अन्नामलाई ने आखिरकार छोड़ी बीजेपी, केंद्रीय नेतृत्व ने मंजूर किया इस्तीफा

न्यूज तक डेस्क

05 Jun 2026 (अपडेटेड: Jun 5 2026 1:37 PM)

K. Annamalai Resigns: तमिलनाडु बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने आखिरकार भारतीय जनता पार्टी से इस्तीफा दे दिया है, जिसे पार्टी हाईकमान ने मंजूर भी कर लिया है. पिछले कई दिनों से उनके इस्तीफे को लेकर अटकलें चल रही थीं, जिस पर अब पूरी तरह विराम लग गया है.

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K Annamalai resignation news: दक्षिण भारत की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है. तमिलनाडु बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) छोड़ दी है. बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है. पिछले कुछ दिनों से अन्नामलाई के राजनीतिक भविष्य और उनके इस्तीफे को लेकर लगातार सस्पेंस बना हुआ था, जो अब पूरी तरह खत्म हो गया है.

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अमित शाह के साथ बैठक में ही तय हो गई थी स्क्रिप्ट

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, अन्नामलाई के इस्तीफे की स्क्रिप्ट कुछ दिन पहले दिल्ली में ही लिख दी गई थी. उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन और संगठन महामंत्री बीएल संतोष के साथ कई दौर की मैराथन बैठकें की थीं. इस मुलाकात के दौरान ही अन्नामलाई ने साफ कर दिया था कि वह अब पार्टी से अलग होकर किसी नई राह पर चलना चाहते हैं. बीजेपी आलाकमान ने उन्हें मनाने की काफी कोशिशें कीं, लेकिन बात नहीं बनी और आखिरकार उनका इस्तीफा मंजूर कर लिया गया.

आंध्र प्रदेश में पहले ही दिख गया था 'अन्नामलाई इफेक्ट'

अन्नामलाई के इस फैसले का असर तमिलनाडु के साथ-साथ पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश की राजनीति पर भी देखने को मिला. बीजेपी उन्हें आंध्र प्रदेश के कोटे से राज्यसभा भेजने की तैयारी में थी. लेकिन जैसे ही उनके इस्तीफे की बात कंफर्म हुई, बीजेपी ने आंध्र प्रदेश में अपने हिस्से की राज्यसभा सीट सहयोगी दल तेलगुदेशम के लिए छोड़ दी. इसके बाद वहां चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी को तीन और पवन कल्याण की जनसेना को एक सीट मिल गई.
 

अब क्या होगा अन्नामलाई का अगला कदम?

पूर्व आईपीएस अधिकारी के. अन्नामलाई को तमिलनाडु में बीजेपी का सबसे बड़ा और आक्रामक चेहरा माना जाता था. उनके नेतृत्व में पार्टी ने राज्य में काफी आक्रामक राजनीति की थी. अब जब उनका इस्तीफा मंजूर हो चुका है, तो सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज है कि उनका अगला कदम क्या होगा? क्या वह कोई नया राजनीतिक मोर्चा खोलेंगे या किसी क्षेत्रीय दल के साथ अपनी नई पारी की शुरुआत करेंगे, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं.