बंगाल की सियासत में नया मोड़: फ्रीज हुआ पुराना निशान, ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को भेजे 3 नए नाम

न्यूज तक डेस्क

• 02:01 PM • 18 Sep 2026

असली तृणमूल कांग्रेस के विवाद के बीच चुनाव आयोग द्वारा नाम और सिंबल फ्रीज किए जाने के बाद, ममता बनर्जी गुट ने अपने नाम और स्पोर्ट्स थीम से जुड़े तीन नए नामों व दो चुनाव चिह्नों के विकल्प EC को भेजे हैं.

ममता बनर्जी
ममता बनर्जी
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में 'असली तृणमूल कांग्रेस' को लेकर चल रही वर्चस्व की जंग अब एक बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई है. नाम और चुनाव चिह्न (सिंबल) दोनों के इस्तेमाल पर चुनाव आयोग (EC) की अंतरिम रोक के बाद ममता बनर्जी गुट ने अपनी नई पहचान गढ़ने की तैयारी तेज कर दी है. सूत्रों के मुताबिक, ममता बनर्जी खेमे ने चुनाव आयोग को तीन नए नामों की लिस्ट सौंपी है, और इन तीनों ही विकल्पों में खास बात यह है कि 'तृणमूल कांग्रेस' के साथ-साथ 'ममता बनर्जी' का नाम भी शामिल किया गया है.

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पार्टी का मुख्य उद्देश्य अपनी राजनीतिक विरासत को बचाए रखना और मतदाताओं के बीच यह साफ संदेश देना है कि असली नेतृत्व किसके हाथ में है. ममता बनर्जी का नाम सीधे तौर पर पार्टी से जोड़कर यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि चुनाव चिह्न बदलने के बावजूद वोटर्स के मन में नेतृत्व को लेकर कोई भ्रम न रहे.

स्पोर्ट्स थीम से जुड़े सिंबल की मांग

नए चुनाव निशान के मामले में ममता बनर्जी गुट ने इस बार एक नया प्रयोग किया है. आयोग की 'फ्री सिंबल लिस्ट' में से दो नए चुनाव चिह्नों के विकल्प सुझाए गए हैं, और ये दोनों ही 'स्पोर्ट्स' (खेल) थीम पर आधारित हैं. खेल से जुड़े प्रतीकों को प्राथमिकता देने के पीछे का मकसद पार्टी में नई ऊर्जा और युवाओं से जुड़ाव को दर्शाना माना जा रहा है.

कैसे शुरू हुआ यह विवाद?

हालिया विधानसभा चुनावों में पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद तृणमूल कांग्रेस में अंदरूनी कलह सतह पर आ गई थी. पार्टी के मालिकाना हक को लेकर दो अलग-अलग गुट आमने-सामने आ गए और दोनों ने खुद को 'असली टीएमसी' बताते हुए चुनाव आयोग का रुख किया.

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आयोग ने दोनों पक्षों को अपने-अपने दावे और सबूत पेश करने के लिए तीन बार मौका दिया. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, आगामी उपचुनावों की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग ने एक अंतरिम फैसला सुनाया. आयोग ने 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' के नाम और उसके पारंपरिक चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर अगले आदेश तक रोक लगा दी, साथ ही दोनों धड़ों से अपनी नई पहचान के लिए नाम और सिंबल के विकल्प मांगे.

अब गेंद चुनाव आयोग के पाले में है. हर किसी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आयोग ममता बनर्जी गुट द्वारा भेजे गए सुझावों में से किस नाम और निशान को हरी झंडी दिखाता है.

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