लोकसभा में वामपंथी उग्रवाद (LWE) पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कड़ा रुख अख्तियार किया. शाह ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि यह नरेंद्र मोदी की सरकार है और जो भी देश के खिलाफ हथियार उठाएगा, उसे अंजाम भुगतना होगा. उन्होंने बस्तर और रेड कॉरिडोर के इलाकों में नक्सलवाद के खात्मे का श्रेय सुरक्षाबलों और राज्य पुलिस के जवानों को दिया.
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'नक्सलवाद की वकालत करने वाले बताएं, 1970 से अब तक क्यों नहीं किया खत्म?'
अमित शाह ने विपक्ष और नक्सलवाद के पैरोकारों पर निशाना साधते हुए पूछा कि आखिर दशकों तक इस समस्या को क्यों पालकर रखा गया? उन्होंने कहा, "लोग कहते हैं कि वे विकास और न्याय के लिए लड़ रहे हैं, लेकिन बस्तर में अब नक्सलवाद लगभग समाप्त हो चुका है. वहां अब स्कूल बन रहे हैं, अस्पताल खुल रहे हैं और लोगों को आधार कार्ड व राशन मिल रहा है."
अर्बन नक्सलियों पर बड़ा हमला
गृह मंत्री ने 'अर्बन नक्सलियों' के दोहरे चरित्र को उजागर करते हुए कहा कि उनके लेख केवल हथियार उठाने वालों के पक्ष में होते हैं. उन्होंने सवाल किया, "क्या कभी उन मांओं के लिए कोई लेख लिखा गया जिनके बच्चों को जबरन नक्सली बना दिया गया? क्या उन 5,000 शहीद जवानों की विधवाओं के लिए कोई सहानुभूति है? यह मानवतावाद नहीं, बल्कि नक्सल समर्थक सोच है."
प्रमुख बिंदु जो अमित शाह ने सदन में रखे
- हथियारों का सच: नक्सलियों से बरामद 92% हथियार पुलिस से लूटे गए हैं.
- अवैध वसूली: एक नक्सली सचिव के कंप्यूटर से मिले आंकड़ों के अनुसार, नक्सलियों ने 240 करोड़ रुपये की अवैध वसूली की है.
- संविधान सर्वोपरि: शाह ने साफ किया कि पूरी व्यवस्था को नकार कर हथियार उठाना लोकतंत्र का तरीका नहीं हो सकता.
- विकास की बयार: लाल आतंक की परछाई हटने से अब बस्तर विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा है.
- उन्होंने अंत में सुरक्षाबलों, विशेषकर CRPF, कोबरा कमांडो, छत्तीसगढ़ पुलिस और DRG के जवानों को इस बड़ी जीत के लिए नमन किया और शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी.
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