Donald Trump: ईरान के साथ जारी संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. जो ट्रंप कभी ईरान में 'सत्ता परिवर्तन' (रिजीम चेंज) की वकालत कर रहे थे, आज वही ट्रंप अपनों के ही बीच घिरते नजर आ रहे हैं. व्हाइट हाउस के भीतर मची इस हलचल ने ट्रंप प्रशासन की स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
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कैबिनेट में बड़े बदलाव की आहट
सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी की विदाई के बाद अब कैबिनेट के अन्य बड़े चेहरों पर भी गाज गिर सकती है. बताया जा रहा है कि ट्रंप अपनी टीम के कुछ प्रमुख सदस्यों के काम से संतुष्ट नहीं हैं. विशेष रूप से नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर तुलसी गबार्ड और कॉमर्स सेक्रेटरी हॉवर्ड लुटनिक इस समय ट्रंप के रडार पर हैं. गबार्ड के प्रदर्शन और लुटनिक के पुराने विवादों को लेकर राष्ट्रपति की नाराजगी की खबरें आम हैं.
जंग की मार और गिरती रेटिंग
ईरान के साथ करीब पांच हफ्तों से चल रही इस जंग ने अमेरिका की घरेलू अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है. पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और आसमान छूती महंगाई ने आम अमेरिकी नागरिक की कमर तोड़ दी है. इसका सीधा असर ट्रंप की लोकप्रियता पर पड़ा है. ताजा सर्वे के अनुसार, उनकी अप्रूवल रेटिंग गिरकर 36% पर आ गई है, जो उनके इस कार्यकाल का सबसे निचला स्तर है.
जनता का मूड और अंदरूनी दबाव
एक चौंकाने वाले आंकड़े के मुताबिक, करीब 60% अमेरिकी नागरिक ईरान के साथ जारी इस युद्ध के खिलाफ हैं. लोगों को डर है कि यह लंबी लड़ाई अमेरिका को आर्थिक संकट में धकेल देगी. वहीं, व्हाइट हाउस के भीतर भी यह माना जा रहा है कि राष्ट्रपति का हालिया संबोधन जनता का भरोसा जीतने में नाकाम रहा है.
क्या है ट्रंप की रणनीति?
विपक्ष और जनता के दबाव के बावजूद ट्रंप खुलकर हार मानने को तैयार नहीं हैं. वे मीडिया कवरेज से भी खासे नाराज हैं और अपनी टीम से 'पॉजिटिव' खबरें दिखाने को कह रहे हैं.
जानकारों का मानना है कि ट्रंप इस बार अपने पिछले कार्यकाल जैसी गलतियां नहीं दोहराना चाहते, इसलिए वे एक साथ पूरी कैबिनेट बदलने के बजाय 'टारगेटेड' यानी छोटे और असरदार बदलाव कर सकते हैं ताकि सरकार की साख भी बची रहे और काम भी हो जाए.
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