क्या ट्रंप की डील से भारतीय किसानों का होगा नुकसान? विरोध में 12 फरवरी को देशभर में जुटेंगे किसान, जानें क्या है मामला

भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा ने 12 फरवरी को देशभर में बड़े आंदोलन का ऐलान किया है. किसानों को डर है कि इस समझौते से कृषि और डेयरी क्षेत्र में विदेशी दखल बढ़ेगा, जिससे स्थानीय किसानों की आजीविका और MSP व्यवस्था खतरे में पड़ सकती है.

Trade deal
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राजू झा

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भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुई व्यापारिक डील (Trade Deal) ने भारत के किसानों के बीच हलचल पैदा कर दी है. संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने इस समझौते को खेती और आजीविका के लिए खतरा बताते हुए एक बार फिर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है. 

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किसानों का कहना है कि अगर केंद्र सरकार ने इस डील की बारीकियों को स्पष्ट नहीं किया और कृषि-डेयरी उत्पादों को अमेरिकी बाजार के लिए खोल दिया तो साल 2020-21 जैसा ऐतिहासिक आंदोलन फिर से दोहराया जाएगा.

12 फरवरी को 20,000 स्थानों पर सभाएं

किसान संगठनों ने इस ट्रेड डील के खिलाफ व्यापक रणनीति तैयार की है. इसके तहत किसान नेता 1 लाख से ज्यादा गांवों में जाकर किसानों को इस समझौते का किसानों पर क्या असर पड़ेगा इसके बारे में समझाएंगे. वहीं 12 फरवरी को देशभर में लगभग 20,000 स्थानों पर सार्वजनिक सभाएं आयोजित की जाएंगी और एक विशाल आंदोलन की शुरुआत होगी.

किसानों की मुख्य चिंताएं

किसानों और विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के साथ हुई यह डील भारतीय कृषि क्षेत्र को कई तरह से प्रभावित कर सकती है:

  • बाजार में कॉम्पटीशन: अगर अमेरिकी कृषि और डेयरी उत्पादों को भारतीय बाजार में बिना किसी रुकावट के प्रवेश मिलता है तो छोटे और मध्यम वर्ग के किसान उनका मुकाबला नहीं कर पाएंगे. 
  • सब्सिडी और MSP पर खतरा: किसानों को डर है कि इस समझौते के तहत सरकारी खरीद, सब्सिडी और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को व्यापार में बाधा मानकर निशाना बनाया जा सकता है. 
  • सस्ते उत्पादों की बाढ़: अमेरिका में मशीनी खेती और भारी सब्सिडी के कारण वहां के उत्पाद सस्ते होते हैं. अगर आयात शुल्क में छूट दी गई तो भारतीय बाजार में सस्ते अमेरिकी उत्पादों की बाढ़ आ जाएगी, जिससे स्थानीय किसानों की आय गिर जाएगी.
  • क्लियारिटी का अभाव: किसान नेताओं का आरोप है कि सरकार इस मुद्दे पर खुलकर कुछ नहीं बोल रही है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति सोशल मीडिया पर कुछ और ही दावे कर रहे हैं.

सरकार का क्या है पक्ष?

वहीं दूसरी तरफ सरकार ने इन आशंकाओं को खारिज किया है. कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल का कहना है कि किसी भी ऐसे बाजार को नहीं खोला जा रहा है जिससे भारतीय किसानों को नुकसान हो.

उन्होंने कहा कि डेयरी उत्पाद, मुख्य खाद्यान्न और प्रमुख फलों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षित रखा गया है. इसके अलावा उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने हमेशा किसानों और राष्ट्र के हितों को सर्वोपरि रखा है. 

दरअसल भारत में कृषि केवल व्यापार नहीं बल्कि 70 करोड़ लोगों की आजीविका है. ऐसे में किसानों का यह विरोध सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है. अब सबकी नजरें 12 फरवरी के आंदोलन पर टिकी हैं.

ट्रेल डील में क्या क्या है 

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर एक बड़ा और अहम समझौता हुआ है. आसान भाषा में कहें तो भारत और अमेरिका के बीच अब सामान को लाने-ले जाने में जो टैक्स की रुकावटें आती थीं, उन्हें अब हटा या कम कर दिया गया है. यानी कुछ सामान जब अमेरिका से भारत आएंगे तो उन पर कोई टैक्स या बहुत कम टैक्स लगेगा. हालांकि यह सुविधा हर चीज पर नहीं होगी. 

भारत इनपर टैरिफ कम या खत्म करेगा

भारत ने कुछ आयातित उत्पादों पर टैरिफ घटाने या पूरी तरह खत्म करने का फैसला किया है. इनमें ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स, पशु आहार के लिए लाल ज्वार, सूखे मेवे (ट्री नट्स), ताजे और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन तेल, वाइन और शराब के साथ-साथ कई अन्य कृषि उत्पाद शामिल हैं, जिससे व्यापार को बढ़ावा मिलने और कीमतों पर असर पड़ने की उम्मीद है.

अमेरिका इनपर लगाएगा 18 फीसती टैरिफ 

अमेरिका ने कुछ उत्पादों पर 18 फीसदी टैरिफ लगाने का फैसला किया है, जिसमें कपड़ा और अपैरल, चमड़ा और जूते, प्लास्टिक व रबर से बने सामान, बायोकेमिकल उत्पाद, होम डेकोर और हैंडीक्राफ्ट आइटम के साथ-साथ कुछ मशीनरी उत्पाद भी शामिल हैं. इस कदम से इन सेक्टरों के निर्यात पर असर पड़ सकता है और व्यापारिक लागत बढ़ने की संभावना जताई जा रही है.

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