Who is Pradyut Bordoloi: असम विधानसभा चुनाव 2026 की तारीखों के ऐलान के साथ ही प्रदेश में कांग्रेश काे बड़ा झटका लगा है. यहां पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शुमार सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने मंगलवार को कांग्रेस से इस्तीफ दिया था. इसके बाद बुधवार को उन्होंने बीजेपी जॉइन कर ली है. असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने खुद इस खबर की पुष्टि की है. अपने सीनियर नेता हे पार्टी छोड़ने के बाद से कांग्रेस खेमे में खलबली मच हुई है.
ADVERTISEMENT
आपको बता दें कि प्रद्युत बोरदोलोई असम की राजनीति में जानमान चेहरा हैं. उनके पास अभी सांसद के तौर पर 3 साल का कार्यकाल बचा हुआ था, लेकिन विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने इस्तीफा देकर सबको हैरान कर दिया. बीजेपी का मानन है कि बोरदोलोई जैसे कद्दावर नेता के आने से जमीनी स्तर पर पार्टी की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी.
कांग्रेस के लिए बड़ी टेंशन
प्रद्युत बोरदोलोई असक के कद्दावार नेता है. वे पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई की सरकार में मंत्री रह चुके हैं. इसके साथ ही विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की घोषणापत्र समिति के अध्यक्ष भी थे. ऐसे में राजनीतिक जानकारों का कहना है कि उनके जाने से कांग्रेस का वोट बैंक प्रभावित होने के साथ ही कार्यकर्ताओं का मनोबल भी डाउन होगा.
एक महीने में दूसरा बड़ा झटका
असम कांग्रेस के लिए ये दूसरा बड़ा छटका है. इससे पहले करीब एक महीने पहले ही असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा ने भी पार्टी छोड़कर भाजपा ज्वाइन की थी. एक के बाद एक दिग्गज नेताओं का इस तरह पाला बदलना कांग्रेस के लिए आगामी चुनाव में मुसीबत बन सकता है.
कौन हैं प्रद्युत बोरदोलोई?
प्रद्युत बोरदोलोई की पहचान एक पढ़े-लिखे और सुलझे हुए राजनेता की रही है. वे कॉटन यूनिवर्सिटी और जेएनयू के छात्र रहे हैं और छात्र जीवन में एनएसयूआई से जुड़े थे. वे मार्गेरिटा विधानसभा क्षेत्र से लगातार चार बार विधायक रहे हैं. उनके पास लंबा प्रशासनिक और विधायी अनुभव है, जिसका फायदा अब भाजपा को मिलने वाला है. अब देखना यह होगा कि 9 अप्रैल को होने वाली वोटिंग में इस दलबदल का कितना असर दिखता है.
असम में इस दिन होंगे चुनाव
असम की 126 विधानसभा सीटों पर होने वाले इस मुकाबले के लिए चुनाव आयोग ने पूरी तैयारी कर ली है. राज्य में 9 अप्रैल को जनता अपने मताधिकार का प्रयोग करेगी, जबकि 4 मई को चुनावी नतीजों का एलान होगा. फिलहाल भाजपा बढ़त बनाती दिख रही है, वहीं कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने बचे हुए कुनबे को एकजुट रखने की है.
यह भी पढ़ें: असम फिर खिलेगा कमल या कांग्रेस करेगी बड़ा उलटफेर? देखें MATRIZE-IANS के ओपिनियन पोल में क्या पता चला
ADVERTISEMENT


