस्टडी भी मां के पास ही रही
उमर अब्दुल्ला और पायल नाथ के दो बेटे हैं- जहीर अब्दुल्ला और जमीर अब्दुल्ला. 2009 में माता-पिता के अलग होने के बाद से ही दोनों बेटे दिल्ली में अपनी मां पायल के पास रहकर बड़े हुए. कस्टडी भी मां के पास ही रही. आज दोनों बेटे बालिग, लॉ ग्रेजुएट और आत्मनिर्भर हैं. आज दोनों बेटे 20s में हैं और लॉ ग्रेजुएट होकर करियर बना रहे हैं. 31 जुलाई को जब सुप्रीम कोर्ट में माता-पिता का फाइनल सेटलमेंट हुआ, तब तक दोनों बेटे पूरी तरह बालिग और आत्मनिर्भर हो चुके थे, इसलिए कस्टडी का सवाल रहा नहीं. मां के साथ रहने के बाद भी दोनों बेटों का अपने पिता उमर अब्दुल्ला से रिश्ता कभी कमजोर नहीं पड़ा. कश्मीर की राजनीति में अब्दुल्ला परिवार की 'चौथी पीढ़ी' के रूप में उभर चुके हैं. जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनावों में जहीर और जमीर ने गांदरबल में अपने पिता के लिए चुनावी रैलियां कीं, रोड शो किए और अपने पहले राजनीतिक भाषणों से जनता का दिल जीत लिया. हालांकि रहते आज भी दिल्ली में हैं. उमर की शादी के जश्न में पूरा अब्दुल्ला परिवार जुटा लेकिन दोनों बेटे नहीं दिखे.
पीढ़ियों से जम्मू कश्मीर का शासक है अब्दुल्ला परिवार. जम्मू कश्मीर की राजनीति करने वाला इस मुसलमान परिवार की शादियों की कई सारी यूनिक कहानियां हैं. उमर अब्दुल्ला के पिता और पूर्व सीएम डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने ब्रिटिश मूल की ईसाई महिला मौली से लव मैरिज की. उमर अब्दुल्ला की तीन बहनें हैं- सफिया, सारा और हिना. तीनों बहनों में से सिर्फ सबसे बड़ी बहन, सफिया अब्दुल्ला, की शादी कश्मीरी मुस्लिम परिवार में हुई. उमर की दूसरी बहन सारा अब्दुल्ला की शादी सचिन पायलट से 2004 में हुई जो अब टूट चुकी है. 2023 के राजस्थान विधानसभा चुनाव के दौरान सचिन पायलट ने चुनावी हलफनामे में तलाकशुदा लिखकर पहली बार शादी टूट जाने का एलान किया था. उमर की तीसरी और सबसे छोटी बहन हिना अब्दुल्ला दक्षिण अफ्रीकी नागरिक से शादी करके विदेश में सैटल हो चुकी हैं.
कानूनी औपचारिकताएं अनिवार्य
भारत का कानून किसी भी मुख्यमंत्री, मंत्री या प्रधानमंत्री को पद पर रहते हुए शातदी करने से नहीं रोकता है. ये पूरी तरह से व्यक्तिगत और मौलिक अधिकार है, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सुरक्षित है. हालांकि, सिटिंग सीएम होने के नाते कुछ कानूनी औपचारिकताएं अनिवार्य हो जाती हैं. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को देश के अन्य नागरिकों की तरह ही 'स्पेशल मैरिज एक्ट' के तहत विवाह का पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) कराना पड़ा. नियमों के मुताबिक अब आगे सीएम उमर को अपनी Annual Asset Declaration और चुनावी हलफनामे में अपनी नई पत्नी यानी निधि राजदान की आय, चल-अचल संपत्ति और देनदारियों का पूरा ब्योरा सरकार और चुनाव आयोग को सौंपना होगा. मुख्यमंत्री की पत्नी होने के नाते निधि राजदान को मिलेगा सीएम की वाइफ का पूरा प्रोटोकॉल.
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