होर्मुज स्ट्रेट बंद तो क्या? मिडिल ईस्ट में युद्ध के बीच रूस का भारत को बड़ा ऑफर, तेल और गैस की टेंशन होगी खत्म

मिडिल ईस्ट में युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से दुनिया भर में तेल की कीमतें बढ़ गई हैं. इस संकट के बीच रूस ने भारत को कच्चे तेल और LNG की सप्लाई बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है.

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न्यूज तक डेस्क

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दुनिया भर में गहराते ऊर्जा संकट और मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच रूस ने एक बार फिर भारत की ओर मदद का हाथ बढ़ाया है. रूस ने भारत को प्रस्ताव दिया है कि अगर उसे जरूरत है तो वह कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस (LNG) की सप्लाई बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है. यह ऑफर ऐसे समय में आया है जब ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं.

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शीर्ष स्तर पर हुई बातचीत

रूस के पहले डिप्टी प्रधानमंत्री डेनिस मंतुरोव इन दिनों भारत के दौरे पर हैं. गुरुवार (2 अप्रैल 2026) को उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ महत्वपूर्ण बैठक की. मंतुरोव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भी मुलाकात की. इन मुलाकातों में सबसे ज्यादा जोर ऊर्जा सुरक्षा यानी तेल और गैस की निर्बाध सप्लाई पर रहा.

होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से बढ़ा संकट

दरअसल, ईरान और इजरायल के बीच चल रही जंग के कारण वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है. ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग 'होर्मुज स्ट्रेट' को बंद कर दिया है. दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से मंगवाता है, लेकिन इस रास्ते के बंद होने से सप्लाई में भारी दिक्कत आ रही है.

रूस बना 'संकटमोचक'

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्ती के बाद भारत ने रूस से तेल खरीदना थोड़ा कम किया था, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए ट्रंप प्रशासन ने भारत को रूस से तेल आयात करने की अस्थायी छूट दी है. इसी का फायदा उठाते हुए भारतीय रिफाइनरियों ने रूस से फिर से भारी मात्रा में तेल खरीदना शुरू कर दिया है. रूसी बयान के मुताबिक, उनकी कंपनियां भारतीय बाजार की हर मांग को पूरा करने में सक्षम हैं.

खाद और व्यापार पर भी चर्चा

सिर्फ तेल ही नहीं रूस ने भारत को उर्वरकों (Fertilizers) की सप्लाई भी बढ़ाई है. 2025 के अंत तक इसमें 40% का इजाफा देखा गया है. दोनों देशों के बीच लक्ष्य है कि साल 2030 तक आपसी व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाया जाए. दिसंबर 2025 में जब पुतिन भारत आए थे, तब पीएम मोदी के साथ मिलकर इस रोडमैप को तैयार किया गया था.

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