केजरीवाल-जस्टिस स्वर्णकांता की लड़ाई में क्यों कूदे सौरव दास?

रूपक प्रियदर्शी

09 Aug 2026 (अपडेटेड: Aug 9 2026 11:44 AM)

दिल्ली शराब घोटाला मामले में दिल्ली हाईकोर्ट की जज जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा, पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के नेताओं के बीच तनातनी जारी है.

अरविंद केजरीवाल और सौरभ दास
अरविंद केजरीवाल और सौरभ दास
Google CTA

दिल्ली के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में कानूनी लड़ाई अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है. दिल्ली हाईकोर्ट की जज जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा और आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं के बीच जारी तनातनी में अब युवा पत्रकार व एक्टिविस्ट सौरव दास भी कानूनी पचड़े में फंस गए हैं. जस्टिस शर्मा के खिलाफ टिप्पणी और कथित तौर पर न्यायपालिका को बदनाम करने के आरोप में सौरव दास और AAP नेताओं पर आपराधिक अवमानना (Criminal Contempt) का केस चल रहा है. हाल ही में इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच (जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रवींद्र दुडेजा) के सामने एक नई मोड़ वाली सुनवाई हुई, जिसने इस पूरे विवाद को फिर से सुर्खियों में ला दिया है.

Read more!

क्या है विवाद की मुख्य वजह?

इस पूरे कानूनी मामले की जड़ें दिल्ली शराब नीति घोटाले की सीबीआई (CBI) जांच से जुड़ी हैं. जब निचली अदालत ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और के. कविता समेत मुख्य आरोपियों को राहत दी, तो CBI ने इसे दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी. इस याचिका की सुनवाई का जिम्मा जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को मिला.

सुनवाई के दौरान अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने जज पर निष्पक्ष न्याय न मिलने का शक जताते हुए मांग की कि जस्टिस शर्मा खुद को इस केस से अलग कर लें. केजरीवाल ने अदालत में सीधे आरोप लगाया कि जस्टिस शर्मा से उन्हें राहत मिलने की उम्मीद नहीं है.

पत्रकार सौरव दास की एंट्री और 'कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट' का दावा

इस विवाद में खोजी पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट सौरव दास की एंट्री तब हुई जब उन्होंने आरटीआई (RTI) और सार्वजनिक दस्तावेजों का हवाला देते हुए सोशल मीडिया पर एक विस्फोटक दावा किया.

क्या था दावा? सौरव दास ने दावा किया कि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के बेटे और बेटी दोनों केंद्र की मोदी सरकार के लीगल पैनल में वकील हैं.

  • हितों का टकराव (Conflict of Interest): उन्होंने तर्क दिया कि चूंकि केस केंद्र सरकार की एजेंसी CBI बनाम अरविंद केजरीवाल है, इसलिए जज के बच्चों का सरकारी पैनल में होना सीधे तौर पर हितों के टकराव का मामला है.
  • राजनीतिक टूलकिट का आरोप: सौरव दास के इस दावे के बाद आम आदमी पार्टी को न्यायपालिका पर सवाल उठाने का हथियार मिल गया. कोर्ट ने इसे न्यायपालिका की साख को बट्टा लगाने की सोची-समझी राजनीतिक मुहिम माना.

आपराधिक अवमानना केस में कैसे आया नाम?

जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने अपने खिलाफ चलाए जा रहे सोशल मीडिया ट्रोलिंग और बयानों पर सख्त रुख अपनाया. मई में कोर्ट ने स्वतः संज्ञान (Suo Moto) लेते हुए अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और संजय सिंह के खिलाफ आपराधिक अवमानना का मामला शुरू किया.

वहीं, एडवोकेट अशोक चैतन्य की याचिका के जरिए इस केस में सौरव दास और गोपाल राय का नाम भी जोड़ा गया. हालांकि, निष्पक्षता की मर्यादा बनाए रखने के लिए जस्टिस शर्मा ने बाद में मुख्य शराब घोटाले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था, लेकिन अवमानना का केस जारी रहा.

नया मोड़: सबूत मिटाने और पोस्ट डिलीट करने का आरोप

दिल्ली हाईकोर्ट में हालिया सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता वकील अशोक चैतन्य ने आरोप लगाया कि कानूनी कार्रवाई के डर से अरविंद केजरीवाल और सौरव दास ने अपने वे आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट डिलीट कर दिए हैं, जो अवमानना केस का मुख्य आधार थे.

  • कोर्ट की मांग: हाईकोर्ट की बेंच ने शिकायतकर्ता से इन दावों के डिजिटल सबूत पेश करने को कहा है.
  • सौरव दास का जवाब: सौरव दास ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने कोई पोस्ट डिलीट नहीं की है और वे अपनी आरटीआई रिपोर्टिंग पर आज भी कायम हैं.
  • अगली सुनवाई: अदालत ने सभी पक्षों को जवाब दाखिल करने के लिए 4 हफ्ते का समय दिया है और अगली सुनवाई 21 सितंबर 2026 तय की है.