Srinivas Narayanan News:क्या सफलता का मतलब सिर्फ आलीशान दफ्तर, करोड़ों का पैकेज और सिलिकॉन वैली की चकाचौंध है? या फिर असली कामयाबी वह है जो आपको वक्त आने पर सब कुछ छोड़कर अपने माता-पिता और अपनी जड़ों के पास ले आए? यह कहानी है उस शख्स की जिसने दुनिया को ChatGPT चलाना सिखाया, लेकिन जब बात परिवार की आई, तो OpenAI के सीटीओ (CTO) जैसा बड़ा पद ठुकरा कर भारत लौटने का फैसला किया.
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कौन हैं श्रीनिवास नारायणन?
श्रीनिवास नारायणन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया का एक ऐसा नाम हैं जिनकी बराबरी करना लगभग नामुमकिन माना जाता है. चेन्नई की गलियों से निकलकर सिलिकॉन वैली के शिखर तक पहुँचने वाले श्रीनिवास ने IIT मद्रास से 1995 में कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया था. दिलचस्प बात यह है कि 1994 में, जब इंटरनेट अभी शुरुआती दौर में था, तब उन्होंने अपना पहला AI चेस प्रोग्राम बनाया था.
Facebook Photos के 'जनक' से OpenAI के 'ग्रोथ इंजन' तक श्रीनिवास के करियर का ग्राफ किसी सपने जैसा है:
Facebook (Meta): उन्होंने करीब 13 साल फेसबुक में बिताए. उन्हें 'फेसबुक फोटोज' का जनक कहा जाता है क्योंकि उन्होंने ही इसे दुनिया का सबसे बड़ा फोटो शेयरिंग प्लेटफॉर्म बनाया.
OpenAI: तीन साल पहले सैम ऑल्टमैन ने उनकी काबिलियत को देखते हुए उन्हें अपनी टीम में शामिल किया. वह यहाँ वीपी ऑफ इंजीनियरिंग से लेकर एप्लाइड इंजीनियरिंग के सीटीओ बने. उन्होंने ही चैटजीपीटी को एक सामान्य चैट बॉक्स से बदलकर एक पावरफुल बिजनेस टूल बनाया.
क्यों लिया भारत लौटने का फैसला?
जब श्रीनिवास का करियर सफलता के चरम पर था, तब उन्होंने एक ऐसा फैसला लिया जिसने पूरी टेक दुनिया को चौंका दिया. उन्होंने सैन फ्रांसिस्को का अपना आलीशान करियर छोड़ अपने बुजुर्ग माता-पिता के साथ समय बिताने के लिए भारत लौटने का निर्णय लिया है. सोशल मीडिया पर उनके इस फैसले की चर्चा करोड़ों के पैकेज से कहीं ज्यादा उनके संस्कारों की वजह से हो रही है.
रिवर्स माइग्रेशन: एक नया ट्रेंड
श्रीनिवास का यह कदम कोई अकेला मामला नहीं है. अब 'रिवर्स माइग्रेशन' का एक नया ट्रेंड चल रहा है, जहाँ जोहो (Zoho) के श्रीधर वेम्बू जैसे कई बड़े दिग्गज अपनी जड़ों की ओर लौट रहे हैं. आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल करीब 42,900 भारतीय टेक प्रोफेशनल्स विदेश छोड़कर भारत लौटे हैं.
श्रीनिवास नारायणन ने साबित कर दिया है कि कामयाबी की असली परिभाषा केवल बैंक बैलेंस नहीं, बल्कि अपनों के साथ बिताया गया वक्त है.
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