अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले भारत समेत पांच देशों को राहत देने का फैसला किया है. इसके तहत इन देशों पर रूस से तेल और गैस खरीदने के कारण अतिरिक्त टैरिफ नहीं लगाया जाएगा. इस फैसले से भारत को राहत मिलने की उम्मीद है.
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दरअसल, अमेरिका रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना चाहता है. इसी के तहत रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर भी सख्त कार्रवाई करने की तैयारी थी. लेकिन अब ट्रंप ने इस मामले में छूट देने की बात कही है.
भारत समेत 5 देशों को मिली राहत
रूस से ज्यादा कच्चा तेल खरीदने वाले पांच देशों को इस कानून के तहत निशाने पर रखा गया था. इनमें भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं.
अमेरिका की योजना थी कि रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाए. इससे इन देशों के अमेरिका के साथ होने वाले व्यापार पर असर पड़ सकता था. हालांकि, ट्रंप के नए फैसले के बाद इन देशों को राहत मिलने की बात कही गई है.
अगस्त में अमेरिकी सीनेट में पास हुआ था बिल
19 सितंबर को ट्रंप ने 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' नाम के बिल पर हस्ताक्षर किए थे. इस बिल का मकसद रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना था.
इससे पहले अगस्त में अमेरिकी सीनेट ने इस बिल को 86-11 वोट से मंजूरी दी थी. बिल में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर शुल्क बढ़ाने का प्रावधान किया गया था. इसके तहत रूस से आने वाले सामान पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ बढ़ाने की व्यवस्था भी शामिल थी.
हालांकि, इस कानून में अमेरिकी राष्ट्रपति को कुछ शर्तों के तहत छूट देने का अधिकार भी दिया गया है.
ट्रंप ने किस आधार पर दी छूट?
व्हाइट हाउस के आदेश के मुताबिक, ग्राहम एक्ट की धारा 115 अमेरिकी राष्ट्रपति को कुछ प्रतिबंधों और शुल्कों से छूट देने का अधिकार देती है. इसके लिए राष्ट्रपति को अमेरिकी कांग्रेस को लिखित रूप में बताना होता है कि यह फैसला अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है.
ट्रंप ने अपने आदेश में कहा कि इस समय कुछ प्रतिबंधों और शुल्कों से छूट देना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है. उन्होंने इस संबंध में कांग्रेस को प्रमाणपत्र देने की बात भी कही है.
भारत के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
भारत रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों में शामिल है. ऐसे में रूस से तेल खरीदने के कारण अमेरिका की ओर से अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाता, तो भारत के व्यापार पर असर पड़ सकता था.
ट्रंप के फैसले से इस मामले में भारत को राहत मिलने की उम्मीद है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत पर अमेरिका के सभी टैरिफ खत्म हो गए हैं. यह छूट संबंधित कानून के तहत आने वाले शुल्कों और प्रतिबंधों से जुड़ी है.
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