प्रियंका गांधी के 'गोमूत्र विशेषज्ञ' वाले तंज पर भड़का शिक्षा जगत, जानें कौन हैं V Kamakoti और क्या है ये पूरा मामला

न्यूज तक डेस्क

• 03:10 PM • 31 Jul 2026

प्रो. वी. कामकोटि IIT मद्रास के निदेशक और शीर्ष कंप्यूटर वैज्ञानिक हैं, जिन्होंने देश के पहले स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर के विकास और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व राष्ट्रीय सुरक्षा नीतियों में अहम योगदान दिया है.

प्रियंका गांधी और  V Kamakoti
प्रियंका गांधी और V Kamakoti
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संसद के भीतर इन दिनों सियासत का पारा चढ़ा हुआ है. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में सुधार के लिए बनाए गए उच्च स्तरीय पैनल को लेकर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी के एक बयान ने नए विवाद को जन्म दे दिया है. प्रियंका गांधी ने सदन में शिक्षा सुधार कमेटी के एक सदस्य पर तंज कसते हुए उन्हें 'गोमूत्र विशेषज्ञ' कह दिया.

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हालांकि, प्रियंका गांधी ने अपने भाषण के दौरान किसी का नाम नहीं लिया था लेकिन उनका इशारा IIT मद्रास के निदेशक और NTA सुधार पैनल के सदस्य प्रो. वी. कामकोटि की तरफ माना जा रहा है. प्रियंका के इस बयान के बाद जहां एक तरफ सत्ता पक्ष के सांसदों ने कड़ा विरोध जताया, वहीं अब देश के शीर्ष वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों ने भी इस पर गहरी नाराजगी जताई है. 

पहले जान लेते हैं क्या है ये पूरा मामला 

दरअसल NEET पेपर लीक विवाद को लेकर देश भर में हुए प्रोटेस्ट के बाद केंद्र सरकार ने NTA की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने के लिए 6 विशेषज्ञों का एक मल्टी-डिसिप्लिनरी पैनल बनाया था. IIT मद्रास के डायरेक्टर प्रो. वी. कामकोटि भी इस पैनल के सदस्यों में शामिल हैं. इस बीच सदन में सरकार की शिक्षा नीतियों और टास्क फोर्स के गठन पर सवाल उठाते हुए प्रियंका गांधी ने यह टिप्पणी की. सत्ता पक्ष और बीजेपी नेताओं का कहना है कि प्रियंका गांधी ने एक महान वैज्ञानिक के दशकों के योगदान को नजरअंदाज करते हुए केवल एक पुराने बयान के आधार पर उनका मजाक उड़ाने की कोशिश की है. 

गोमूत्र से जुड़ा बयान कब और कहां का है?

दरअसल यह विवाद जनवरी 2025 का है. चेन्नई की एक गौशाला में माटू पोंगल के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में प्रो. कामकोटि पहुंचे थे. वहां अपने संबोधन में उन्होंने देसी गायों की नस्ल और जैविक खेती के फायदों पर बात की थी. इसी दौरान उन्होंने पारंपरिक ज्ञान का जिक्र करते हुए कहा था कि गाय के मूत्र में एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल और पाचन शक्ति बढ़ाने वाले गुण होते हैं. उन्होंने एक साधु का अनुभव भी साझा किया था, जिनका बुखार कथित तौर पर इसे पीने के बाद ठीक हो गया था. इसी पुराने बयान को आधार बनाकर अब संसद में उन पर निशाना साधा गया. 

शिक्षा जगत का प्रियंका गांधी वाड्रा को करारा जवाब

वहीं विवाद बढ़ता देख देश के जाने-माने शिक्षाविदों और वैज्ञानिकों ने प्रियंका गांधी के नाम एक खुला पत्र जारी किया है. इस पत्र पर ICT मुंबई के पूर्व कुलपति प्रो. जी.डी. यादव और एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज की महासचिव प्रो. पंकज मित्तल समेत कई दिग्गजों के हस्ताक्षर हैं.

पत्र में वैज्ञानिकों और प्रोफेसरों ने प्रियंका गांधी के बयान पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि लोकतंत्र में असहमति और बहस का स्वागत है, लेकिन किसी विद्वान पर तंज कसना या कोई लेबल चस्पा कर देना तार्किक बहस का विकल्प नहीं हो सकता. हमारा संविधान हर नागरिक से वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने की अपेक्षा करता है. किसी विद्वान की शैक्षणिक उपलब्धियों को नजरअंदाज कर उनका मजाक उड़ाना इसी वैज्ञानिक सोच को कमजोर करता है. 

लेटर में आगे लिखा है, इस तरह की टिप्पणियों से देश के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के बीच यह गलत संदेश जाता है कि अगर वे सार्वजनिक चर्चाओं में भाग लेंगे, तो उनका मजाक उड़ाया जाएगा. वैज्ञानिकों को पारंपरिक ज्ञान पद्धतियों पर खुलकर चर्चा और शोध करने का अधिकार है. इतिहास गवाह है कि जिन विचारों को कभी नामुमकिन समझा गया बाद में वे वैज्ञानिक रूप से सही साबित हुए. 

सार्वजनिक बहस के स्तर पर उठे सवाल

वैज्ञानिकों और प्रोफेसरों का कहना है कि संसद देश की सबसे बड़ी पंचायत है जहां विचारों की गंभीरता से परख होनी चाहिए. जब जटिल वैज्ञानिक और शैक्षणिक मुद्दों को राजनीतिक उपहास का जरिया बनाया जाता है तो इससे किसी का भला नहीं होता. देश के वैज्ञानिकों का तर्क है कि प्रो. कामकोटि के तर्कों या विचारों की आलोचना की जा सकती है लेकिन तकनीक और राष्ट्रीय सुरक्षा में उनके दशकों के योगदान को एक विवादित तंज में समेट देना बेहद निराशाजनक है.

कौन हैं प्रो. वी. कामकोटि 

प्रो. वी. कामकोटि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाने-माने कंप्यूटर वैज्ञानिक और IIT मद्रास के निदेशक (जनवरी 2022 से) हैं, जिन्होंने इसी संस्थान से कंप्यूटर साइंस में M.S. और Ph.D. की पढ़ाई करने के बाद साल 2001 में बतौर फैकल्टी अपने सफर की शुरुआत की थी. कंप्यूटर आर्किटेक्चर, इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी और VLSI डिजाइन के क्षेत्र में विशेषज्ञता रखने वाले प्रो. कामकोटि ने भारत के स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर डेवलपमेंट प्रोग्राम की अगुवाई करने के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड (NSAB) के सदस्य और वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय द्वारा गठित 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टास्क फोर्स' के अध्यक्ष के रूप में देश की नीति निर्माण में अहम भूमिका निभाई है, इसके अलावा वे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) जैसी प्रमुख वित्तीय संस्थाओं की टेक्नोलॉजी कमेटियों के सलाहकार भी रहे हैं. 

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