पश्चिम बंगाल की राजनीति में जब से ममता बनर्जी और उनकी पार्टी TMC चुनाव हारी है, तब से वहां उठा-पटक जारी है. इसी बीच पार्टी के 28 सांसदों में से 20 सांसदों ने झटका देते हुए NCPI में विलय का ऐलान कर दिया. लेकिन यह मामला जितना आसान दिखता है, उतना है नहीं. विलय से पैदा हुई संवैधानिक और कानूनी सवालों से पार पाने के लिए लोकसभा स्पीकर ओम बिरला कानूनी राय ले रहे हैं. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक लोकसभा सचिवालय इसकी प्रक्रिया कर रहा है और इसके लिए एक आंतरिक समिति बनाई गई है जिसमें कानूनी विशेषज्ञ भी है. आइए विस्तार से जानते हैं क्या हो सकती है अड़चन, कब तक पूरी होगी प्रक्रिया और फिर आगे क्या होगा.
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क्यों ली जा रही कानूनी राय?
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, सचिवालय आंतरिक समिति इस मामले में एक रिपोर्ट तैयार करेगी और इसी रिपोर्ट के आधार पर लोकसभा स्पीकर अपना फैसला सुनाएंगे. कहा जा रहा है कि मामले में अंतिम फैसला कानून मंत्रालय की लिखित राय के आधार पर ही लिया जाएगा. इस मामले में लिखित राय इसलिए भी ली जा रही क्योंकि अगर लोकसभा अध्यक्ष के फैसले के अदालत में चुनौती दी जाती है तो वह न्यायिक समीक्षा की कसौटी पर खरा उतर सकें.
किस नियम से होगा विलय?
सूत्रों के मुताबिक, संविधान की 10वीं अनुसूची(दल-बदल विरोधी कानून) के पैरा- 4(2) के तहत यदि कोई राजनीतिक दल का एक समूह किसी अन्य दल में शामिल होता है, तो उन्हें दल-बदल के अनुसार अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता है और उनकी सदस्यता भी सुरक्षित रहेगी. लेकिन इसके लिए सांसद या विधायक की संख्या दो-तिहाई या उससे ज्यादा होना अनिवार्य है. मौजूदा स्थिति में देखा जाए तो TMC के बागी गुट के पास पर्याप्त संख्या है.
कब तक पूरा होगा प्रोसेस?
बताया जा रहा है कि जैसे ही आंतरिक समिति अपना रिपोर्ट पेश करेगी, उसके बाद ही लोकसभा अध्यक्ष फैसला लेंगे. इस प्रक्रिया के अगले 5-7 दिन में पूरे होने की संभावना है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक TMC के बागी सांसदों गुट को मान्यता देने की मांग पर जो भी फैसला होगा, वह संसद के मानसून सत्र से पहले ही होगा. यानी जुलाई के तीसरे सप्ताह से पहले सारी तस्वीर साफ हो जाएगी.
आगे क्या होगा?
अगर TMC के बागी गुट को मान्यता मिल जाएगी तो संसद में उनके बैठने की जगह भी बदल दी जा सकती है. वे अभी विपक्षी बेंचों पर बैठते हैं जो बदल कर सत्ता पक्ष की ओर की जा सकती है क्योंकि उन्होंने NDA को समर्थन देने की बात भी कही है. वहीं इसमें अगर कोई भी अड़चन आई तो उनके ऊपर कार्रवाई भी हो सकती है. हालांकि यह सारी बातें आने वाले दिनों में साफ हो जाएगी.
14 जून को हुआ था विलय का ऐलान
विधानसभा चुनाव हारने के बाद से TMC की आंतरिक कलह खुलकर सामने आने लगी थी. पहले विधायक बागी हुए और उन्होंने ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुन लिया. ममता बनर्जी जब तक इस झटके से बाहर निकलती तब तक पार्टी के 20 सांसद बागी हो गए जिसमें ममता बनर्जी की सबसे करीबी सयानी घोष और सुदीप बंदोपाध्याय जैसे शामिल है. 14 जून को इन्हीं बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात कर सदन में अलग बिठाने की मांग की. साथ ही बागी सांसदों ने NCPI में विलय का ऐलान और NDA के समर्थन की बात कही.
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