राजस्थान के पश्चिमी सीमावर्ती जिलों में प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे बुलडोजर अभियान पर बाड़मेर सांसद उमेदराम बेनीवाल ने कड़ा ऐतराज जताया है. लोकसभा में नियम 377 के अंतर्गत नोटिस देते हुए उन्होंने गृह मंत्रालय और सरकार से सवाल किया कि आखिर सीमा पर रहने वाले थारवासियों का क्या कसूर है.
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10 से बढ़ाकर 50 किलोमीटर किया दायरा
सांसद बेनीवाल ने बताया कि पहले सीमा से 10 किलोमीटर के दायरे में नोटिस दिए जा रहे थे, लेकिन बाद में इस दायरे को बढ़ाकर 50 किलोमीटर कर दिया गया. इस सीमा के भीतर आने वाली कई मस्जिदों, मजारों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और रिहायशी मकानों को हटाने के नोटिस थमा दिए गए हैं.
20-25 निर्माण ढहाए, 50 से अधिक को नोटिस
उमेदराम बेनीवाल के मुताबिक, उनके संसदीय क्षेत्र में अब तक करीब 20 से 25 धार्मिक व अन्य ढांचों को बुलडोजर से गिराया जा चुका है, जबकि लगभग 50 से 60 मस्जिदों को खुद ही अतिक्रमण हटाने या कार्रवाई झेलने के नोटिस दिए गए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावित लोगों को अपना पक्ष रखने या कानूनी प्रक्रिया पूरा करने का कोई अवसर नहीं दिया गया, जिससे स्थानीय लोगों में भय का माहौल है.
'हमेशा सेना और देश के साथ खड़े रहे हैं थार के लोग'
सांसद ने कहा कि बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और श्रीगंगानगर जैसे सीमावर्ती जिले हमेशा से शांतिप्रिय रहे हैं. यहां सभी 36 कौमों के लोग चाहे अल्पसंख्यक हों या अन्य समुदायहोली, दिवाली, ईद और मुहर्रम जैसे त्योहार मिलकर मनाते हैं. जब भी देश पर संकट आया है, सीमा के लोगों ने अपनी जान की बाजी लगाकर भारतीय सेना का साथ दिया है. ऐसे में इस तरह की एकतरफा कार्रवाई कर शांतिपूर्ण क्षेत्र में तनाव पैदा करने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए.
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