CM बन अपने वफादारों को नहीं भूले थलापति विजय, कौन हैं वेंकट नारायण, थलापति विजय से दोस्ती को लगी बुरी नजर?

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने अभिनेता थलापति विजय द्वारा अपने फिल्म फाइनेंसर के. वेंकट नारायण और निजी ज्योतिषी को बड़े सरकारी पदों पर नियुक्त करने से भारी राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है.

वेंकट नारायण
वेंकट नारायण

रूपक प्रियदर्शी

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थलापति विजय जिन्होंने एक्टर बनने के लिए कभी पढ़ाई बीच में छोड़ दी थी वो आज चुनाव जीतकर इस काबिल बना कि सीएम की हैसियत से दिग्गज आईएएस, आईपीएस अफसरों की मीटिंग ले रहा है. विजय के लिए खुद ये सब बड़ा रोमांचित करने वाला होगा. पर्दें पर उन्होंने ऐसी कई सारी फिल्में की जिसमें उन्होंने पुलिस अफसर का किरदार निभाया. ऐसे ही रोल से विजय का स्टारडम इतना बढ़ा कि वो थलापति कहलाने लगे.

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सिनेमाई पर्दे पर दुश्मनों के छक्के छुड़ाने वाले सुपरस्टार थलापति विजय  जब असल जिंदगी में तमिलनाडु के सीएम बने, तो किसी ने नहीं सोचा था कि उनके शुरुआती फैसले फिल्मी स्क्रिप्ट से भी ज्यादा सस्पेंस और विवादों से घिरे होंगे. सीएम का चार्ज लेते विजय ने दो बेहद चौंकाने वाली नियुक्तियां कीं. पहली अपने प्राइवेट ज्योतिषी रिकी राधन पंडित को सीएम ऑफिस का ओएसडी बनाया. दूसरी नियुक्ति फिल्म प्रोड्यूसर के. वेंकट नारायण को दिल्ली में तमिलनाडु सरकार का स्पेशनल रिप्रजेंटेटिव बनाकर की विवाद के कारण ज्योतिषी राधन पंडित का पद 24 घंटे में चला गया. पता नहीं वेंकट नारायण टिक जाएंगे या उनका भी हाल होगा. विजय की तारीफ इसलिए हो सकती है कि फिल्म लाइन छोड़ने और राजनीति में इतने बड़े मुकाम पर पहुंचने के बाद भी अपने लोगों को भुले नहीं.

कहानी शुरू होती है थलापति विजय के करियर की आखिरी और सबसे महत्वाकांक्षी फिल्म 'जन नायकन से. विजय ने राजनीति में पूरी तरह उतरने से पहले इस फिल्म को अपने फैंस के लिए विदाई तोहफा माना था. लेकिन सेंसर बोर्ड के साथ 'धार्मिक भावनाओं' और 'सेना के चित्रण' को लेकर ऐसा कानूनी विवाद छिड़ा कि फिल्म की रिलीज ही अटक गई. हद तो तब हो गई जब रिलीज से पहले ही फिल्म का प्रिंट ऑनलाइन लीक हो गया, जिससे करोड़ों का नुकसान हुआ. इस घाटे और विवाद के बीच फिल्म के निर्माता, बेंगलुरु के बड़े बिजनेसमैन और KVN प्रोडक्शंस के चेयरमैन के. वेंकट नारायण विजय के सबसे बड़े संकटमोचक बनकर उभरे.

फिल्म भले ही सिनेमाघरों का मुंह नहीं देख पाई, लेकिन जैसे ही विजय तमिलनाडु की सत्ता पर काबिज हुए, उन्होंने अपने इस संकटमोचक प्रोड्यूसर की वफादारी का कर्ज चुकाया. सीएम विजय ने सीधे वेंकट नारायण को नई दिल्ली में तमिलनाडु सरकार का 'विशेष प्रतिनिधि' नियुक्त कर दिया, जिसे कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त होता है. विवाद ये खड़ा हो गया कि जिस व्यक्ति को तमिलनाडु की जमीनी राजनीति, संस्कृति और तमिल भाषा का अनुभव ही नहीं है, जो मूल रूप से कर्नाटक का बिजनेसमैन, उसे दिल्ली में राज्य का सबसे बड़ा चेहरा क्यों बनाया गया? BJP-DMK ने इसे रेवड़ी कल्चर और 
हितों का टकराव करार देकर सीएम विजय को घेरा है. 

कौन हैं के. वेंकट नारायण

के. वेंकट नारायण को केवल फिल्म प्रोड्यूसर के तौर पर जज करने से नियुक्ति पर सवाल उठने के ज्यादा मौके बनते हैं लेकिन उनकी प्रोफाइल कुछ और कहानी कहती है. फिल्म प्रोड्यूसर बनने से पहले के वेंकट नारायण किस्म-किस्म के घाट पर गए. चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं, कंपनी सेक्रेटरी हैं और लॉ ग्रेजुएट भी हैं. फिल्म प्रोड्यूसर बनने से पहले देश की बड़ी रियल एस्टेट कंपनी 'प्रिस्टीज ग्रुप के सीईओ रहे. इतना सब करने के बाद सब साइड में रखकर 2020 में उन्होंने केवीएन प्रोडक्शंस नाम की कंपनी शुरू की फिल्में बनाने के लिए. 5-6 साल में केवीएन प्रोडक्शंस साउथ सिनेमा का लीडिंग फिल्म स्टूडियो बन चुका है. अभी तक 5-6 फिल्में ही बनाई हैं वो भी विजय और यश जैसे स्टार्स के साथ.  केवीएन प्रोडक्शंस सिर्फ फिल्में बनाता ही नहीं, बल्कि भारत की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों को कर्नाटक के बाजार में रिलीज (डिस्ट्रीब्यूट) करने के लिए भी जाना जाता है.  राम चरण और जूनियर एनटीआर की RRR, रणबीर कपूर की एनिमल, जूनियर एनटीआर की देवरा, प्रभास और अमिताभ बच्चन की कल्कि  का डिस्ट्रीब्यूशन संभाला.

कहानी में असली ट्विस्ट तब आया जब 'जन नायगन' के इस विवाद के साथ ही विजय के निजी ज्योतिषी रिकी राधन पंडित वेत्रि्वेल का नाम भी सरकारी गलियारों में गूंजने लगा. मुख्यमंत्री विजय ने अपने इस पसंदीदा ज्योतिषी को CMO में OSD जैसे बेहद बड़े पद पर नियुक्त किया था. इस फैसले ने आग में घी का काम किया. तमिलनाडु, जो हमेशा से 'पेरियार' की तर्कवादी और वैज्ञानिक सोच (Rationalism) की राजनीति के लिए जाना जाता है, वहां एक ज्योतिषी को सरकारी पेरोल पर रखना विपक्ष ही नहीं, बल्कि विजय की अपनी सहयोगी पार्टियों  को भी नागवार गुजरा. नतीजा यह हुआ कि फ्लोर टेस्ट के तुरंत बाद, भारी दबाव में सीएम विजय को महज 24 से 48 घंटे के भीतर अपने ज्योतिषी की नियुक्ति का आदेश रद्द (Revoke) करना पड़ा.

केवीएन प्रोडक्शंस के फाउंडर हैं 

के. वेंकट नारायण कर्नाटक के रहने वाले हैं. बेंगलुरु के बड़े रियल एस्टेट टायकून माने जाते हैं. केवीएन प्रोडक्शंस के फाउंडर हैं जिसने विजय की आखिरी विवादित फिल्म जननायकन प्रोड्यूस की. विजय और वेंकट नारायण का रिश्ता महज एक मुख्यमंत्री और बिजनेसमैन का नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरा व्यावसायिक और व्यक्तिगत पास्ट रहा है. जब विजय ने अपने फिल्मी करियर को अलविदा कहकर पूर्णकालिक राजनीति में आने का फैसला किया, तब उनकी आखिरी विदाई फिल्म 'जन नायगन' (Jana Nayagan) को बनाने का सबसे बड़ा जिम्मा वेंकट नारायण ने ही उठाया था. यह फिल्म केवीएन प्रोडक्शंस के लिए तमिल सिनेमा का सबसे बड़ा और बेहद खर्चीला प्रोजेक्ट थी。

जैसे ही एक कॉर्पोरेट फिल्म प्रोड्यूसर को इतना बड़ा प्रशासनिक पद मिला, विपक्षी खेमा भड़क उठा. बीजेपी और डीएमके का सबसे बड़ा हमला यह था कि वेंकट नारायण मूल रूप से कर्नाटक (बेंगलुरु) के रहने वाले हैं. विपक्ष ने सवाल उठाया कि जिसे तमिल भाषा, वहां की संस्कृति और प्रशासनिक पेचीदगियों का जमीनी अनुभव नहीं है, उसे दिल्ली में तमिलनाडु का चेहरा कैसे बनाया जा सकता है? आलोचकों ने इसे सीधे तौर पर 'हितों का टकराव' (Conflict of Interest) और अपनी आखिरी फिल्म के फाइनेंसर को जनता के पैसे से उपकृत करने का गंभीर आरोप माना.

आज की तारीख में कहानी का क्लाइमेक्स यह है कि जहाँ थलपति विजय की आखिरी फिल्म 'जन नायगन' सेंसर और पायरेसी के चक्रव्यूह में फंसी है, वहीं उनकी सरकार 'अपनों पर मेहरबानी' और 'अंधविश्वास के आरोपों' के राजनीतिक चक्रव्यूह में घिर चुकी है. देखना होगा कि के वेंकट नारायण कब तक पद पर बने रह पाएंगे.

ये तस्वीर किसी को भी चौंका सकती है. थलापति विजय जिन्होंने एक्टर बनने के लिए कभी पढ़ाई बीच में छोड़ दी थी वो आज चुनाव जीतकर इस काबिल बना कि सीएम की हैसियत से दिग्गज आईएएस, आईपीएस अफसरों की मीटिंग ले रहा है. विजय के लिए खुद ये सब बड़ा रोमांचित करने वाला होगा. पर्दें पर उन्होंने ऐसी कई सारी फिल्में की जिसमें उन्होंने पुलिस अफसर का किरदार निभाया. ऐसे ही रोल से विजय का स्टारडम इतना बढ़ा कि वो थलापति कहलाने लगे.

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