Fact Check: क्या सरकार ने छुपाए 'ऑपरेशन सिंदूर' के शहीदों के नाम? जानिए इस वायरल दावे का पूरा सच

Operation Sindoor Fact Check: सोशल मीडिया पर अफवाह है कि सरकार ने 'ऑपरेशन सिंदूर' में शहीद हुए जवानों की बात एक साल तक छुपाकर रखी. लेकिन यह सच नहीं है. सेना ने मई 2025 में ही बता दिया था कि हमारे 5 जवान शहीद हुए हैं. अब जून 2026 में सिर्फ उनके नाम नेशनल वॉर मेमोरियल (शहीद स्मारक) में लिखे गए हैं.

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ललित यादव

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Operation Sindoor Fact Check: इंटरनेट और सोशल मीडिया पर आजकल एक खबर खूब वायरल हो रही है. लोग दावा कर रहे हैं कि 'ऑपरेशन सिंदूर' में जो जवान शहीद हुए थे, सरकार ने उनके नाम एक साल तक छुपाए रखे और अब जाकर इस बात को माना है. अगर आप भी ऐसा कुछ सुन या देख रहे हैं, तो रुक जाइए. यह दावा पूरी तरह गलत और भ्रामक है. आइए जानते हैं कि पूरी सच्चाई क्या है.

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वायरल दावे की हकीकत क्या है?

सोशल मीडिया पर कहा जा रहा है कि सरकार ने एक साल बाद ऑपरेशन सिंदूर के शहीदों की बात कबूल की है. जबकि असलियत यह है कि भारतीय सेना ने पिछले साल यानी मई 2025 में ही खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस करके देश को बता दिया था कि इस ऑपरेशन में हमारे जवान शहीद हुए हैं. 11 मई 2025 को सेना के बड़े अधिकारी (DGMO) लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने खुद इन वीर जवानों को श्रद्धांजलि दी थी. इसलिए बात छुपाने का तो कोई सवाल ही नहीं उठता.

फिर जून 2026 में क्या नया हुआ?

दरअसल, जून 2026 में सरकार ने इन शहीदों के नाम दिल्ली के 'नेशनल वॉर मेमोरियल' (राष्ट्रीय समर स्मारक) की वेबसाइट और वहां की लिस्ट में शामिल किए हैं. अब इन वीरों के नाम वहां हमेशा के लिए सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गए हैं. यह एक सरकारी प्रक्रिया है, जो समय आने पर पूरी की जाती है. इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि सरकार ने शहादत की बात अब जाकर मानी है.

पहले 5 शहीद बताए, अब लिस्ट में 6 नाम क्यों हैं?

कुछ लोग इस बात पर भी अफवाह उड़ा रहे हैं कि मई 2025 में सेना ने 5 शहीदों की बात कही थी, लेकिन अब वॉर मेमोरियल की लिस्ट में 6 नाम कैसे आ गए?

इसका जवाब भी बहुत सीधा है. ऑपरेशन के दौरान हमारे एक जवान गंभीर रूप से घायल हो गए थे. अस्पताल में इलाज के दौरान 6 जून 2025 को उन्होंने आखिरी सांस ली. जबकि सेना की प्रेस कॉन्फ्रेंस 11 मई को ही हो गई थी, इसलिए उस समय उनका नाम शहीदों की लिस्ट में नहीं था क्योंकि तब उनका इलाज चल रहा था. बाद में उनका नाम भी इस लिस्ट में सम्मान के साथ जोड़ा गया.

इसी तरह वायुसेना के शहीद जवान सार्जेंट सुरेंद्र कुमार को लेकर भी भ्रम फैलाया जा रहा है. जबकि सच यह है कि वायुसेना प्रमुख खुद बहुत पहले ही शहीद के परिवार से मिलकर उन्हें सांत्वना दे चुके थे.

नाम दर्ज होने में क्यों लगता है समय?

शहीद स्मारक (War Memorial) पर किसी भी जवान का नाम ऐसे ही तुरंत नहीं लिख दिया जाता. इसके लिए सेना के कई कागजी काम, रिकॉर्ड की जांच और जरूरी औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं. जब यह कागजी प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तब नाम को हमेशा के लिए वहां दर्ज कर दिया जाता है. यह सेना की एक रूटीन और सम्मान देने की प्रक्रिया है.

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