2029 के चुनाव में 'Gen Z' और महिलाएं बदलेंगी भारत की राजनीति का नक्शा? C-Voter के फाउंडर यशवंत देशमुख से समझाया पूरा गणित

मिलिंद खांडेकर

13 Aug 2026 (अपडेटेड: Aug 13 2026 3:57 PM)

2029 Lok Sabha Election: 2029 के लोकसभा चुनाव में Gen Z और महिला मतदाता भारतीय राजनीति का नया समीकरण तय कर सकते हैं. C-Voter के फाउंडर यशवंत देशमुख ने बताया कि 28-30% मतदाता Gen Z होंगे और महिला वोटर भी चुनावी नतीजों में बड़ी भूमिका निभाएंगी. जानिए जाति-धर्म से आगे बढ़ती राजनीति, महिला आरक्षण और बदलते वोटिंग पैटर्न का पूरा गणित.

2029 Election Analysis
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भारतीय राजनीति में जब भी चुनावों की बात होती है, तो आमतौर पर जाति और धर्म के समीकरणों पर चर्चा केंद्रित हो जाती है. हालांकि, आगामी 2029 के लोकसभा चुनाव को लेकर एक नया और बड़ा राजनीतिक ट्रेंड आकार लेता दिख रहा है. न्यूज तक के विशेष कार्यक्रम 'साप्ताहिक सभा' में सी-वोटर के संस्थापक और वरिष्ठ चुनाव विश्लेषक यशवंत देशमुख ने News Tak के मैनेजिंग एडिटर मिलिंद खांडेकर से इसी मुद्दे पर बातचीत की और बड़ा विश्लेषण किया है.

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यशवंत देशमुख का मानना है कि 2029 के लोकसभा चुनाव में लगभग 28 से 30 फीसदी मतदाता Gen Z होंगे. देश में पारंपरिक जाति और धर्म के समीकरणों से परे अब दो सबसे बड़ी नई 'जातियां' उभर चुकी हैं- पहली महिला और दूसरी युवा. पिछले दो-तीन वर्षों के चुनावों में महिला मतदाताओं ने चुनाव के नतीजों को न केवल प्रभावित किया है, बल्कि कई राज्यों में चुनाव के रुख को पूरी तरह पलट कर रख दिया है.

पारंपरिक राजनीति करने वाले दलों को लगेगा बड़ा झटका

देश में 1967, 1977, 1989 और 2014 के चुनावों का उदाहरण देते हुए यशवंत देशमुख ने स्पष्ट किया कि भारतीय राजनीति में जब भी बड़े इलेक्टोरल बदलाव हुए हैं, वे हमेशा युवाओं की पीठ पर ही खड़े हुए हैं. Gen Z और महिला मतदाताओं का यह संयोजन देश की चुनावी राजनीति के पारंपरिक समीकरणों को बदलने वाला है. लंबे समय से जाति और धर्म के चश्मे से राजनीति को देखते आ रहे नेताओं और राजनीतिक दलों के लिए यह स्थिति एक बड़ा संकट खड़ी कर सकती है. जो दल समय रहते इस बदलाव को स्वीकार नहीं करेंगे, उन्हें आने वाले चुनावों में भारी झटका लगना तय है.

नेताओं को रिबूट और री-इन्वेंट करना पड़ेगा अपना सिस्टम

वर्तमान दौर को भारतीय राजनीति का 'संक्रमण काल' करार देते हुए विश्लेषक ने कहा कि चाहे सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, सभी राजनीतिक दलों को अपनी सोच का पुनर्निर्माण करना होगा. पार्टियों को अपने पूरे सिस्टम को कंप्यूटर की तरह रिबूट करना पड़ेगा. लोकतंत्र में मतदाताओं को 'टेकन फॉर ग्रांटेड' नहीं लिया जा सकता और सवाल पूछने वाले वोटरों को सम्मान देना ही होगा. कोई भी राजनीतिक दल अब यह सोचकर शांत नहीं बैठ सकता कि जनता मौजूदा सत्ता से नाराज है, इसलिए वोट खुद-ब-खुद उनकी झोली में आ गिरेंगे. हाथ-पैर हिलाए बिना और खुद में बदलाव किए बिना वोट मिलना अब संभव नहीं है.

महिला आरक्षण और Gen Z मिलकर बदलेंगे राजनीति का पूरा नक्शा

2029 के चुनाव से पहले 33 प्रतिशत महिला आरक्षण का लागू होना तय माना जा रहा है. सवाल सिर्फ यह है कि यह चुनाव लोकसभा सीटों के परिसीमन/बढ़ने के साथ होगा या वर्तमान सीटों पर. ऐसे में संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की 33 प्रतिशत भागीदारी और Gen Z की दोहरी भागीदारी (जिसमें लगभग 15% Gen Z महिलाएं भी शामिल हैं) मिलकर देश के राजनीतिक नक्शे को पूरी तरह से बदल देगी. अब असली रेस इस बात की है कि इस बदलते हुए नक्शे में कौन सी पार्टी और कौन से नेता खुद को सबसे जल्दी री-इन्वेंट कर पाते हैं.

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