जब आप ट्रेन में सफर करते है तो आराम और सुकून की तलाश करते है, लेकिन जब ऐसा नहीं होता है तो आपकी यात्रा एक बुरे सपने की तरह यादगार बन जाती है. कुछ ऐसा ही जानी-मानी कर्नाटक की गायिका शिवश्री स्कंदप्रसाद के साथ हुआ है. शिवश्री ने बीते कल यानी 24 सितंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट करते हुए अपनी भयावह यात्रा की कहानी बताई और सिविक सेंस पर सवाल उठाया. शिवश्री ने अपने पोस्ट में यहां तक लिखा कि, 'भगवान ही बचाएं इस देश को'. अब इस मामले ने एक नई बहस छेड़ दी है. ऐसे में आइए जानते हैं आखिर क्या है पूरा मामला और कौन हैं शिवश्री स्कंदप्रसाद?
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शिवश्री ने X पर क्या लिखा?
शिवश्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर 24 सितंबर को अपनी ट्रेन यात्रा की आपबीती सुनाई. उन्होंने लिखा कि, 'आज की ट्रेन यात्रा मेरे लिए काफी बुरा अनुभव रहा. यह देखकर बहुत बुरा लगता है कि लोग सार्वजनिक जगहों(Public Space) का कितना कम सम्मान करते हैं. जब हम सार्वजनिक जगहों पर हों, तो हमें चिल्लाना या जोर-जोर से बात नहीं करनी चाहिए और दूसरों की पर्सनल स्पेस का सम्मान करना चाहिए.'
'भारत में समस्या है कि कोई सवाल नहीं करता'
पोस्ट में उन्होंने आगे लिखा कि,
'कलाकार होने के नाते, हमारे दिमाग में बहुत सारे विचार चल रहे होते हैं और हमें शांति पसंद होती है. ट्रेन में बड़े ग्रुप के साथ सफर करते समय शुरुआती उत्साह को कोई भी समझ सकता है. लेकिन जरा सोचिए, 40 अधेड़ उम्र के लोगों का एक ग्रुप 56 सीटों वाली बोगी में हो और वे 5 घंटे तक लगातार जोर-जोर से बातें कर रहे हों. भारत में समस्या यह है कि कोई उनसे सवाल नहीं कर सकता. यह एक अनकहा नियम है कि ग्रुप का हिस्सा न होने वाले बाकी 16 लोगों को बस उन्हें बर्दाश्त करना पड़ता है.'
TTE ने बदला सीट, लेकिन कोई फायदा नहीं
शिवश्री ने लिखा कि, 'मैंने TTE से अनुरोध किया कि क्या मुझे किसी दूसरी बोगी में सीट मिल सकती है? उन्होंने कोशिश की, लेकिन दुर्भाग्य से ट्रेन पूरी भरी हुई थी, इसलिए मुझे उसी बोगी में दूसरी सीट पर रहना पड़ा. तभी अचानक 8 लोगों का एक ग्रुप, जो पहले से ही लगातार बातें कर रहा था और हंस रहा था, UNO खेलने लगा. और फिर मैंने TTE से अनुरोध किया कि क्या कुछ किया जा सकता है. उन्होंने उनसे रुकने के लिए कहा और वे तुरंत रुक गए.
'भगवान बचाएं इस देश को'
शिवश्री ने अपनी कहानी बताते हुए आगे लिखा कि, लेकिन कुछ मिनटों के बाद TTE वापस आए और मजाक में उनसे पूछा, 'याके सर गलाट्टे माडताइदेरा?' (आप लोग हंगामा क्यों कर रहे हैं?) तो वे हंसने लगे और बोले, 'सर नीवु बन्नी, अडोना' (सर आप भी शामिल हो जाइए, चलिए खेलते हैं). तो यहां चिंता इस बात की नहीं है कि कौन जीता. मैं भी, उनके साथ, एक भारतीय के तौर पर, सिविक सेंस की परीक्षा में हार गए. एक देश के तौर पर हम अपने सार्वजनिक व्यवहार में कब सुधार करेंगे? और बाद में उन्होंने जान-बूझकर बॉलीवुड गाने बजाना शुरू कर दिया. भगवान इस देश की रक्षा करें.
आखिर कौन हैं शिवश्री स्कंदप्रसाद?
शिवश्री स्कंदप्रसाद, बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या की पत्नी हैं और कर्नाटक की एक जानी-मानी गायिका तथा शास्त्रीय नृत्यांगना हैं. 1 अगस्त 1996 को जन्मी शिवश्री को संगीत और कला की यह थाती विरासत में मिली है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुाबिक उनके पिता सीरकाजी जे. स्कंदप्रसाद एक प्रसिद्ध मृदंगम वादक हैं, दादा कलैमामणि स्वर्गीय सीरकाज़ी आर. जयरामन एक स्थापित संगीतकार थे, और दादी शांति जयरामन भरतनाट्यम की एक लोकप्रिय गायन संगतकार थीं. इसी पारिवारिक पृष्ठभूमि के चलते उन्होंने महज 3 साल की उम्र से ही भरतनाट्यम की तालीम लेनी शुरू कर दी थी और देश के कई शहरों में अपनी एकल प्रस्तुतियां दी हैं.
कला के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी उनका सफर बेहद शानदार रहा है. उन्होंने शास्त्रा यूनिवर्सिटी (SASTRA University) से बायो-इंजीनियरिंग में बी.टेक और मद्रास यूनिवर्सिटी से भरतनाट्यम में एमए की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने मद्रास संस्कृत कॉलेज से संस्कृत में डिप्लोमा भी किया है. सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहने वाली शिवश्री को गायन और नृत्य के साथ-साथ साइकलिंग का भी गहरा शौक है.
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