सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: 20-25 जुलाई के प्रदर्शनों से जुड़ी सभी FIR रद्द, इधर CJP ने 5 सितंबर को होने वाले मार्च पर भी लिया अहम फैसला

न्यूज तक डेस्क

01 Sep 2026 (अपडेटेड: Sep 1 2026 5:36 PM)

सुप्रीम कोर्ट ने 20-25 जुलाई के प्रदर्शनों से दर्ज सभी FIR रद्द कर दी हैं. पढ़ें सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद CJP प्रवक्ता सौरव दास और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्‌डा के बयानों पर पूरी रिपोर्ट.

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फाइल फोटो: इंडिया टुडे.
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CJP Protest Fir news: देशभर में 20 से 25 जुलाई के बीच हुए विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा और ऐतिहासिक निर्णय लिया है. सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 142 (Article 142) के तहत अपनी विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर (FIR) को निरस्त कर दिया है. इसके साथ ही, शीर्ष अदालत ने पांच राज्यों द्वारा एफआईआर रद्द करने के लिए दायर की गई याचिकाओं को भी स्वीकार कर लिया है.

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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नीट 2026 (NEET 2026) से जुड़ी आत्महत्याओं के पीड़ित परिवारों को 90 दिनों (तीन महीने) के भीतर मुआवजा देने और पूरे देश के लिए एक स्थायी मुआवजा ढांचा तैयार करने का कड़ा निर्देश जारी किया है. इधर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद काक्रोच जनता पार्टी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए 5 सितंबर को होने वाले मार्च को भी रद्द करने की सूचना दी है. मामले पर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्‌डा ने कहा कि छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए, हमने भारत सरकार की ओर से भरोसा दिलाया था कि विरोध कर रहे छात्रों के खिलाफ दर्ज केस वापस ले लिए जाएंगे और भविष्य में उनके खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाएगी. 

देशभर में FIR रद्द, जांच भी जारी नहीं रहेगी 

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि 20 से 25 जुलाई के बीच घटित समान घटनाओं को लेकर देश के किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में दर्ज एफआईआर पर अब न तो कोई आगे की कानूनी कार्रवाई होगी और न ही कोई जांच जारी रहेगी. ऐसी सभी प्राथमिकियों को कानूनी रूप से बंद माना जाएगा. 

इस छूट से 2,873 संदिग्ध बाहर

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार को 2,873 संदिग्ध व्यक्तियों के खिलाफ नई एफआईआर दर्ज करने की छूट प्रदान की है, जिनका उल्लेख अदालत में पेश किए गए आवेदन में किया गया था. कोर्ट के अनुसार, यदि जांच में इन व्यक्तियों की किसी दो गंभीर अपराधों में संलिप्तता पाई जाती है, तो उनके खिलाफ नई प्राथमिकियां दर्ज की जा सकेंगी. 

कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि इन 2,873 लोगों के खिलाफ दर्ज होने वाली किसी भी नई एफआईआर से उनके कानूनी अधिकारों का हनन नहीं होगा. वे कानून के दायरे में उपलब्ध राहत और बचाव के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र होंगे. 

NEET 2026 पीड़ितों को 3 महीने में मुआवजा  

प्रदर्शनों से निपटने के अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने पीड़ित परिवारों को राहत देने के लिए एक देशव्यापी मुआवजा व्यवस्था (Compensation Framework) तैयार करने का आदेश दिया है. इसके तहत  केंद्र सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ विचार-विमर्श करके मुआवजे का एक पक्का ढांचा तैयार करेगी, जिसे भविष्य में नियमित व्यवस्था के रूप में लागू किया जाएगा. 

NEET 2026 से जुड़ी आत्महत्या के मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि पीड़ित परिवारों को तीन महीने (90 दिन) के भीतर सम्मानजनक मुआवजा राशि प्रदान की जाए. 

CJP प्रवक्ता सौरव दास बोले- गंभीर अपराध करने वालों पर चले मुकदमा

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने खुशी जताते हुए अदालत का आभार व्यक्त किया. दिल्ली पुलिस की उस आशंका पर, जिसमें फेशियल रिकग्निशन तकनीक (FRT) के जरिए प्रदर्शन स्थल पर करीब 2,800 कथित असामाजिक या कुख्यात तत्वों की मौजूदगी की बात कही गई थी, सौरव दास ने कहा- 

हमने बातचीत के दौरान सरकार के सामने यह सवाल उठाया कि अगर वहां 2,800 कुख्यात अपराधी मौजूद थे, तो वे समाज में खुलेआम क्यों घूम रहे थे? दूसरी बात, अगर उन्होंने विरोध स्थल पर बलात्कार, हत्या या कोई अन्य गंभीर अपराध किया है, तो उन पर निश्चित रूप से जांच होनी चाहिए, मुकदमा चलना चाहिए और उन्हें जेल भेजा जाना चाहिए. इसके जवाब में ही सुप्रीम कोर्ट ने इन चिह्नित 2,800 लोगों के लिए अलग से नई FIR दर्ज कर जांच करने का आदेश दिया है. वह मुद्दा अब पूरी तरह सुलझ गया है. 


मुआवजे पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि CJP ने सरकार से आग्रह किया था कि पीड़ित परिवारों के बैंक खातों में 90 दिनों के भीतर सीधे मुआवजे की राशि जमा की जाए. सरकार ने अदालत में यह आश्वासन दिया, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार करते हुए अपने आदेश में शामिल किया है. 

"छात्रों के भविष्य के लिए केस वापस ले रही सरकार"- जेपी नड्‌डा

फैसले के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि सरकार युवाओं और छात्रों के विकास को लेकर प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा- 

छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए, भारत सरकार ने यह भरोसा दिया था कि विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ दर्ज केस वापस लिए जाएंगे और भविष्य में उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी. इसी क्रम में हमने भारतीय जनता पार्टी शासित राज्य सरकारों से चर्चा की और अब अपने उस वादे को पूरा कर रहे हैं."

उन्होंने CJP द्वारा 5 सितंबर को प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन (मार्च) को रद्द करने के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि देश के युवाओं की तरक्की और उनका विकास ही केंद्र सरकार की सबसे पहली प्राथमिकता है. 

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