Charchit Chehra: दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को दिल्ली एक्साइज पॉलिसी मामले में बड़ी राहत मिली है. राउज एवेन्यू कोर्ट ने 2022-23 की कथित शराब नीति घोटाला मामले में केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को बरी कर दिया. अदालत ने साफ कहा कि आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत पेश नहीं किए जा सके और अभियोजन पक्ष अपना मामला साबित करने में विफल रहा.
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कोर्ट के फैसले के बाद आम आदमी पार्टी के नेताओं ने इसे "न्याय की जीत" बताया. इस केस में कुल 21 आरोपियों को राहत मिली है. हालांकि जांच एजेंसियों ने उच्च न्यायालय में अपील कर दी है.
क्या था दिल्ली एक्साइज पॉलिसी मामला?
दिल्ली सरकार ने 17 नवंबर 2021 को नई शराब नीति लागू की थी. 8 जुलाई 2022 को तत्कालीन मुख्य सचिव नरेश कुमार की रिपोर्ट में नीति में कथित अनियमितताओं का जिक्र हुआ. रिपोर्ट में मनीष सिसोदिया समेत कई नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए गए. इसके बाद एलजी वीके सक्सेना ने सीबीआई जांच की सिफारिश की. 17 अगस्त 2022 को सीबीआई ने मामला दर्ज किया. बाद में ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत भी केस दर्ज किया.
इस दौरान कई आप नेताओं को जेल जाना पड़ा. जमानत याचिकाएं भी कई बार खारिज हुईं. यह दौर पार्टी के लिए राजनीतिक और कानूनी दबाव का समय रहा.
जेल से अदालत तक का सफर
केजरीवाल की गिरफ्तारी ने देशभर में राजनीतिक हलचल पैदा की. सिटिंग सीएम रहते हुए जेल जाना उनके राजनीतिक जीवन का सबसे कठिन दौर माना गया. उन्होंने आरोप लगाया था कि उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है. अब कोर्ट से बरी होने के बाद वे इसे सच्चाई की जीत बता रहे हैं.
हरियाणा से दिल्ली की सत्ता तक
16 अगस्त 1968 को हरियाणा के हिसार जिले के सिवानी गांव में जन्मे अरविंद केजरीवाल एक साधारण परिवार से आते हैं. उन्होंने आईआईटी खड़गपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. शुरुआत में प्राइवेट क्षेत्र में काम किया, फिर 1995 में यूपीएससी पास कर भारतीय राजस्व सेवा (IRS) जॉइन की.
आईआरएस अधिकारी रहते हुए उनकी मुलाकात सुनीता केजरीवाल से हुई, जो खुद भी आईआरएस अधिकारी थीं. दोनों ने शादी की. दो बच्चों के साथ उनका परिवार एक सामान्य मध्यमवर्गीय जीवन जीता रहा.
सामाजिक कार्य से राजनीति तक
सरकारी सेवा के दौरान ही केजरीवाल ने पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए काम शुरू किया. उन्होंने ‘परिवर्तन’ नामक संस्था बनाई और सूचना के अधिकार (RTI) को लेकर जनजागरूकता अभियान चलाया. 2006 में उन्हें मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
2011 में अन्ना हजारे के नेतृत्व में जनलोकपाल आंदोलन ने उन्हें राष्ट्रीय पहचान दी. जंतर-मंतर और रामलीला मैदान में हुए आंदोलन ने देश की राजनीति को नई दिशा दी. यहीं से उन्होंने राजनीति में उतरने का फैसला किया और 2 अक्टूबर 2012 को आम आदमी पार्टी की स्थापना की.
चुनावी सफर और राजनीतिक उतार-चढ़ाव
2013 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में AAP ने 28 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया. केजरीवाल ने शीला दीक्षित को हराया और पहली बार मुख्यमंत्री बने. हालांकि सरकार 49 दिन में गिर गई. 2015 में पार्टी ने 70 में से 67 सीटें जीतकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की. 2020 में भी शानदार प्रदर्शन दोहराया गया.
शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली-पानी सब्सिडी और मोहल्ला क्लीनिक मॉडल उनकी राजनीति का आधार रहे. हालांकि हाल के चुनाव में नई दिल्ली सीट से उन्हें भाजपा उम्मीदवार प्रवेश साहिब सिंह से हार का सामना करना पड़ा.
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