Maharashtra Politics: संसद में पास होगा परिसीमन बिल? शरद पवार ने बढ़ाई विपक्ष की धड़कनें

साहिल जोशी

• 12:46 PM • 15 Jul 2026

शरद पवार की पार्टी NCP (SP) विपक्षी एकजुटता को छोड़कर संसद में आगामी परिसीमन (Delimitation) बिल का समर्थन कर सकती है. इस बिल के पास होने से लोकसभा की सीटें बढ़कर 850 हो सकती हैं. अप्रैल में विपक्ष के विरोध के कारण यह बिल संसद में गिर गया था, लेकिन अब पवार के समर्थन से यह पास हो सकता है.

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देश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है. विपक्षी खेमे की सबसे मजबूत पार्टियों में से एक, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) यानी NCP (SP) ने आगामी परिसीमन (Delimitation) बिल को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला फैसला किया है. सूत्रों के हवाले से खबर है कि दिग्गज नेता शरद पवार की पार्टी संसद में इस बिल का समर्थन करने की तैयारी में है. शरद पवार के इस कदम को विपक्षी एकजुटता के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है.

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महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक सियासी हलचल

पार्टी के इस संभावित फैसले ने महाराष्ट्र के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति में भी हलचल तेज कर दी है. हालांकि, अभी तक NCP (SP) की तरफ से कोई भी आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन सियासी गलियारों में कयासों का दौर शुरू हो गया है. जानकार इसे शरद पवार की एक सोची-समझी रणनीति मान रहे हैं, वहीं कुछ इसे केंद्र सरकार के प्रति पार्टी के सकारात्मक रुख के तौर पर भी देख रहे हैं.

क्या है परिसीमन बिल और क्यों बदलेगी सीटों की संख्या?

डिलिमिटेशन बिल का मुख्य उद्देश्य देश में लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं को दोबारा तय करना है. यह पूरी प्रक्रिया नई जनगणना के आंकड़ों पर आधारित होगी. फिलहाल देश में सीटों की संख्या 1971 की जनगणना के मुताबिक तय है. सरकार का तर्क है कि बीते सालों में आबादी और हालात काफी बदल चुके हैं, इसलिए सीटों का नया बंटवारा जरूरी है.

इस बिल के पास होने से संविधान के कुछ नियमों में बदलाव होगा. अप्रैल में सामने आए मसौदे के मुताबिक, कानून बनने के बाद लोकसभा में सदस्यों की संख्या बढ़कर 815 हो सकती है. इसके अलावा, केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटें रिजर्व की जा सकती हैं. यानी संसद के निचले सदन (लोकसभा) में कुल सीटों की संख्या 850 तक पहुंच सकती है. इसके लिए एक परिसीमन आयोग का गठन किया जाएगा, जो जनसंख्या के संतुलन के हिसाब से नए चुनावी क्षेत्र तय करेगा.

अप्रैल में गिर गया था यह विधेयक

बता दें इसी साल अप्रैल में जब सरकार ने संसद के विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़ा यह संविधान संशोधन विधेयक पेश किया था, तब विपक्ष ने एकजुट होकर इसका विरोध किया था. उस समय वोटिंग के दौरान सदन में 528 सांसद मौजूद थे, जिनमें से बिल के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े थे. बिल को पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 352 वोटों की जरूरत थी, जिससे सरकार 54 वोट से पीछे रह गई थी और बिल गिर गया था. तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि आंकड़ों की कमी का मतलब हार नहीं है, आगे और भी मौके आएंगे. अब शरद पवार के इस बदले रुख के बाद सरकार के लिए यह राह आसान होती दिख रही है.