छात्रों के मुद्दों को लेकर मुखर रहने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपनी प्रमुख मांगों को लेकर स्थिति साफ कर दी है. सीजेपी प्रमुख की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, संगठन की सबसे बड़ी मांग मान ली गई है. इसके तहत धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. हालांकि, छात्रों की सुरक्षा और आर्थिक मदद से जुड़े दो अन्य अहम मुद्दों पर अब भी फैसला होना बाकी है.
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इस्तीफे पर मुहर, पर लड़ाई अभी बाकी
सीजेपी के लगातार बढ़ते दबाव और राष्ट्रव्यापी छात्र आंदोलन के बाद धर्मेंद्र प्रधान को पद छोड़ना पड़ा है. संगठन ने इसे छात्रों के एकजुट संघर्ष की पहली बड़ी कामयाबी बताया है. लेकिन इसके साथ ही पार्टी ने स्पष्ट किया है कि जब तक बाकी बची दो शर्तें पूरी नहीं होंगी, तब तक राहत की सांस नहीं ली जाएगी.
इन 3 मांगों पर फंसा है पेच
संगठन की ओर से सामने आए ब्योरे के अनुसार, पहली पेंडिंग मांग सुसाइड करने वाले सभी छात्रों के परिवारों को 1-1 करोड़ रुपये की सहायता राशि देने की है. सीजेपी का कहना है कि व्यवस्था की कमियों के कारण अपनी जान गंवाने वाले छात्रों के परिजनों को न्याय मिलना बेहद जरूरी है.
दूसरी पेंडिंग मांग यह है कि आंदोलन में भाग लेने वाले किसी भी छात्र के खिलाफ कोई दंडात्मक या कानूनी एक्शन न लिया जाए. संगठन चाहता है कि सरकार आधिकारिक रूप से यह आश्वासन दे कि किसी भी प्रदर्शनकारी छात्र का भविष्य कानूनी मुकदमों के कारण खराब नहीं होगा.
तीसरी मांग आरएएफ और दिल्ली पुलिस की ओर से सार्वजनिक माफी की है.
क्या होगा आगे का रुख?
सीजेपी चीफ के रुख से साफ है कि वे आधी-अधूरी जीत से संतुष्ट होने वाले नहीं हैं. धर्मेंद्र प्रधान के हटने के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने और केस वापस लेने की मांगों पर क्या रुख अपनाता है. जब तक इन दोनों मुद्दों पर अंतिम मुहर नहीं लगती, तब तक इस मामले में खींचतान जारी रहने के आसार हैं.
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