50 साल की उम्र पार करने वाले थलापति विजय राजनीति में आए लेकिन ये इत्तेफाक नहीं था. अब सब जान रहे हैं कि बहुत कुछ पहले ऐसा हुआ जो विजय को राजनीति की ओर धकेलते. इत्तेफाक तो वो थे जो उनकी फिल्मों में हुए. 2005 में विजय की आसिन के साथ फिल्म आई थी शिवकाशी. फिल्म पॉलिटिकल थी. उस फिल्म में विजय हीरो थे और उनकी मां शोभा चंद्रशेखर प्ले बैक सिंगर. उन्होंने बेटे के लिए जो गाना गया वही इत्तेफाक बनकर विजय की लाइफ में हकीकत बन गया.
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तमिल गाने का भाव था-अगर ठान लें, तो कल तुम भी CM बन सकते हो. मां का गाया वो गाना केवल गाना नहीं, लोरी जैसा था. 21 साल बाद 2026 में, जब विजय की राजनीतिक पार्टी (TVK) ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत दर्ज की, तो वही लाइन विजय की हकीकत बन गई. विजय तमिलनाडु के सीएम बनने के बिलकुल पास खड़े हैं. बेटे की जीत के बाद मां शोभा ने भावुक होकर वही लाइनें गाकर भी बेटे की जीत का जश्न बनाया और पहली सीटी बजाकर भी.
बेटे की जीत पर मां के पास बोलने को शब्द नहीं थी
विजय की जीत के बाद टीवी का कैमरा मां शोभा के सामने था. 47 सेकंड तक माइक लेकर रिपोर्टर मां के रिएक्शन का इंतजार करता रहा. मां इतना ही बोल पाई मैं बहुत खुश हूं. मां और कुछ बोल नहीं पाईं तो पिता चंद्रशेखर ने माइक संभाल लिया. जीतने के बाद विजय पहली बार घर आए तो मां थाली लेकर इंतजार कर रही थी बेटे के विजय तिलक के लिए. सोशल मीडिया पर खूब वायरल है बेटे की जीत पर मां का इमोशनल एक्शन-रिएक्शन.
जीत पक्की होने के बाद जब विजय घर पहुंचे, तो मां के पैर छुए. गले लगाते हुए मां-बेटे के बीच कानाफूसी हुई. मीडिया रिपोर्ट्स और पारिवारिक सूत्रों के दावे के मुताबिक मां विजय से वही बात दोहराई जो उन्होंने 20 साल पहले फिल्म शिवकाशी के एक गाने में गाई थी- तुमने कर दिखाया, अब तुम लोगों के सेवक हो.
सिर्फ मां ही नहीं, विजय की रह चुकी है क्राइसिस मैनेजर
थलापति विजय की सफलता के पीछे उनकी मां शोभा चंद्रशेखर ने केवल मां बनकर नहीं, गाइड, फिलॉसफर, फैन और क्राइसिस मैनेजर बनकर वो करने की कोशिश की जो विजय के सही है. परिवार को शुरू-शुरु में बड़ा झटका लगा जब विजय की छोटी बहन विद्या की मौत हो गई. चहकने वाले विजय बहन की मौत को आज तक भूला नहीं पाए. बेटी को खोने का गम पिता एस ए चंद्रशेखर और मां शोभा चंद्रशेखर को भी था लेकिन बेटे की हालत ने उन्हें अपना दुख भूलने पर मजबूर किया. सिंगर रहीं शोभा ने विजय को आर्ट का रास्ता दिखाया खुद को मजबूत बनाने का. वहीं से उस विजय की नींव पड़ी जो आज थलापति बनकर तमिलनाडु पर राज करने के लिए तैयार है.
विजय की लाइफ में हमेशा सब कूल नहीं रहा. पत्नी से विवाद, पिता के साथ केस मुकदमा और बीच में फंसी एक मां. विजय ने पुल बनकर परिवार को बिखरने से बचाया. थोड़ी कामयाबी, थोड़ी कसर रह गई. जहां कसर रह गई वो है विजय का बिखरा हुआ परिवार. शोभा के घर श्रीलंका की संगीता बहू बनकर आई. सास ने बेटी बना लिया. जब 27 साल के साथ के बाद संगीता ने विजय से तलाक मांगा तब शोभा ने संगीता के खिलाफ कोई नफरत नहीं दिखाई. अच्छी दोस्त बताते हुए संगीता की तारीफ में टिपिकल हाउसवाइफ कहा जो घर और बच्चों को बहुत सादगी और प्यार से संभालती हैं.
तृषा को लेकर नहीं दिखाई कड़वाहट
जब विजय की लाइफ में तृषा को लेकर बातें बनने लगीं तब उन्होंने बहू संगीता की साइड तो नहीं ली लेकिन तृषा को लेकर कोई कड़वाहट भी नहीं दिखाई. शोभा ने चर्चाओं को 'फिल्मी गॉसिप' से ज्यादा अहमियत नहीं दी. बार-बार दोहराया कि विजय की फैमिली में सब ठीक है. संगीता बच्चों की पढ़ाई के लिए लंदन गई है. शोभा खुद फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा रही हैं, इसलिए वे ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री और ऑफ-स्क्रीन अफवाहों के फर्क को अच्छी तरह समझती हैं. उन्होंने कभी भी तृषा के खिलाफ कोई कड़वा बयान नहीं दिया, लेकिन उन्होंने हमेशा यह सुनिश्चित किया कि विजय की इमेज फैमिली मैन की बनी रहे.
थलपति विजय आज स्टार एक्टर से स्टार पॉलिटिशियन बने हैं तो जितनी चर्चा पिता एस ए चंद्रशेखर की लंबी प्लानिंग की हो रही है, उतनी ही चर्चा मां की परवरिश की भी. पिता कहते हैं कि शोभा विजय की पहली और सबसे बड़ी फैन हैं. विजय की लाइफ में उन्होंने वर्सटाइल रोल प्ले किया. मां बनकर, सिंगर बनकर, राइटर, प्रोड्यूसर बनकर.
पिता ईसाई, मां तमिल हिंदू
विजय की फैमिली इंटर रिलीजन है. पिता एस ए चंद्रशेखर ईसाई हैं और शोभा तमिल हिंदू. जब प्यार हुआ तो धर्म की दीवारें ध्वस्त हो गईं. ये एक ऐसी प्रेम कहानी है जिसने न केवल धर्म की दीवारों को तोड़ा, बल्कि एक अटूट साझेदारी की नींव भी रखी. चंद्रशेखर और शोभा की मुलाकात उस समय हुई जब SAC एक स्ट्रगलिंग असिस्टेंट डायरेक्टर थे. चंद्रशेखर ने एक इंटरव्यू में बताया कि वे शोभा को पसंद करते थे और लगभग 5 साल तक अपनी खिड़की से उन्हें स्कूल जाते और लौटते हुए देखते थे. जब शादी की बात आई, तो शोभा के पिता को चंद्रशेखर के भविष्य को लेकर संदेह था क्योंकि वे तब एक स्थापित निर्देशक नहीं थे. हालांकि, शोभा को उनके टैलेंट पर पूरा भरोसा था और उन्होंने उन्हीं से शादी करने की ज़िद की.
शादी 24 अप्रैल 1973 को हुई. चंद्रशेखर ईसाई हैं और शोभा हिंदू, इसलिए उन्होंने आपसी सम्मान के साथ जीवन शुरू किया. दिलचस्प बात यह है कि जब विजय लगभग 6 साल के थे, तब शोभा की इच्छा पर इस जोड़े ने चर्च में दोबारा शादी की ताकि चंद्रशेखर के विश्वास का भी सम्मान किया जा सके. शादी के बाद शोभा केवल पत्नी नहीं रहीं, बल्कि चंद्रशेखर की सबसे बड़ी ताकत बनीं. उन्होंने चंद्रशेखर की कई सुपरहिट फिल्मों (जैसे विजयकांत की 'सत्तम ओरु इरुत्तरई') की कहानियाँ लिखीं, जो पहले कई निर्माताओं द्वारा ठुकराई जा चुकी थीं. इसी साल अप्रैल 2026 में इस जोड़े ने अपनी 53वीं शादी की सालगिरह मनाई. आज भी चंद्रशेखर अपनी हर सफलता का श्रेय शोभा के अटूट विश्वास को देते हैं, जिन्होंने तब उनका साथ दिया जब उनके पास कुछ नहीं था.
मां के हिंदू होने का पूरा सम्मान
विजय पिता के धर्म के आधार पर ईसाई विजय जोसेफ चंद्रशेखर बने लेकिन मां के हिंदू होने का पूरा सम्मान किया. विजय जब सक्षम हुए तो उन्होंने मां और उनकी धार्मिक श्रद्धा का सम्मान करते हुए चेन्नई में साईं बाबा का मंदिर बनवाया. शोभा चंद्रशेखर भगवान साईं बाबा की परम भक्त हैं. विजय ने अपनी माँ की इस आस्था का सम्मान करते हुए चेन्नई के कोरात्तूर में भव्य मंदिर का निर्माण करवाया. विजय ने न केवल इसके लिए फंडिंग की, बल्कि इसके निर्माण के हर छोटे-बड़े काम की व्यक्तिगत रूप से देखरेख भी की ताकि उनकी मां को खुशी मिल सके.
विजय की कहानी सिर्फ फिल्मी पर्दे की चकाचौंध तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें एक ऐसे घर में हैं जहाँ दो संस्कृतियां और दो धर्म एक साथ धड़कते हैं. पिता एस.ए. चंद्रशेखर कैथोलिक ईसाई, तो माँ शोभा चंद्रशेखर धार्मिक हिंदू. विजय का बचपन ईसा मसीह की प्रार्थनाओं और मां के गाए भजनों के बीच बीता. यही वजह है कि आज राजनीति के मैदान में भी विजय 'सेक्युलरिज्म' का सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरे हैं. उनके जीवन में धर्म कभी दीवार नहीं बना, बल्कि वह सेतु बना जिसने उन्हें हर वर्ग के तमिल मानस से जोड़ दिया. वो मंदिर भी गए और घुटने के बल चर्च भी. विरोधियों ने अक्सर उनके ईसाई नाम 'जोसेफ विजय' को लेकर निशाना साधा है, लेकिन विजय ने इसे ताकत बना लिया. मां का हिंदू होना और पिता का ईसाई होना उन्हें तमिलनाडु के हर समुदाय से जुड़ने में मदद करता है.
विजय मुझे अपने पहले बेटे जैसा करता है प्यार
विजय की जीत के बाद शोभा चंद्रशेखर ने दिल छू लेने वाली बात कही. कहा मैं विजय की मां तो हूं ही, लेकिन विजय मुझे अपने पहले बेटे की तरह प्यार करता है. इसका मतलब विजय ने अपने स्टारडम के बीच भी बेटे का फर्ज निभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी.
शोभा चंद्रशेखर विजय की मां के तौर पर देश में चर्चित हुई हैं लेकिन तमिलनाडु में उनकी खुद की एक बड़ी शख्सियत हैं. शोभा चंद्रशेखर की बहुत सीमित शुरूआती जिंदगी की जानकारी है. हिंदू परिवार में जन्मी शोभा का परिवार आर्ट एंड कल्चर से जुड़ा रहा. भाई एस.एन. सुरेंद्र तमिल सिनेमा के बड़े डबिंग आर्टिस्ट और सिंगर रहे. परवरिश संगीत के माहौल में ही हुई तो शोभा सिंगिंग की दुनिया में आगे बढ़ती गईं. कर्नाटक संगीत सीखा. वीणा वादन भी सीखा. फिल्मों में पहला ब्रेक शादी से बहुत पहले मिल गया. फिल्म 'इरु मलारगल' में अपना पहला गाना "महाराजा ओरु महारानी" रिकॉर्ड किया. फिर तो सिंगिग करियर निकल पड़ा. उसी सिंगिग करियर के दौरान चंद्रशेखर जिंदगी में आए जो फिल्म मेकिंग में करियर बना रहे थे.
12 फिल्मों की प्लेबैक सिंगिग
उन्होंने लगभग 12 फिल्मों में प्लेबैक सिंगिंग की. लाइव शोज करती हैं, एलबम बनाए. पति एस.ए. चंद्रशेखर की फिल्मों के लिए 50 से ज्यादा कहानियां लिखीं. 10 फिल्में भी बनाई जिसमें नंबरगल और इन्नीसाई मजहै को खुद डायरेक्टर किया. इन फिल्मों में उनके पति असिस्टेंट के रोल में रहे.
मां और गाइड बनकर शोभा ने विजय को जिंदगी का रास्ता तो दिखाया लेकिन बस कसर रह गई. जब 27 साल की शादीशुदा जिंदगी के बाद विजय और उनकी पत्नी संगीता सोर्नालिंगम का रिश्ता टूटने लगा तब वो कुछ नहीं कर पाईं. हालांकि बहुत अरसे तक उन्होंने कोशिश की कि घर का मामला बाहर न निकले लेकिन जो होना था वो हो चुका. तृषा कृष्णन और विजय के रिश्तों को लेकर उड़ती अफवाहों पर माँ शोभा चंद्रशेखर ने हमेशा मर्यादित स्टैंड लिया.
50 साल की उम्र पार करने वाले थलापति विजय राजनीति में आए लेकिन ये इत्तेफाक नहीं था. अब सब जान रहे हैं कि बहुत कुछ पहले ऐसा हुआ जो विजय को राजनीति की ओर धकेलते. इत्तेफाक तो वो थे जो उनकी फिल्मों में हुए. 2005 में विजय की आसिन के साथ फिल्म आई थी शिवकाशी. फिल्म पॉलिटिकल थी. उस फिल्म में विजय हीरो थे और उनकी मां शोभा चंद्रशेखर प्ले बैक सिंगर. उन्होंने बेटे के लिए जो गाना गया वही इत्तेफाक बनकर विजय की लाइफ में हकीकत बन गया.
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