Train AC coach decoration honeymoon suite viral video: नांदेड़-मुंबई नंदीग्राम एक्सप्रेस के फर्स्ट एसी डिब्बे से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. ट्रेन के एक केबिन को बिना किसी आधिकारिक अनुमति के निजी संस्था द्वारा सजाए जाने के बाद रेलवे प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है. इस पूरे मामले को सुरक्षा में एक गंभीर चूक मानते हुए रेलवे ने ड्यूटी पर तैनात चीफ टिकट इंस्पेक्टर गिरीश कुमार को सस्पेंड कर दिया है. वहीं इस घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी गई है. रेलवे का कहना है कि जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद जिम्मेदार लोगों पर आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.
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कैसे हुई बिना अनुमति के सजावट
शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि एक नवविवाहित जोड़े ने जालना की 'राहत डेकोरेटर' नाम की एक निजी संस्था से ऑनलाइन संपर्क किया था. इस संस्था के प्रतिनिधि ने जालना स्टेशन पर ट्रेन के फर्स्ट एसी डिब्बे में एक केबिन को सजा दिया. आरोप है कि ऐसा करने के लिए इस संस्था ने रेलवे प्रशासन से किसी भी तरह की कोई आधिकारिक परमिशन नहीं ली थी.
वायरल वीडियो में क्या दिखा
दरअसल, सोशल मीडिया पर ट्रेन के केबिन में सजावट का एक वीडियो बहुत तेजी से वायरल हो रहा है. इंटरनेट पर लोग इसे चलता-फिरता हनीमून सुइट या सुहागरात की सेज कहकर शेयर कर रहे हैं. वीडियो में दिख रहा है कि फर्स्ट एसी केबिन के अंदर का नजारा पूरी तरह बदला हुआ है. पूरे केबिन को रंग-बिरंगे गुब्बारों, खूबसूरत लेस और गुलाब के फूलों से सजाया गया है. केबिन की दीवारों पर ढेर सारे गुलाब के फूल चिपके हैं और फर्श पूरी तरह से फूलों की पंखुड़ियों से ढका नजर आ रहा है.
पार्टनर को देना था सरप्राइज
इस सजावट को और शानदार बनाने के लिए बर्थ पर गुलाब की पंखुड़ियों से दिल का आकार बनाया गया था. दीवारों पर फूलों के बीच-बीच में छोटी लाइट्स लगाई गई थीं और केबिन की दीवार पर 'आई लव यू' भी लिखा हुआ था. यहां तक कि अंदर रखे डस्टबिन को भी एक गुलदस्ते का रूप दे दिया गया था. दरअसल, यह पूरा इंतजाम एक यात्री ने अपने पार्टनर को सरप्राइज देने के लिए किया था. सोशल मीडिया पर जहां कुछ लोग इस क्रिएटिविटी की तारीफ कर रहे हैं, वहीं कई लोगों ने रेल मंत्री को टैग करते हुए सुरक्षा पर चिंता जताई है.
क्या कहते हैं रेलवे के नियम?
यह पूरा मामला 6 जुलाई का है, जब एक जोड़े ने जालना से मुंबई जाने वाली नंदीग्राम एक्सप्रेस के फर्स्ट एसी जी डिब्बे में बर्थ नंबर 19 और 20 रिजर्व की थी. उनकी यात्रा छत्रपति संभाजीनगर स्टेशन से शुरू होनी थी. इस विवाद पर रेलवे सूत्रों का कहना है कि फर्स्ट एसी केबिन यात्रियों को पूरी प्राइवेसी देते हैं और यात्रा के दौरान यह पूरी केबिन यात्री के लिए रिजर्व रहती है. नियम के अनुसार, यात्री अपने कम्फर्ट के हिसाब से केबिन में यात्रा कर सकते हैं.
सजावट पर रेलवे का पक्ष
रेलवे सूत्रों के मुताबिक, अगर कोई यात्री स्पेशल केबिन बुक करता है और उसे खुद अपने स्तर पर सजाता है, तो इसमें रेलवे की कोई सीधी भूमिका नहीं होती. यात्री अपनी मर्जी से अपने सफर को तय कर सकते हैं और खुद से सजावट करना किसी भी कानून का उल्लंघन नहीं है. इस मामले में असली कार्रवाई इसलिए हुई है क्योंकि सजावट के लिए बाहरी डेकोरेटर को बिना अनुमति के ट्रेन के अंदर भेजा गया, जिसे रेलवे ने सुरक्षा नियमों के खिलाफ माना है.
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