आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर मचे घमासान के बीच अब वरिष्ठ नेता और दिल्ली सरकार के मंत्री सौरभ भारद्वाज का बड़ा बयान सामने आया है. सौरभ भारद्वाज ने अपनी ही पार्टी के सांसद राघव चड्ढा को आड़े हाथों लेते हुए उन पर 'डर की राजनीति' करने और गंभीर मुद्दों से कन्नी काटने का आरोप लगाया है.
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"जो डर गया समझो मर गया"
सौरभ भारद्वाज ने एक वीडियो संदेश के जरिए राघव चड्ढा को संबोधित करते हुए कहा कि हम सभी अरविंद केजरीवाल के सिपाही हैं और हमने यही सीखा है कि जो डर गया समझो मर गया. उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ समय से राघव चड्ढा सदन में सरकार की आंखों में आंखें डालकर सवाल पूछने से कतरा रहे हैं. सौरभ ने कहा कि जब विपक्ष के नेता महत्वपूर्ण मुद्दों पर वॉकआउट करते हैं, तब राघव चड्ढा उसमें शामिल नहीं होते.
गंभीर मुद्दों पर चुप्पी पर उठाए सवाल
सौरभ भारद्वाज ने राघव चड्ढा की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े किए:
सॉफ्ट पीआर बनाम असली मुद्दे: सौरभ ने कहा कि पार्लियामेंट में एक छोटी पार्टी के पास बहुत कम समय होता है. ऐसे में 'समोसों' जैसे सॉफ्ट पीआर वाले मुद्दों के बजाय देश के बड़े मुद्दों को उठाना जरूरी है.
विपक्ष का साथ न देना: उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी पार्टियों ने जब मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को इंपीच करने के लिए मोशन लाना चाहा, तो राघव ने उस पर साइन करने से मना कर दिया.
नेतृत्व की गिरफ्तारी पर खामोशी: सौरभ ने याद दिलाया कि जब मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को 'झूठे' मुकदमे में गिरफ्तार किया गया था, तब राघव चड्ढा देश में नहीं थे और कहीं जाकर 'छिप' गए थे.
पंजाब और गुजरात के कार्यकर्ताओं की अनदेखी
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि राघव चड्ढा जिस पंजाब से चुनकर आते हैं, वहां के मुद्दे उठाने से भी वे घबराते हैं. साथ ही गुजरात में पार्टी के 160 कार्यकर्ताओं पर दर्ज हुई एफआईआर और गिरफ्तारियों पर भी राघव की चुप्पी को सौरभ ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया.
बीजेपी के 'सपोर्ट' पर तंज
सौरभ भारद्वाज ने बेहद तल्ख अंदाज में कहा कि बीजेपी सोशल मीडिया पर राघव चड्ढा को सपोर्ट कर रही है, जो इस बात का संकेत है कि उनके 'सॉफ्ट मुद्दों' से सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता. उन्होंने राघव को आत्मचिंतन करने की सलाह देते हुए कहा कि उन्हें यह देखना चाहिए कि वे कहां से चले थे और आज कहां आ गए हैं.
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