कौन थे अली लारिजानी? जिनकी मौत से हिल गया ईरान, ट्रंप को दी थी खुली चेतावनी

इजरायल की एयरस्ट्राइक में ईरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारिजानी मारे गए. उनके बेटे और बॉडीगार्ड भी हमले में ढेर हुए. ईरान ने बदले की कसम खाई है. लारिजानी ईरान के सबसे ताकतवर नेताओं में से थे और हाल ही में उन्होंने ट्रंप को खुली चेतावनी दी थी.

Ali Larijani
Ali Larijani

न्यूज तक डेस्क

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इजरायल और अमेरिका के साथ जारी संघर्ष में ईरान को एक ऐसा झटका लगा है, जिसकी भरपाई आसान नहीं होगी. ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख डॉ. अली लारिजानी इजरायल की एयरस्ट्राइक में मारे गए हैं. पहले इजरायल ने यह दावा किया था और अब ईरान ने भी आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि कर दी है. हमले में लारिजानी के साथ उनका बेटा और उनके बॉडीगार्ड भी मारे गए. ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने एक बयान में इस हमले की निंदा करते हुए कहा कि इसका बदला जरूर लिया जाएगा.

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परिवार समेत हुए हमले का शिकार

जानकारी के मुताबिक, इस भीषण हमले में न केवल अली लारिजानी बल्कि उनके बेटे और उनके बॉडीगार्ड की भी जान चली गई है. लारिजानी ईरान के सुप्रीम लीडर के बेहद भरोसेमंद माने जाते थे. उनकी मौत के बाद ईरान में शोक की लहर है.

ट्रंप को दी थी सीधी चेतावनी

अपनी मौत से महज एक हफ्ते पहले लारिजानी सुर्खियों में आए थे, जब उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों का करारा जवाब दिया था. उन्होंने कहा था कि ईरान बलिदानियों का राष्ट्र है और वह खोखली धमकियों से नहीं डरता. उन्होंने ट्रंप को चेतावनी देते हुए 'सावधान' रहने को कहा था. माना जा रहा है कि इस बयान के बाद से ही वे इजरायली और अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के रडार पर आ गए थे.

कौन थे अली लारिजानी?

लारिजानी ईरान के उन चंद नेताओं में से थे जिनका राजनीति, सुरक्षा और कूटनीति  तीनों मोर्चों पर एक साथ दबदबा था. उनके परिवार की तुलना अमेरिका के केनेडी परिवार से की जाती थी. उनके एक भाई सादेक लारिजानी न्यायपालिका प्रमुख रहे, तो दूसरे भाई मोहम्मद जवाद विदेश नीति के वरिष्ठ सलाहकार थे.

उनका जन्म 1958 में इराक के नजफ में हुआ था. बचपन में ही वे ईरान आ गए और इस्लामिक क्रांति के दौर में बड़े हुए. ईरान-इराक युद्ध के समय वे रिवोल्यूशनरी गार्ड्स में शामिल हो गए. बाद में उन्होंने संस्कृति मंत्री के रूप में काम किया, सरकारी ब्रॉडकास्टर की कमान संभाली और देश में सेंसरशिप को और कड़ा किया.

पढ़े-लिखे, लेकिन कट्टर

लारिजानी की पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो उन्होंने गणित और कंप्यूटर साइंस में ग्रेजुएशन किया. इसके बाद पश्चिमी दर्शनशास्त्र में मास्टर्स और पीएचडी पूरी की. उनका शोध दार्शनिक इमैनुएल कांट के विचारों पर आधारित था. यही वजह थी कि वे पश्चिमी और अमेरिकी सोच को गहराई से समझते थे.

2005 में उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव भी लड़ा, लेकिन जीत नहीं मिली. इसके बाद उन्हें ईरान का मुख्य परमाणु वार्ताकार और सुरक्षा परिषद का सचिव बनाया गया. वे ईरानी संसद के स्पीकर भी रह चुके थे. सरकार विरोधी प्रदर्शनों को दबाने और मोरल पुलिस की कमान में भी उनकी अहम भूमिका मानी जाती थी.

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