फर्ज करिए कि अंधेरी रात में अचानक आप अपने घर का बाथरूम खोलते हैं और सामने मुंह बाए विशाल मगरमच्छ बैठा हो तो क्या होगा? ये कोई कल्पना नहीं है बल्कि गुजरात के आणंद जिले में ये हकीकत बन चुका है. यहां एक शख्स के बाथरूम में एक खंखार मगरमच्छ पहुंच गया. जब उसने आधी रात दरवाजा खोला तो उसके होश उड़ गए. हाथ-पांव तेजी से कांपने लगे और गले से आवाज निकलनी बंद हो गई. यूं कहें तो शख्स की घिघ्घी बंध गई. खैर जैसे-तैसे उसने वन विभाग को सूचना दी. मौके पर टीम आई और एक घंटे की कड़े मशक्कत के बाद मगरमच्छ को पकड़ा जा सका.
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ये मामला बुधवार देर रात का है. त्रंबोवाड इलाके में रहने वाले बालाभाई चौहान के मकान के बाहर अचानक रात के करीब 11 बजे कुत्ते जोर-जोर से भौंकने लगे. कुत्तों के भौंकने की आवाज सुन बालाभाई चौहान की नींद खुली. वो बाथरूम की तरफ बढ़े. दरवाजा हल्का खुला था. पूरा दरवाजा खोलते ही उनकी चीख निकल गई. सामने मुंह फाड़े 7 फीट लंबा मगरमच्छ बैठा था. मगरमच्छ को देखते ही परिवार में चीख-पुकार और दहशत का माहौल बन गया. बिना देर किए तुरंत इसकी सूचना सोजीत्रा वन विभाग को दी गई.
एक घंटे की मशक्कत से मगरमच्छ को किया काबू
सूचना मिलते ही वन रक्षक निलेश भरवाड़ और मनीष प्रजापति के निर्देशन में दया फाउंडेशन के अध्यक्ष नितेश चौहान और वॉलंटियर तुषार राणा पूरी रेस्क्यू टीम के साथ मौके पर पहुंचे. मगरमच्छ को काबू में करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी और आखिरकार 1 घंटे में मगरमच्छ को बिना नुकसान पहुंचाए टीम ने उसे काबू में कर लिया. इसके बाद पूरे परिवार ने राहत की सांस ली. वन विभाग की टीम ने मगरमच्छ को पास के ही मलातज गांव के तालाब में सुरक्षित छोड़ दिया.
कहां से आया से भारी-भरकम मगरमच्छ ?
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, मानसून के इस मौसम में बारिश की वजह से तालाबों और जलाशयों में पानी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है. शरीर का तापमान संतुलित रखने और भोजन की तलाश में मगरमच्छ अक्सर पानी से बाहर निकलकर आसपास के रिहायशी इलाकों का रुख कर लेते हैं. मलातज गांव के पास ही स्थित तालाब में तकरीबन 100 से भी ज्यादा मगरमच्छ मौजूद हैं. यही वजह है कि जलभराव की स्थिति में मगरमच्छ आसपास की सड़कों और इंसानी बस्तियों तक पहुंच रहे हैं.
वन विभाग ने जारी की चेतावनी
बढ़ते खतरे को देखते हुए वन विभाग ने नागरिकों के लिए चेतावनी जारी की है- "रात के समय बेहद सतर्क रहें और बेवजह बाहर न निकलें. सड़कों पर गाड़ियां धीमी गति से चलाएं. अगर कहीं मगरमच्छ दिखाई दे, तो उसे बिल्कुल परेशान न करें और तुरंत वन विभाग को सूचित करें.''
इनपुट: हेताली शाह
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