संसद में महिला आरक्षण से जुड़ा संशोधन बिल पास न होने के बाद देश का सियासी पारा चढ़ गया है. जहां एक तरफ भारतीय जनता पार्टी विपक्ष को 'महिला विरोधी' करार दे रही है, वहीं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने मोर्चा संभाल लिया है. प्रियंका गांधी ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह बिल असल में महिला आरक्षण के लिए था ही नहीं, बल्कि इसमें सिर्फ परिसीमन (Delimitation) की बातें छिपी थीं. उन्होंने दावा किया कि सरकार ने देश की महिलाओं को गुमराह करने की कोशिश की है.
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हड़बड़ी और मंशा पर खड़े किए सवाल
प्रियंका गांधी ने बिल लाने के तरीके पर सवाल उठाते हुए पूछा कि अचानक विशेष सत्र बुलाकर इतनी जल्दबाजी दिखाने की क्या जरूरत थी? उन्होंने आरोप लगाया कि पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव और आगामी वोटिंग को देखते हुए बीजेपी किसी भी तरह सत्ता हथियाना चाहती है.
प्रियंका के मुताबिक, बिल का मसौदा एक दिन पहले सार्वजनिक करना यह दर्शाता है कि सरकार की नीयत में खोट था. उन्होंने कहा, "महिलाएं बेवकूफ नहीं हैं, वे समझती हैं कि कौन उनके हक की बात कर रहा है और कौन सिर्फ राजनीति."
पुराने जख्मों की दिलाई याद
सरकार द्वारा खुद को महिलाओं का 'मसीहा' बताने पर प्रियंका गांधी ने तीखा प्रहार किया. उन्होंने मणिपुर हिंसा, उन्नाव कांड और महिला पहलवानों के विरोध प्रदर्शन का जिक्र करते हुए पूछा कि तब ये 'मसीहा' कहां थे? उन्होंने कहा कि जब महिलाओं पर अत्याचार हो रहा था, तब कोई उनकी सुध लेने नहीं गया. प्रियंका ने कहा कि महिलाओं का मसीहा बनना इतना आसान नहीं है, इसके लिए जमीन पर काम करना पड़ता है.
2029 से आरक्षण लागू करने की मांग
कांग्रेस महासचिव ने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि अगर वे वाकई गंभीर हैं, तो 2029 के चुनावों से ही महिलाओं को आरक्षण देना शुरू करें. उन्होंने सुझाव दिया कि 2023 में सर्वसम्मति से पारित हुए बिल में आवश्यक छोटे-मोटे संशोधन किए जाएं, ताकि इसे जल्द से जल्द जमीन पर उतारा जा सके.
प्रियंका ने साफ किया कि कांग्रेस ऐसे किसी भी सुधार का पूरा समर्थन करेगी लेकिन वे सरकार की 'साजिश' को सफल नहीं होने देंगे. उन्होंने कहा कि संसद में बिल का गिरना सरकार की हार है, क्योंकि विपक्ष ने उनके दोहरे चेहरे को बेनकाब कर दिया है.
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