सोने को लेकर इस समय बाजार में एक दिलचस्प स्थिति बन रही है. एक तरफ अमेरिका में महंगाई के ताजा आंकड़े फेडरल रिजर्व के लिए ब्याज दरों पर सख्त रुख बनाए रखने की वजह दे रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ UBS ने सोने पर बड़ा भरोसा जताते हुए सितंबर 2027 तक इसका लक्ष्य $5,400 प्रति औंस कर दिया है. मौजूदा स्तर के मुकाबले यह करीब 24 फीसदी ऊपर है.
ADVERTISEMENT
ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि जब ब्याज दरें सोने के लिए दबाव की वजह बन सकती हैं, तो UBS को इतनी बड़ी तेजी क्यों दिखाई दे रही है.
पहले समझिए Gold की मौजूदा चाल
शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में Gold करीब 0.75 फीसदी चढ़कर $4,347 प्रति औंस पर पहुंचा. हालांकि पूरे सप्ताह के हिसाब से सोना करीब 1.8 फीसदी कमजोर रहा.
यानी छोटी अवधि में दबाव जरूर दिखाई दे रहा है, लेकिन UBS की नजर इससे कहीं आगे की है.
Gold की मौजूदा तस्वीर
- शुक्रवार को Gold करीब 0.75% चढ़ा.
- कीमत करीब $4,347 प्रति औंस रही.
- पूरे सप्ताह करीब 1.8% की गिरावट.
- UBS का सितंबर 2027 का लक्ष्य $5,400.
UBS ने Gold पर लगाया बड़ा दांव
UBS ने सितंबर 2027 के लिए Gold का लक्ष्य $5,400 प्रति औंस रखा है. बैंक के अनुमान के मुताबिक अगले कुछ quarters में भी सोने की कीमत धीरे-धीरे ऊपर जा सकती है.
UBS के अलग-अलग समय के अनुमान इस तरह हैं.
- दिसंबर 2026: $4,600
- मार्च 2027: $5,000
- जून 2027: $5,200
- सितंबर 2027: $5,400
यानी UBS का मानना है कि Gold में मौजूदा तेजी की कहानी अभी पूरी नहीं हुई है.
Fed की सख्ती से Gold को खतरा क्यों?
यहां कहानी थोड़ी उलझती है. अमेरिका में अगस्त की Core Inflation की मासिक वृद्धि जुलाई के 0.2 फीसदी से बढ़कर 0.3 फीसदी हो गई. इसका मतलब है कि महंगाई पर पूरी तरह काबू पाने की चुनौती अभी बनी हुई है.
इसी वजह से UBS को 2026 में फेड से दो बार ब्याज दर बढ़ाने की उम्मीद है.
15 और 16 सितंबर को होने वाली Fed की बैठक इसलिए Gold के लिए बेहद अहम है. अगर फेड का रुख उम्मीद से ज्यादा सख्त रहता है, तो Dollar मजबूत हो सकता है और इससे Gold पर छोटी अवधि में दबाव बढ़ सकता है.
फिर UBS इतना Bullish क्यों है?
UBS का मानना है कि Gold की कहानी सिर्फ ब्याज दरों और Fed के फैसलों तक सीमित नहीं है.
दुनिया के कई Central Banks अपने विदेशी मुद्रा भंडार में Gold की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं. इसका मकसद reserves में diversification लाना और Dollar assets पर निर्भरता कम करना है.
इसके अलावा निवेशकों की मांग भी मजबूत बनी हुई है. World Gold Council के आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में Gold-backed ETFs में करीब $18 billion का निवेश आया. इन ETFs की कुल holdings बढ़कर रिकॉर्ड 4,189 tonnes पर पहुंच गईं.
Gold को सपोर्ट करने वाले बड़े कारण
- Central Banks की लगातार खरीदारी.
- Gold ETFs में मजबूत निवेश.
- महंगाई को लेकर बनी अनिश्चितता.
- Geopolitical tensions.
- Dollar और वैश्विक आर्थिक नीतियों को लेकर चिंता.
भारतीय निवेशकों के लिए क्या मतलब?
अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में Gold $5,400 तक पहुंचता है, तो भारत में भी इसका असर पड़ सकता है. हालांकि घरेलू कीमत सिर्फ International Gold से तय नहीं होती. Dollar-Rupee की चाल, आयात लागत और घरेलू मांग भी अहम भूमिका निभाते हैं.
अगर Gold की अंतरराष्ट्रीय कीमत बढ़ती है और साथ ही रुपया कमजोर रहता है, तो भारत में सोने की कीमतों पर दोहरा असर देखने को मिल सकता है.
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि Gold लगातार एक ही दिशा में ऊपर जाएगा. बीच-बीच में correction और तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं.
इस हफ्ते Fed पर रहेगी नजर
फिलहाल सबसे बड़ा trigger 15-16 सितंबर की Fed बैठक है. सख्त रुख Gold पर short-term दबाव डाल सकता है, जबकि नरम संकेत मिलने पर कीमतों में recovery देखने को मिल सकती है.
लेकिन UBS का बड़ा संदेश इससे आगे का है. बैंक के मुताबिक Fed, Dollar और ब्याज दरों के अलावा Central Bank buying, ETF demand, inflation और geopolitical uncertainty Gold की long-term कहानी को मजबूत बनाए रख सकते हैं.
यानी $5,400 का UBS target सिर्फ एक कीमत का अनुमान नहीं है. यह संकेत है कि बड़े निवेशकों के बीच Gold को लेकर long-term भरोसा अभी भी कायम है.
ADVERTISEMENT


