3 साल...23,865 हादसे... भारत में EV गाड़ियां खरीदना लोगों के लिए बनी काल! सरकारी आंकड़ों से खुली पोल

भारत में पिछले तीन सालों में इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़े 23,865 सड़क हादसे दर्ज हुए हैं, जिनमें कई मामलों में आग लगने की घटनाएं भी सामने आईं. बढ़ते जोखिम को देखते हुए केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय ने बैटरी सेफ्टी और प्रोडक्शन स्टैंडर्ड को सख्त किया है, हालांकि ईवी को बढ़ावा देने की नीति जारी रहेगी.

इलेक्ट्रिक कार
इलेक्ट्रिक कार

न्यूज तक डेस्क

follow google news

देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती पॉपुलारिटी के बीच सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो गई है. ताजा सरकारी आंकड़े बताते हैं कि पिछले तीन सालों में EV आनी इलेक्ट्रिक वेहिकल से जुड़े हजारों सड़क हादसे दर्ज किए गए हैं, जिनमें कई मामलों में आग लगने की घटनाएं भी शामिल हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि भविष्य की सवारी कही जा रही ये गाड़ियां क्या मौजूदा सड़कों पर पूरी तरह सुरक्षित हैं?

Read more!

पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों ने लोगों को इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर तेजी से मोड़ा है. कम खर्च, कम प्रदूषण और सरकारी प्रोत्साहन, इन सब वजहों से ईवी की मांग बढ़ी है. मगर जैसे-जैसे इनकी संख्या बढ़ी, वैसे-वैसे हादसों की खबरें भी सामने आने लगीं. हाल ही में संसद में दी गई जानकारी के मुताबिक, पिछले तीन सालों में देशभर में इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़े 23,865 सड़क हादसे दर्ज किए गए. इनमें 26 मामलों में आग लगने की घटनाएं भी शामिल हैं. यह आंकड़े सड़क दुर्घटनाओं के डिजिटल रिकॉर्ड रखने वाले सरकारी पोर्टल से जुटाए गए हैं जहां नवंबर 2022 से ईवी से जुड़ी जानकारी अलग से दर्ज की जा रही है.

2023 में 5 हजार से ज्यादा हादसे 

अगर साल-दर-साल देखें तो 2023 में 5,594 हादसे हुए, जिनमें 8 बार आग लगी. 2024 में यह संख्या बढ़कर 7,817 हो गई और 9 आग की घटनाएं दर्ज की गईं. वहीं 2025 में हादसों का आंकड़ा 10,454 तक पहुंच गया, जिनमें 9 मामलों में वाहन में आग लगी. यानी साफ है कि ईवी का इस्तेमाल जितना बढ़ रहा है, जोखिम पर चर्चा भी उतनी ही तेज हो रही है.

इसी बीच एक प्रमुख ऑटो कंपनी की इलेक्ट्रिक कार में आग लगने की हालिया घटना ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी. हालांकि हर हादसा तकनीकी खामी से ही जुड़ा हो, यह जरूरी नहीं, लेकिन बैटरी सेफ्टी सबसे बड़ा सवाल बनकर उभरी है.

सरकार ने बनाई जांच टीम 

इन घटनाओं की तह तक जाने के लिए सरकार ने विशेषज्ञों की एक जांच टीम बनाई. इस टीम में रक्षा और वैज्ञानिक संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल किए गए, जिन्होंने बैटरी सिस्टम और अन्य तकनीकी पहलुओं की गहराई से जांच की. जांच के बाद कई अहम सुझाव दिए गए, जिनके आधार पर सुरक्षा नियमों को और सख्त किया गया.

सरकार ने ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड में बदलाव करते हुए सितंबर 2022 में नए तकनीकी नियम जारी किए. इनमें इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल होने वाली ट्रैक्शन बैटरियों के लिए कड़े मानक तय किए गए, जो दिसंबर 2022 से लागू हैं. इसके अलावा कंपनियों के लिए यह सुनिश्चित करना भी अनिवार्य कर दिया गया है कि फैक्ट्री से निकलने वाला हर वाहन तय सुरक्षा मानकों पर खरा उतरे.

सुरक्षा व्यवस्था को बनाया जाएगा मजबूत 

स्पष्ट तौर पर सरकार का रुख ईवी पर रोक लगाने का नहीं है. बल्कि कोशिश यह है कि सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाया जाए, ताकि लोग बिना डर के इस नई तकनीक को अपना सकें. लक्ष्य वही है- प्रदूषण कम करना और पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता घटाना.

इलेक्ट्रिक वाहन भविष्य जरूर हैं, लेकिन हर नई तकनीक की तरह इनके साथ चुनौतियां भी आती हैं. ऐसे में जरूरी है कि जहां एक ओर लोग जागरूक रहें, वहीं कंपनियां और सरकार सुरक्षा को लेकर कोई ढिलाई न बरतें. तभी यह शांत सफर सच में सुरक्षित बन पाएगा.

ये भी पढ़ें: Toyota की पहली इलेक्ट्रिक कार लॉन्च, सिंगल चार्ज में चलेगी 543KM, लुक ऐसी की नजर नहीं हट रही

    follow google news