इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर देश के बड़े सियासी गलियारों तक, सिर्फ एक ही युवा चेहरे की चर्चा हो रही है. वो चेहरा, जिसने देश के सबसे प्रभावशाली संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत के सामने बैठकर न सिर्फ तीखे सवाल पूछे, बल्कि नीट (NEET) विवाद और छात्र आंदोलनों पर संघ प्रमुख से युवाओं के पक्ष में बड़ा बयान भी दिलवा दिया. चर्चा है 'आईआईएमयूएन' (IIMUN) के संस्थापक और अध्यक्ष ऋषभ शाह की.
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महज 18 साल की उम्र में एक बड़े आंदोलन की नींव रखने वाले ऋषभ शाह कौन हैं? उनका फैमिली बैकग्राउंड क्या है? कैसे एक चेस प्लेयर करोड़पति सोशल एंटरप्रेन्योर बन गया? और क्या है उनका वो मॉडल जिसने संघ प्रमुख को भी उनका मुरीद बना दिया? देखिए ऋषभ शाह की पूरी लाइफ जर्नी पर हमारा शो चर्चित चेहरा.
ऋषभ शाह को मीडिया की सुर्खियों में लाने का सबसे बड़ा कारण बना उनका संघ प्रमुख मोहन भागवत के साथ किया गया ऐतिहासिक इंटरव्यू. मुंबई के मंच पर ऋषभ ने किसी कूटनीतिज्ञ या पत्रकार की तरह नहीं, बल्कि सीधे 'Gen Z' (1997 से 2012 के बीच जन्मे युवा) के प्रतिनिधि के रूप में बात की. ऋषभ ने भागवत से सीधे पूछा कि आज का युवा जब अपनी मांगों या पेपर लीक (NEET विवाद) जैसे मुद्दों पर सड़कों पर उतरता है, तो उसे 'बागी' या 'देश-विरोधी' क्यों मान लिया जाता है? ऋषभ के इसी बेबाक सवाल का असर था कि मोहन भागवत को मंच से खुलकर कहना पड़ा कि, "आंदोलन करने वाले युवा राष्ट्रविरोधी नहीं हैं, वे हमारे अपने बच्चे हैं और लोकतंत्र में आंदोलन भी संवाद का हिस्सा है.
जब नीट (NEET) जैसी परीक्षाओं में कथित धांधली और पेपर लीक के बाद देश भर का 'Gen Z' युवा आक्रोशित होकर सरकार के निशाने पर आया और सड़कों पर उतरा, तो मोहन भागवत का आगे आकर मोर्चा संभालना एक सोची-समझी रणनीतिक पहल थी. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) हमेशा से खुद को सरकार से अलग एक व्यापक सामाजिक संगठन मानता आया है, और भागवत यह अच्छी तरह जानते थे कि अगर इस युवा ऊर्जा के गुस्से को सही तरीके से शांत नहीं किया गया, तो पूरी पीढ़ी व्यवस्था से पूरी तरह विमुख हो जाएगी. उन्होंने सरकार के बचाव या आलोचना में पड़ने के बजाय सीधे छात्रों का पक्ष लिया और उन्हें 'एंटी-नेशनल' के ठप्पे से बचाया, ताकि युवाओं में व्यवस्था के प्रति भरोसा कायम रहे. भागवत का यह कदम दरअसल युवाओं के गुस्से के लिए एक 'सेफ्टी वाल्व' (Safety Valve) की तरह था, जिसके जरिए उन्होंने यह संदेश दिया कि चाहे सरकार से कोई चूक हुई हो, लेकिन देश का शीर्ष सांस्कृतिक नेतृत्व युवाओं की चिंताओं को समझता है और उनके लोकतांत्रिक प्रदर्शनों के अधिकार के साथ खड़ा है.
युवा पीढ़ी बेहद गंभीर है
इस ऐतिहासिक इंटरव्यू को लेकर ऋषभ ने बताया कि इंटरव्यू में पूछे गए सभी सवाल उनके खुद के नहीं थे, बल्कि उनकी संस्था IIMUN ने ग्राउंड लेवल पर जाकर 'Gen Z' और 'Gen Alpha' के बच्चों से सीधे कने्क्ट किए थे. ऋषभ का मानना है कि आज की युवा पीढ़ी देश को लेकर बेहद गंभीर है, बस कमी इस बात की है कि देश का शीर्ष नेतृत्व उनसे सीधे संवाद नहीं करता. ऋषभ शाह का विजन स्पष्ट है- चाहे सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, हर बड़े नेता को युवाओं के बीच आकर उनके तीखे सवालों का सामना करना चाहिए. उनका यही विजन आज उन्हें देश का सबसे अनोखा और प्रभावशाली युवा चेहरा बनाता है.
शतरंज ने उनके दिमाग को समय से पहले मैच्योर कर दिया
मुंबई के एक प्रतिष्ठित परिवार में जन्मे ऋषभ शाह आज देश के सबसे प्रभावशाली सोशल एंटरप्रेन्योर, लेखक और मोटिवेशनल स्पीकर हैं. वह 'इंडियाज इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस' (IIMUN) के संस्थापक और अध्यक्ष हैं, जो आज की तारीख में दुनिया का सबसे बड़ा युवा संचालित NGO है. ऋषभ शाह को देश की 'जनरेशन जेड' (Gen Z) और 'जनरेशन अल्फा' (Gen Alpha) की आवाज माना जाता है. वह स्कूल और कॉलेज के छात्रों के बीच संवाद, कूटनीति और नेतृत्व क्षमता को बढ़ावा देने के लिए जाने जाते हैं. उनकी इसी साख का नतीजा था कि मुंबई के भव्य यूथ समिट में उन्होंने संघ प्रमुख मोहन भागवत का एक ऐसा इंटरव्यू लिया, जिसने देश की राजनीति और सामाजिक विमर्श को एक नई दिशा दे दी है.
ऋषभ शाह की शुरुआती जिंदगी आम बच्चों से काफी अलग और अनुशासित थी. महज 8 साल की उम्र से लेकर 18 साल की उम्र तक, ऋषभ एक बेहद पैशनेट और प्रोफेशनल चेस प्लेयर थे. उन्होंने कई नेशनल और इंटरनेशनल रेटिंग चेस टूर्नामेंट्स में हिस्सा लिया और जीत दर्ज की. ऋषभ खुद मानते हैं कि शतरंज ने उनके दिमाग को समय से पहले मैच्योर कर दिया और उन्हें हर कदम को सोच-समझकर उठाना सिखाया. लेकिन 18 साल की उम्र में उन्होंने चेस बोर्ड को अलविदा कह दिया और साल 2011 में एक ऐसे विजन पर काम करना शुरू किया, जिसने आगे चलकर इतिहास रच दिया. उन्होंने महसूस किया कि भारत के युवाओं को रटने वाली शिक्षा से इतर ग्लोबल लीडरशिप और डिप्लोमेसी सिखाने की जरूरत है, और इसी सोच के साथ IIMUN का जन्म हुआ.
ऋषभ शाह ने जिस मॉडल पर काम किया, उसे 'मॉडल यूनाइटेड नेशंस' (MUN) और 'भारतीय छात्र संसद' का हाइब्रिड मॉडल कहा जा सकता है. उनका संगठन भारत के 108 शहरों और दुनिया के 15 से अधिक देशों में सक्रिय है. इस मॉडल के तहत, वे स्कूल और कॉलेज के छात्रों को इकट्ठा करते हैं, उन्हें संयुक्त राष्ट्र (UN) और भारतीय संसद की तरह डमी कमेटियां बनाकर देश और दुनिया के गंभीर मुद्दों जैसे क्लाइमेट चेंज, शिक्षा, विदेश नीति पर बहस करना सिखाते हैं. इस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह युवाओं को पश्चिमी देशों के चश्मे से नहीं, बल्कि 'भारतीयता' (Indianness) और भारतीय संस्कृति के मूल्यों के साथ वैश्विक समस्याओं को देखना सिखाता है. आज इस मॉडल के जरिए ऋषभ शाह लगभग 1 करोड़ युवाओं के एक विशाल नेटवर्क का नेतृत्व कर रहे हैं.
कैसा है ऋषभ शाह का फैमिली बैकग्राउंड
ऋषभ शाह सिर्फ एक एनजीओ चलाने वाले एक्टिविस्ट नहीं हैं, बल्कि उनका फैमिली बैकग्राउंड बेहद मजबूत और व्यावसायिक है. वह मुंबई के एक बड़े और प्रतिष्ठित बिजनेस घराने से आते हैं. सामाजिक कार्यों और युवाओं के आंदोलन को लीड करने के साथ-साथ ऋषभ अपने परिवार के आयरन एंड स्टील (लोहा और इस्पात) के पुश्तैनी बिजनेस को भी पूरी तरह संभालते हैं. वह एक सफल कॉर्पोरेट लीडर भी हैं. उनकी निजी जिंदगी की बात करें, तो वह अपनी पत्नी रिया शाह के साथ मुंबई में रहते हैं. उनकी लाइफस्टाइल बेहद अनुशासित है; वह बिजनेस और देशव्यापी दौरों को संभालने के लिए दिन में महज 3 से 4 घंटे ही सोते हैं. इसके अलावा, वह तीन बेस्ट-सेलिंग किताबों के लेखक भी हैं और देश के कई टॉप आईआईएम (IIMs) में विजिटिंग फैकल्टी के तौर पर लेक्चर देते हैं.
शतरंज की चालों से लेकर कूटनीति के वैश्विक मंच तक... और पुश्तैनी लोहे के बिजनेस से लेकर करोड़ों युवाओं के दिलों पर राज करने तक... ऋषभ शाह ने साबित कर दिया है कि आज का युवा सिर्फ रैलियों में भीड़ बढ़ाने के लिए नहीं है, बल्कि वह देश के नीति-निर्धारकों की आंखों में आंखें डालकर सवाल पूछने का दम रखता है. मोहन भागवत का यह इंटरव्यू ऋषभ शाह के करियर का अंत नहीं, बल्कि एक नए अध्याय की शुरुआत है, जो आने वाले समय में देश की युवा राजनीति को एक नया चेहरा दे सकता है.
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