Thalapathy Vijay and Udhayanidhi Controversy: तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर इतिहास खुद को दोहराता दिख रहा है. कभी एक-दूसरे की फिल्मों पर ताली बजाने वाले और एक ही कॉलेज के गलियारों में साथ घूमने वाले दो जिगरी दोस्त आज एक-दूसरे के कड़े राजनैतिक प्रतिद्वंद्वी बन चुके हैं. मुख्यमंत्री थलपति विजय के आदेश पर विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन की गिरफ्तारी ने राज्य के लोगों को एम. करुणानिधि और जे. जयललिता के उस दौर की याद दिला दी है, जब सत्ता के गलियारों से विरोधियों को सीधे जेल भेजा जाता था. फिल्मों में 'थलापति' बनकर कानून का राज कायम करने वाले विजय ने राजनीति के मैदान में उतरते ही अपना सख्त थलापति अवतार दिखा दिया है.
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विधानसभा में आमने-सामने और राजनीतिक विरासत की जंग
विजय आज तमिलनाडु के सीएम हैं और उदयनिधि स्टालिन विपक्ष के नेता हैं. विधानसभा में दोनों एकदम आमने-सामने बैठते हैं. विजय ऐसे दौर में तमिलनाडु की राजनीति में छाए जब स्टालिन अपने बेटे उदयनिधि स्टालिन को सत्ता और राजनीतिक विरासत सौंपने की तैयारी में थे. विजय की अचानक एंट्री से स्टालिन की उदयनिधि के लॉन्चिंग प्लान को तो पलीता लग गया. हालांकि ये सब जानते हैं कि आने वाले दिनों में तमिलनाडु की राजनीतिक जंग विजय और उदयनिधि के बीच ही होनी है.
गिरफ्तारी की वजह और व्यक्तिगत बयानों का विवाद
उदयनिधि की गिरफ्तारी इसलिए हुई कि उन्होंने विजय की दोस्ती और बड़ी एक्ट्रेस तृषा के खिलाफ आपत्तिजनक डबल मीनिंग भाषण दिए. लेकिन जब गिरफ्तारी हो चुकी तो लोग इससे भी हैरान हैं कि कैसे बचपन के दोस्त, प्रोफेशनल फ्रेंड राजनीति के मैदान में आते ही दुश्मन बन गए. वक्त स्टालिन का गुजर गया. अब वक्त विजय का है. जो चाहें कर सकते हैं. उन्होंने तीन महीने में उदयनिधि की अपनी हैसियत दिखा दी.
कॉलेज के दिनों की शुरुआत और पुरानी यादें
उदयनिधि और विजय की कहानी आज की नहीं है. केवल चुनाव में हार-जीत की भी नहीं. कहानी की शुरुआत सियासी अखाड़े से कतई नहीं, बल्कि चेन्नई के प्रतिष्ठित लॉयला कॉलेज के क्लासरूम से हुई थी. विजय और उदयनिधि स्टालिन दोनों एक ही कॉलेज से पढ़े लेकिन एक क्लास रूम में नहीं. विजय का जन्म 1974 में हुआ था. उन्होंने 1992 के आसपास लोयोला कॉलेज में विजुअल कम्युनिकेशन (Visual Communication) की पढ़ाई के लिए दाखिला लिया था. हालांकि, फिल्मों में व्यस्त होने के कारण उन्होंने अपनी डिग्री पूरी नहीं की और कॉलेज बीच में ही छोड़ दिया था. उदयनिधि का जन्म 1977 में हुआ था यानी विजय से करीब 3 साल छोटे हैं. उन्होंने कुछ साल बाद इसी लोयोला कॉलेज से अपनी विजुअल कम्युनिकेशन की पढ़ाई पूरी की थी.
सदन में जूनियर-सीनियर और राजनीतिक अनुभव की चर्चा
चुनाव के बाद तमिलनाडु विधानसभा का सत्र शुरू हुआ, तो विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने विजय को बधाई देते हुए सदन में इस बात का खुद जिक्र किया था कि भले ही विजय और मैं एक ही कॉलेज से पढ़े हैं, और कॉलेज के दिनों में वे मेरे सीनियर थे, लेकिन जब सरकार चलाने और राजनीति की बात आती है, तो DMK सीनियर बैच है. हम नए शासन को अपना राजनीतिक अनुभव सिखाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.
फिल्मी सफर और रेड जायंट मूवीज का व्यावसायिक रिश्ता
विजय राजनीति में तब उतरे जब उन्होंने 30 साल की लंबी पारी फिल्मों में खेल ली थी. उदयनिधि भी फिल्मों से राजनीति में लाए लेकिन उतने सफल नहीं रहे. उन्होंने हीरो बनकर डेब्यू किया लेकिन जब बात नहीं बनी तो वो फिल्मों के बिजनेस में आ गए. फिल्म प्रोडक्शन, फिल्म डिस्ट्रीब्यूशन में उनकी कंपनी रेड जायंट मूवीज बड़ा ब्रैंड बन गई. इस कंपनी की पहली फिल्म कुरुवी में विजय तृषा ने ही काम किया था. उस समय उदयनिधि सार्वजनिक मंचों पर गर्व से कहते थे, "विजय सिर्फ एक सुपरस्टार नहीं, मेरे बचपन के सबसे पक्के दोस्त हैं।" सालों तक सिनेमाई परदे पर दोनों की यह जुगलबंदी तमिलनाडु के फैंस का दिल जीतती रही.
बॉक्स ऑफिस और फिल्मों के डिस्ट्रीब्यूशन का साथ
फिल्म बनाने के अलावा, उदयनिधि की कंपनी रेड जायंट मूवीज तमिलनाडु की सबसे बड़ी फिल्म डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों में से एक बन गई. विजय की कई बड़ी फिल्मों को पूरे तमिलनाडु के सिनेमाघरों तक पहुंचाने और उन्हें बड़े स्तर पर रिलीज करने का जिम्मा उदयनिधि की कंपनी ने संभाला. 2023 में आई विजय की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'वारिसू' के डिस्ट्रीब्यूशन राइट्स उदयनिधि की कंपनी ने ही खरीदे और फिल्म को प्रमोट किया था.
35 साल पुराना पारिवारिक और दोस्ताना ताना-बाना
विजय और करुणानिधि, एम.के. स्टालिन और उदयनिधि परिवार के रिश्ते कोई अचानक बनी राजनीतिक दुश्मनी नहीं हैं. इसके पीछे 35 साल पुराना एक गहरा पारिवारिक, दोस्ताना और व्यावसायिक ताना-बाना है. राजनीति में आने से पहले ये लोग एक-दूसरे के बेहद करीब थे.
करुणानिधि, स्टालिन और एस.ए. चंद्रशेखर के संबंध
विजय के पिता, मशहूर निर्देशक एस.ए. चंद्रशेखर (SAC) और द्रविड़ सियासत के भीष्म पितामह एम. करुणानिधि के बीच का रिश्ता महज औपचारिक नहीं था. करुणानिधि और उनके बीच 35 सालों का भाईचारे जैसा रिश्ता था. जब विजय फिल्म इंडस्ट्री में कदम रख रहे थे, तो करुणानिधि का हाथ चंद्रशेखर के परिवार पर हमेशा एक रक्षक की तरह था. इस पारिवारिक घनिष्ठता की वजह से युवा एम.के. स्टालिन और एस.ए. चंद्रशेखर के बीच भी गहरा उठना-बैठना था. यही वजह है कि विजय बचपन से ही स्टालिन को 'अंकल' के रूप में जानते थे. विजय कुछ समय के लिए जयललिता के साथ जुड़े थे लेकिन डीएमके के साथ कभी नहीं जुड़े.
2026 चुनाव और थलपति विजय की ऐतिहासिक जीत
विजय की राजनीति में आने के फैसले ने पुरानी घनिष्ठता को एक कड़े मुकाबले में बदल दिया. चुनाव के दौरान विजय ने स्टालिन सरकार पर तीखे हमले किए, लेकिन यह भी एक सच है कि स्टालिन या उदयनिधि ने पूरे चुनाव प्रचार में विजय के खिलाफ कोई व्यक्तिगत अमर्यादित टिप्पणी नहीं की, जो उनके पुराने पारिवारिक सम्मान को दिखाता है. चुनावी नतीजों के बाद, जब विजय मुख्यमंत्री बने और उदयनिधि विपक्ष के नेता तो विधानसभा में दोनों का गले मिलना और पुरानी यादें साझा करना इसी गहरे अतीत की गवाही देता है.
वक्त बदला और दोनों दोस्तों के रास्ते राजनीति की तरफ मुड़ गए. उदयनिधि जहां DMK की विरासत संभाल रहे थे, वहीं थलपति विजय ने अपनी पार्टी 'तमिलगा वेत्री कलगम' (TVK) बनाकर तीसरा मोर्चा खोल दिया. 2026 के ऐतिहासिक विधानसभा चुनाव में विजय की आंधी ने डीएमके के ही किले को ध्वस्त कर दिया. थलपति विजय तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री बने और उदयनिधि स्टालिन को सत्ता गंवानी पड़ी. चुनाव नतीजों के बाद विधानसभा के भीतर भले ही उदयनिधि ने गले मिलकर विजय को बधाई दी, लेकिन परदे के पीछे सत्ता छिनने की कड़वाहट और वर्चस्व की जंग सुलग चुकी थी.
करुणानिधि-जयललिता दौर की याद और 'प्रतिशोध की राजनीति'
आज उदयनिधि स्टालिन की गिरफ्तारी ने तमिलनाडु की राजनीति के सबसे काले पन्नों को पलट दिया है. यह बिल्कुल वैसा ही मंजर है जैसा कभी एम. करुणानिधि और जे. जयललिता के बीच देखा जाता था. साल 2001 का वो दौर कोई नहीं भूल सकता, जब जयललिता सरकार के आदेश पर पुलिस ने आधी रात को पूर्व मुख्यमंत्री करुणानिधि को उनके घर से घसीटते हुए गिरफ्तार किया था. इसके बाद जब करुणानिधि सत्ता में आए, तो उन्होंने भी जयललिता पर मुकदमों की बौछार कर उन्हें जेल की हवा खिलाई थी. आज विजय और उदयनिधि की ये जंग उसी 'प्रतिशोध की राजनीति' (Vendetta Politics) का 2026 का एडिशन है, जहां अब संवाद नहीं, सीधे पुलिसिया कार्रवाई होती है.
विवादित बयान और राष्ट्रीय महिला आयोग का एक्शन
इस दोस्ती के पूरी तरह खाक होने की वजह बने-निजी और तीखे व्यक्तिगत हमले. चुनाव हारने के बाद से ही उदयनिधि लगातार विजय के व्यक्तिगत जीवन और वैवाहिक स्थिति पर तंज कस रहे थे. लेकिन पानी तब सिर से ऊपर चला गया जब तंजावुर की एक रैली में उदयनिधि ने मर्यादा की सारी सीमाएं लांघते हुए तृषा नाम का सहारा लेकर मुख्यमंत्री विजय पर बेहद आपत्तिजनक और द्विअर्थी टिप्पणी कर दी. इसे महिलाओं का अपमान बताते हुए विजय की पार्टी TVK ने राष्ट्रीय महिला आयोग का दरवाजा खटखटाया और चेन्नई पुलिस ने उदयनिधि स्टालिन को उनके घर से उठा लिया.
सिनेमा से लॉकअप तक का नया सियासी मोड़
सिनेमा के सेट से शुरू हुई ये दोस्ती आज पुलिस स्टेशन के लॉकअप तक पहुंच चुकी है. उदयनिधि इसे 'राजनैतिक प्रतिशोध' बता रहे हैं, तो वहीं मुख्यमंत्री विजय की सरकार इसे 'कानून का राज' कह रही है. वजह चाहे जो हो, लेकिन एक बात साफ है-तमिलनाडु की धरती पर द्रविड़ राजनीति का वो दौर लौट आया है जहां सत्ता बदलने पर नेताओं की जगह बदल जाती है. देखना दिलचस्प होगा कि करुणानिधि-जयललिता की तरह शुरू हुई यह नई सियासी दुश्मनी तमिलनाडु को किस मोड़ पर ले जाती है.
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